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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Wednesday, 30 November 2011

एक अरब के स्टेडियम को लगी दीमक

0 उद्घाटन के तीन साल बाद भी अधूरा
0 पैवेलियन के कांच व टाइल्स टूट-फूट रहे
0 मैदान व पिच पर जगह-जगह दीमक
0 स्टेडियम लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर पर अधूरे काम शुरू नहीं
 

शंकर चंद्राकर
रायपुर। नई राजधानी की शान व एक अरब रुपए से भी अधिक की लागत से बने प्रदेश के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को दीमक खा रही है। उद्घाटन के तीन साल बाद भी स्टेडियम अभी तक अधूरा ही है। अभी भी इसमें एसी, जनरेटर, कार्पोरेट बाक्स, कुर्सी लगाने समेत कई काम बचे हुए हैं। स्टेडियम के मैदान व पिच पर जगह-जगह दीमक की बांबी बन गई है। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने स्टेडियम को लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर कर दिया है, लेकिन बाकी बचे कामों पर विभाग अभी तक ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में यहाँ अंतरराष्ट्रीय मैच के बारे में सोचना अभी सपना ही है।
उद्घाटन के बाद इन तीन सालों में स्टेडियम में अभी तक तकरीबन 200 मैच खेले जा चुके हैं। इनमें छत्तीसगढ़ और कनाडा के बीच खेले गए अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच, विभिन्ना आयु वर्ग के बीसीसीआई एसोसिएट ट्राफी व घरेलू मैच शामिल हैं। स्टेडियम के ग्राउंड व पिच के रखरखाव की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने ली है। क्रिकेट संघ ने अपने खर्चे पर वहां छह कर्मचारी नियुक्त किया है, जो किसी तरह ग्राउंड का मेटेनेंस करते हैं। इसके बावजूद मैदान की हालत खराब है। दीमक ने पिच को भी नहीं छोड़ा है।
ग्राउंडमैन का कहना है कि अभी मैच नहीं होने के कारण पानी का छिड़काव नहीं किया गया, इस कारण कई जगह पर दीमक लग गई है। अब जहां-जहां दीमक लगी है, वहां पर नई मिट्टी डालकर कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। मैच के अनुसार पिच का मेंटेनेंस किया जाता है। चूंकि यहां पर नौ पिच हैं, जिस पर मैच होना होता है, उसी पिच पर ध्यान दिया जाता है। इस कारण अन्य पिच पर कहीं-कहीं दीमक लग गई है। उसे ठीक कर लिया जाएगा। 
पैवेलियन के कांच टूटे
मैदान के अलावा पैवेलियन के सामने और प्रवेश द्वार पर लगे कीमती कांच टूट गए हैं। इसके अलावा पैवेलियन के सामने कई जगहों पर टाइल्स भी उखड़ चुकी है। पैवेलियन में लगी कुर्सी भी कई जगह उखड़ गई है। यही हाल अन्य जगहों पर भी है।





एसी, कुर्सी व जनरेटर का काम बचा
स्टेडियम में अभी एयरकंडीशन, कुर्सी लगाने, जनरेटर का काम बचा है। कार्पोरेट बाक्स भी अधूरा है। मेंटेनेंस के अभाव में स्टेडियम के दर्शक दीर्घा समेत अन्य स्थानों पर कचरे का ढेर है। इसके अलावा पैवेलियन में मीडिया गैलरी, अंपायर, डोप रुम समेत अन्य बेसिक सुविधाएं डेवलप करना बाकी है।
आगे का काम पीडब्ल्यूडी के जिम्मे
इस संबंध छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे का कहना है कि ग्राउंड मेंटेनेंस की जिम्मेदारी क्रिकेट संघ ने ली है। वहां छह कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। प्रदेश संघ हर माह कर्मचारियों के वेतन व ग्राउंड के मेंटेनेंस पर करीब 50 हजार रुपए खर्च कर रहा है। स्टेडियम का जो भी अधूरा काम है, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टेडियम के अधूरे काम के लिए पांच करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिया है। इसके लिए विभाग ने संघ से जरूरी काम करवाने के लिए सूची मांगी थी। संघ ने उसकी सूची भी पीडब्ल्यूडी विभाग को दे दी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
स्टेडियम पूरा हो तो जगेगी उम्मीद
श्री दवे ने कहा कि प्रदेश संघ को 2013 में बीसीसीआई से पूर्ण मान्यता मिलना तय है। यदि इसके पूर्व ही स्टेडियम का अधूरा काम पूरा हो जाता है तो बोर्ड से यहां रणजी, दिलीप ट्राफी जैसे महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट के सेमीफाइनल-फाइनल मैच मांगने का प्रयास किया जाएगा। प्रथम श्रेणी मैच के लिए भी स्टेडियम की सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मापदंड के अनुरूप होना जरूरी है। संघ अपनी ओर से पूरी तरह तैयार है।



एक साल में पूरा हो जाएगा काम
'काम शुरू हो गया हो गया है। खेल विभाग के निर्देशानुसार काम किया जाएगा। स्टेडियम के सभी अधूरे कार्य एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है। जैसे-जैसे शासन से पैसा स्वीकृत होगा, वैसे ही काम होता जाएगा। अभी स्टेडियम के चारों ओर सड़क बनाने का काम चल रहा है।"
- बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री लोक निर्माण विभाग।
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स्टेडियम एक नजर
स्थित : ग्राम परसदा, नई राजधानी क्षेत्र।
क्षेत्रफल : 50 एकड़।
उद्घाटन : 11 सितंबर, 2008 को।
इनफील्ड ग्राउंड : 90 गज यार्ड, जो आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न स्टेडियम के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्टेडियम।
अनुमानित लागत : 98.45 करोड़ रुपए। अभी करोड़ों के काम बाकी।
दर्शक क्षमता : 60 हजार से अधिक।
पार्किंग व्यवस्था : 6000 चारपहिया वाहन, अलग से मोटरसाइकिल व साइकिल स्टैंड।
परिवहन व्यवस्था : हावड़ा-मुंबई राष्ट्रीय मार्ग क्र.-6,
रायपुर-भुवनेश्वर-पुरी रेलमार्ग, माना विमानतल, स्टेडियम के पास हेलीपैड।
पिच : 9 मैच पिच, 3 अभ्यास पिच।
सिंचाई व्यवस्था : स्वचलित स्प्रिंकलर।
कार्पोरेट बाक्स : 40 बाक्स।
स्कोरबोर्ड : इलेक्ट्रानिक लाइट।
फ्लड लाइट : 6 हाई मास्क लाइट।
म्यूजियम : क्रिकेट म्यूजियम बनाया जाएगा। म्यूजियम में छत्तीसगढ़ की
संस्कृति की झलक दिखेगी, लेकिन अभी  बना नहीं।
टिकट प्लाजा : 11 प्लाजा।
रेस्टोरेंट : एक पांच सितारा स्तर की सर्वसुविधायुक्त रेस्टोरेंट की व्यवस्था।
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पूरी स्टोरी एक नज़र ......


Monday, 28 November 2011

मणिपुर के महेश व नंदा जूनियर ट्रायथलॉन चैंपियन


0 20वीं नेशनल ट्रायथलॉन चैंपियनशिप शुरू 0 सब-जूनियर एक्वाथलॉन में कर्नाटक के सुहास व मीनल विजेता



रायपुर। 
20वीं नेशनल सब-जूनियर, जूनियर व सीनियर ट्रायथलॉन चैंपियनशिप के जूनियर वर्ग में मणिपुर के खिलाड़ियों का दबदबा रहा। स्पर्धा के पहले दिन जूनियर ट्रायथलॉन के बालक वर्ग में मणिपुर के एल. महेश सिंह और बालिकाओं में मणिपुर की ही एस. नंदा देवी चैंपियन बनीं। सब-जूनियर एक्वाथलॉन में कर्नाटक के खिलाड़ियों ने बाजी मारी। इसमें बालक वर्ग में सुहास वाय. और बालिकाओं में मीनल बी. शिवप्रकाश विजेता रहीं।


स्पर्धा की शुरुआत जूनियर ट्रायथलॉन से हुई। इसमें खिलाड़ियों ने 750 मीटर तैराकी 20 किमी साइकिलिंग व 5 किमी दौड़ में हिस्सा लिया। तीनों इवेंट के बाद जूनियर ट्रायथलॉन के बालक वर्ग में मणिपुर के एल. महेश सिंह एक घंटा तीन मिनट 48.87 सेकंड का समय लेकर पहले स्थान पर रहे। मणिपुर के ही पेरिश सिंह एक घंटा पांच मिनट 59.30 सेकंड का समय लेकर दूसरे और महाराष्ट्र के अक्षय कदम एक घंटा छह मिनट व 46.65 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इसी तरह बालिका वर्ग में मणिपुर की एस. नंदा देवी एक घंटा 15 मिनट 48.10 सेकंड का समय लेकर प्रथम, महाराष्ट्र की स्वप्नाली यादव एक घंटा 17 मिनट 43.72 सेकंड के साथ द्वितीय व गुजरात की कहर क्रुथिका ए. एक घंटा 21 मिनट 31.21 सेकंड के साथ तृतीय रहीं। 
इसके बाद सब-जूनियर एक्वाथलॉन की स्पर्धा हुई। इसमें खिलाड़ियों ने 350 मीटर तैराकी व 3 किमी दौड़ में हिस्सा लिया। स्पर्धा के बाद सुहास वाय. 15 मिनट 16.93 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। कर्नाटक के ही सूरज कुमार ने 15 मिनट 45.50 सेकंड का समय लेकर रजत पदक जीता। उड़ीसा के रूबेन बिलुंग ने 15 मिनट 46.86 सेकंड के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। बालिका एक्वाथलॉन में कर्नाटक की मीनल बी. शिवप्रकाश ने 18 मिनट 11.40 सेकंड के साथ स्वर्ण व चेतना गौड़ा ने 18 मिनट 14.46 सेकंड का समय लेकर रजत पदक जीता। तमिलनाडु की प्रियंका पुगल अरसु ने 18 मिटन 50.60 सेकंड का समय में स्पर्धा पूरी कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। 


नेशनल गेम्स को चुनौती की तरह लें 
इसके पूर्व स्पर्धा का उद्घाटन राज्यपाल शेखर दत्त ने झंडी दिखाकर किया। इस मौके पर राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 37वें नेशनल गेम्स प्रस्तावित है, जो इसी जगह होना है। यहां के खिलाड़ियों को इसे चुनौती के रूप में लेना चाहिए। इसकी तैयारी कर ज्यादा मेडल जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि ट्रायथलॉन दमखमभरा ओलिंपिक गेम है। इसमें पूरी क्षमता का प्रयोग किया जाता है। राज्यपाल ने कहा कि लोग खेलों को गोद लेकर छत्तीसगढ़ में खेलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने दूसरे राज्यों के कोच व खिलाड़ियों से कहा कि वे यहां आकर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को सिखाएं। उन्हें भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। राज्यपाल ने अभिभावकों से भी कहा कि वे अपने बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें, क्योंकि आजकल के ज्यादातर आइकॉन स्पोर्ट्स से ही हैं। समारोह को खेल मंत्री लता उसेंडी, भारतीय ट्रायथलॉन संघ के महासचिव राकेश गुप्ता, छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के महासचिव बलदेव सिंह भाटिया व पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ने भी संबोधित किया। आभार प्रदर्शन आयोजन सचिव डॉ. विष्णु श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर संसदीय सचिव विजय बघेल, खेल सचिव मनोहर पांडे, खेल संचालक जीपी सिंह, संजय बाजपेयी समेत अन्य पदाधिकारी, खिलाड़ी व बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं मौजूद थे। 

Wednesday, 2 November 2011

रायपुर में टीम इंडिया के "दीवार"

० निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये 
० पूरे समय मीडिया से दूर रहे 
अंतरराष्ट्रिय क्रिकेट स्टेडियम के निरीक्षण के दौरान द्रविड़ का स्वागत करते हुए छग क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया.
रायपुर. टीम इंडिया में "दीवार" के नाम से मशहूर क्रिकेटर राहुल द्रविड़ मंगलवार रात को एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रायपुर पहुंचे. द्रविड़ बुधवार को नई राजधानी स्थित अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निरीक्षण भी किया. इस मौके पर छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया ने द्रविड़ का गुलदस्ता भेंटकर स्वागत भी किया. पहली बार रायपुर आये द्रविड़ ने छत्तीसगढ़ जैसे नए राज्य में सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम का होना गौरव की बात कही. उन्होंने उम्मीद जताई की यहाँ शीघ्र ही अंतर्राष्ट्रीय मैच भी होंगे. इस दौरान संघ के सचिव राजेश दवे समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे. 

वेटल ने जीती इंडियन ग्राँप्रि

रेस के दौरान पहले नंबर पर रेडबुल के रेसर वेटल अपनी कार दौडाते हुए.
0 भारत में पहली बार हुई फॉर्मूला -1 रेस
0 17वें स्थान पर रहे नारायण कार्तिकेयन
0 सहारा फोर्स इंडिया के सुतिल 9वें स्थान पर

ग्रेटर नोएडा।
सबसे युवा डबल विश्व चैंपियन रेडबुल के सेबेस्टियन वेटल ने रविवार को यहाँ पहली इंडियन ग्राँप्रि फॉर्मूला वन रेस जीत ली जबकि ब्रिटेन के जेंसन बटन दूसरे और स्पेन के फर्नांडो अलोंसो तीसरे नंबर पर रहे। चैंपियनशिप में एकमात्र भारतीय रेसर नारायण कार्तिकेयन 17वें स्थान पर रहे जबकि चैंपियनशिप की एकमात्र भारतीय टीम सहारा फोर्स इंडिया के जर्मन रेसर एड्रियन सुतिल 9वें और ब्रिटिश रेसर पॉल डी रेस्टा 13वें स्थान पर रहे।
सर्किट के मुख्य पैवेलियन के पास गुजरता कारों का काफिला
5.14 किमी लंबे बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट के रेसिंग ट्रैक पर जर्मनी के वेटल ने पोल पोजीशन से शुरुआत कर सबसे तेज समय निकाला। वेटल की इस साल 17 रेसों में यह 11वीं जीत है। वे इंडियन ग्राँप्रि शुरूहोने से पहले ही विश्व चैंपियन बन चुके थे। अब उन्होंने ओवरऑल चैंपियनशिप में अपना स्कोर मजबूत कर लिया है। 60 लैप की कुल 308 किमी लंबी यह रेस वेटल ने एक घंटे 30 मिनट और 35.002 सेकंड में पूरी की। उन्होंने एक मिनट 27.249 सेकंड का सबसे तेज लैपटाइम 60वीं और अंतिम लैप में निकाला।
रेस के दौरान माडलों का भी रहा जलवा.
 इसी के साथ वेटल नाइजल मानसेल के एक सत्र में सर्वाधिक 14 पोल पोजीशन हासिल करने के रिकॉर्ड की भी बराबरी करने से  एक कदम दूर हैं। वेटल इस सत्र 17 में से 13 रेसों में पोल पोजिशन पर रहे हैं।  गौरतलब है कि मानसेल ने यह रिकॉर्ड 16 रेसों में स्थापित किया था। टीम मॅक्लारेन के ब्रिटिश ड्राइवर बटन ने चौथी ग्रिड से शुरुआत करने के बावजूद जबरदस्त तेजी दिखाई और अलोंसो तथा रेडबुल के मार्क वेबर को काफी पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2008 के चैंपियन ब्रिटेन के लुईस हैमिल्टन और फेरारी के ब्राजीली ड्राइवर फिलिप मासा की कारें आपस में टकरा गईं। इन दोनों रेसरों के बीच ट्रैक पर यह छठी टक्कर है। इस कारण ब्राजीली रेसर को पेनल्टी भी दी गई और थोड़ी देर बाद वे कार क्षतिग्रस्त होने के कारण रेस बीच में ही छोड़कर हट गए।
वेटल की विशिष्ट उपलब्धि
ट्राफी के साथ वेटल
सेबेस्टियन वेटल के लिए पहली इंडियन ग्राँप्रि कई मायनों में ऐतिहासिक बन गई। उन्होंनेे इस रेस के पहले विजेता बनने के अलावा एक साथ कई ऐसी उपलब्धियाँ अर्जित की जो वे आज तक एक साथ किसी एक रेस में हासिल नहीं कर पाए थे। यह पहला मौका था जब वेटल ने पोल पोजीशन हासिल की, फास्टेस्ट लैप किया, हर लैप में अग्रणी रहे और इसके साथ ही खिताब भी हासिल किया। यह वेटल का इस वर्ष का 11वाँ खिताब है। अब वे एक वर्ष में सबसे ज्यादा रेस जीतने के माइकल शूमाकर के रिकॉर्ड की बराबरी से 2 जीत दूर हैंै। शूमाकर ने 2004 में 13 रेस जीती थीं।



इंडियन ग्राँप्रि के परिणाम
क्रम          ड्राइवर                                          टीम
1              सेबेस्टियन वेटल                             रेड बुल
2               जेंसन बटन                                   मॅक्लारेन
3               फर्नांडो अलोंसो                               फेरारी
4                मार्क बेबर                                    रेड बुल
5                माइकल शूमाकर                        मर्सिडीज
6                निको रॉसबर्ग                              मर्सिडीज
7                लुईस हैमिल्टन                           मॅक्लारेन
8                 जैमी अल्गुसुआरी                      टोरो रोसो
9                 एड्रियन सुतिल                          सहारा फोर्स इंडिया
10              सर्जियो पेरेज                              सॉबर
11               विताली पेत्रोव                            रेनाल्ट
12               ब्रुनो सेना                                   रेनाल्ट
13               पॉल डी रेस्टा                            सहारा फोर्स इंडिया
14                हेइकी कोवालाइन                     लोटस
15                रूबेंस बेरिचेलो                         विलियम्स
16                 जेरोम डी एम्ब्रोसियो                वर्जिन
17                  नारायण कार्तिकेयन               हिस्पेनिया
18                 डेनियल रिकॉर्डो                      हिस्पेनिया
19                यार्नो ट्रूली                                 लोटस
20                फेलिप मासा                           फेरारी
21                सेबेस्टियन बुएमी                    टोरो रोसो
22               पास्टर माल्डोनाडो                    विलियम्स
23                 टिमो ग्लॉक                            वर्जिन
24                कामुई कोबायाशी                    सॉबर
नोट : अंतिम पाँच स्थानों पर रहे चालकों ने रेस पूरी नहीं की। मासा ने 32 लैप के बाद रेस छोड़ी। वहीं बुएमी ने 24, पास्टर ने 12, टिमो ने 2 और कोबायाशी ने बिना कोई लैप पूरा किए रेस से हट गए।
ओवरऑल चैंपियनशिप तालिका
क्रम        चालक                               अंक
1             सेबेस्टियन वेटल                374
2              जेंसन बटन                       240
3               फर्नांडो अलोंसो                 227
4              मार्क बेवर                         221
5             लुईस हेमिल्टन                  202
6              फेलिप मासा                     98
7              निको रॉसबर्ग                   75
8              माइकल शूमाकर              70
9              विताली पेत्रोव                   36
10            निक हेडफेल्ड                   34
11            एड्रियन सुतिल                 30
12            कामुई कोबायाशी              27
13             जेमी अल्गुरसुआरी          26
14              पॉल डी रेस्टा                   21
15            सेबेस्टियन बुएमी             15
16            सर्जियो पेरेज                    14
17            रूबेंस बेरिचेलो                   4
18             ब्रूनो सेना                         2
19             पास्टर माल्डोनाडो            1
(अन्य चालक अभी तक अंकों का खाता नहीं खोल पाए हैं)
कंस्ट्रक्टर्स तालिका
क्रम              टीम                                         अंक
1                   रेडबुल-रेनॉल्ट                          595
2                  मैक्लॉरेन-मर्सिडीज                   442
3                   फेरारी                                      325
4                   मर्सिडीज                                  145
5                   रेनॉल्ट                                     72
6                सहारा फोर्स इंडिया-मर्सिडीज       51
7                 सॉबर-फेरारी                               41
8                 एसटीआर-फेरारी                         41
9                 विलियम्स-कॉसवर्थ                      5
10              लोटस-रेनॉल्ट                                0
11              एचआरटी-कॉसवर्थ                         0
12               वर्जिन-कॉसवर्थ                             0
इंडियन ग्राँप्रि जीतने पर गर्व : वेटल
ट्राफी को चुमते हुए वेटल
 जीत के बाद सेबेस्टियन वेटल ने कहा कि उन्हें इंडियन फॉर्मूला-वन ग्राँप्रि का पहला विजेता बनने पर गर्व है। यह रेस बेहद अच्छी रही और उन्हें इसमें बड़ा मजा आया। वेटल ने कहा- जेंसन बटन से कड़ी चुनौती मिली, लेकिन मुझे खुशी है कि मैं इस पहली इंडियन ग्राँप्रि को जीतने में सफल रहाा। सर्किट में यह बेहद जरूरी है कि रेस के अंत तक टायर अच्छी हालत में बने रहें और उस दृष्टि से यह अच्छी रेस रही। मैं जीत के लिए टीम तथा रेनॉल्ट को धन्यवाद देता हूँ।
वेटल ने कहा- मेरे लिए यह मिश्रित भावनाओं वाली जीत है। जहाँ मुझे इंडियन ग्राँप्रि के पहले विजेता होने का गर्व है, वहीं इस बात का दुख है कि पिछले दिनों ही हमने अपने दो साथियों को खोया है। मैं व्यक्तिगत रूप से इंडीकार चालक डैन वेल्डन को नहीं जानता हूँ लेकिन वे मोटरस्पोटर््स में बड़ा नाम हैं। मैं मोटो जीपी चालक मार्को सिमोन्सेली को जानता था और इस दुख के क्षण में मैं दोनों के परिजनों के साथ हूँ। वेटल ने कहा- हम कुछ जोखिम उठाने को तैयार हैं लेकिन हम चाहते हैं कि कोई दुर्घटना न घटे।
भारत महान देश :  इंडियन ग्राँप्रि के बारे में पूछे जाने पर वेटल ने कहा कि चूँकि पहला मौका था इसलिए आयोजन में कुछ कमियाँ रह गई हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि अगले वर्ष तक इनको दूर कर लिया जाएगा। बुद्ध इंटरनेशलन सर्किट लाजवाब है और इसके लिए मैं भारतीयों का शुक्रगुजार हूँ। भारत एक महान देश है। यह निश्चित रूप से योरप से अलग है, लेकिन यहाँ के लोग काफी मिलनसार हैं। यहाँ दोस्ती और भावनाओं का काफी महत्व है। हम इनसे काफी कुछ सीख सकते हैं।
यह रेस डेन व मार्को को समर्पित करनी चाहिए : बटन
रेस जितने के बाद जेंसन बटन (बाएं), वेटल और अलोंसो (दायें)
दूसरे स्थान पर रहे जेंसन बटन ने कहा कि यह रेस सच में मिश्रित अनुभवों वाली है। मैं डेन वेल्डेन को अच्छी तरह जानता था। डेन वेल्डेन और मार्को को खोना मोटर स्पोटर््स की बड़ी क्षति है और हमें यह रेस इन दोनों को समर्पित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेरा इस सप्ताहांत का यहाँ का अनुभव अच्छा रहा। मेरा मानना है कि प्रत्येक रेसर यहाँ फिर आने के लिए बेताब रहेगा, क्योंकि भारत का यह सर्किट बेहद शानदार है। मुझे यह सर्किट बेहद पसंद आया। भारतीय आवभगत से अभिभूत बटन ने कहा- भारतीय प्रशंसकों ने देश में हमारा भव्य स्वागत किया, मैंने पहले कभी भी एक साथ इतने मुस्कुराते चेहरे नहीं देखे। दर्शकों ने सभी का जबर्दस्त उत्साहवर्धन किया। मैं उम्मीद करता हूँ कि भविष्य में फॉर्मूला-वन भारत में ज्यादा लोकप्रिय होगा और अगले वर्ष हम अधिक संख्या में दर्शक देखेंगे। रेस के बारे में बटन ने कहा- जहाँ तक टीम प्रयास की बात है हमने आज सभी कुछ सही किया। हमारी कार इतनी तेज नहीं थी कि हम रेस जीत सकें। मैंने अच्छी शुरुआत की, पहले लैप में अपने स्थान में सुधार किया और इसके बाद मैंने मार्क को पीछे छोड़ा।
इसके बाद मेरा ध्यान वेटल के करीब पहुँचने पर था, लेकिन यह मुश्किल था। बटन ने कहा-मेरी कार काफी अच्छी थी। इससे पहले कि वेटल प्राइम पर लय हासिल कर पाते मैंने उनसे 2.8 सेकंड का अंतर कम कर लिया, लेकिन यह काफी नहीं था। बावजूद इसके यह हमारे लिए काफी अच्छा परिणाम रहा और मुझे लगता है कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
पोडियम पर रहना सुखद अहसास : फर्नांडो अलोंसो
 तीसरे स्थान पर रहने वाले फेरारी के फर्नांडो अलोंसो ने कहा कि भारत में हुई इस पहली फॉर्मूला वन रेस के पोडियम पर रहना सुखद अहसास है और मुझे खुशी है कि मैं एक नई ट्रॉफी घर लेकर लौटूँगा। हालाँकि आज का दिन खास था और मिश्रित अहसास लिए था। पोडियम पर पहुँचने की खुशी कुछ दिन पहले हुए हादसे के गम को कम नहीं कर सकती। हमारे दो विशेष चालक डैन वेल्डन और मार्को सिमोनसेली की दुर्घटना में मौत हो गई थी।  उन्होंने कहा- अब हम अबुधाबी जाएँगे। रेस से पहले मैं फेरारी पार्क जाकर गोल्फ खेलते हुए कुछ रिलेक्स करूँगा। रविवार रात को मैं वहाँ अभी तक हासिल नहीं हुई ट्रॉफी जीतने का प्रयास करूँगा।
चौथे स्थान पर रहे रेड बुल के मार्क वेबर ने कहा कि मैंने बीच रेस में ही स्थान गँवा दिया। इस वर्ष करीब हर बार ऐसा ही हुआ है। मैं गति बना पाने में सफल नहीं रहा हूँ और इसी वजह से मैं अपनी रणनीति पर कायम नहीं रह पा रहा हूँ। उन्होंने कहा कि फर्नांडो अलोंसो से कड़ा संघर्ष हुआ, लेकिन मॅक्लारेन और फेरारी पहले सेक्टर में काफी सशक्त थीं। अब हमें अबुधाबी पर ध्यान केन्द्रीत करना होगा।
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शाही आयोजन पर शाही खर्च

भारत में पहली बार फॉर्मूला-वन रेस आयोजित कराने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी गई। खिलाड़ियों के अलावा देशी-विदेशी मेहमानों का विशेष खयाल रखा गया। बदले में आयोजकों की तिजोरी भी खूब भरी।
भारत में फॉर्मूला-वन रेस आयोजित कराने के लंबे समय से प्रयास चल रहे थे। इसके लिए ग्रेटर नोएडा में सेक्टर-25 के पास बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट के निर्माण पर करीब 14 सौ से दो हजार करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। जिसके निर्माण के लिए 300 दक्ष इंजीनियरों के अलावा लगभग 5000 श्रमिकों को लगाया गया था। रेस का लुत्फ उठाने के लिए रफ्तार के दीवानों को कम से कम ढाई हजार और ज्यादा से ज्यादा 35 हजार रुपए में टिकट खरीदना पड़ा। फाइनल रेस का लुत्फ उठाने नब्बे हजार से ज्यादा दर्शक पहुँचे। इस आयोजन में प्रतिभाग के लिए एयरटेल सहित विभिन्न् कंपनियों ने करीब 240 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इसके अलावा राज्य सरकार को भी मोटा राजस्व मिला।
उधर, समापन समारोह के दौरान विदेशी पॉप सिंगर लेडी गागा के कार्यक्रम की एवज में भी आयोजकों को मोटी रकम मिली है। सूत्रों का कहना है कि इस कार्यक्रम के लिए चार करोड़ रुपए सिर्फ टिकट बेचकर कमाए गए हैं।
दूसरी तरफ बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट को लंबे समय तक सहेज कर रखा जाना है। माना जा रहा है कि इस सर्किट पर निकट भविष्य में निरंतर ऐसे आयोजन होते रहेंगे। जिससे जेपी ग्रुप को अपनी प्रॉपर्टी ऊँचे दामों में बेचने का भी मौका मिल जाएगा। एफ-1 रेस में शामिल विभिन्न् टीमों के सदस्यों को ठहराने व खान-पान पर भी मोटी रकम खर्च की गई है। खिलाड़ियों के शाही ठाठ का खयाल रखा गया।
खर्च व आय एक नजर
1. ट्रैक निर्माण की लागत-1400 से 2000 करोड़
2. 2500 रुपए के टिकट से आय-पाँच करोड़ रुपए
3. 6500 रुपए के टिकट से आय-13 करोड़ रुपए
4. 35 हजार के टिकट से आय-70 करोड़ रुपए
5. ऑनलाइन बुकिंग- पाँच करोड़ रुपए
6. कॉरपोरेट बॉक्स से  आय-2 करोड़ रुपए
7. एयरटेल कंपनी का निवेश-240 करोड़ रुपए
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क्रिकेटरों और सितारों का जमावड़ा
रेस को हरी झंडी दिखाते सचिन तेंदुलकर
ग्रेटर नोएडा। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ने इंडियन फॉर्मूला-वन ग्राँप्रि में रेस समाप्ति का झंडा लहराकर अपनी उपस्थिति विशेष रूप से दर्ज कराई। सचिन ने रेस प्रारंभ होने के पहले अपने दोस्त और सात बार के फॉर्मूला वन चैंपियन माइकल शूमाकर से मुलाकात भी की।
सचिन ने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में  शूमाकर और उनके टीम प्रिंसिपल रॉस ब्राउन से काफी देर तक चर्चा की। फॉर्मूला वन के कर्ता-धर्ता बर्नी एक्लेस्टोन के आमंत्रण पर सचिन यहाँ अपनी पत्नी अंजलि और बेटी सारा के साथ रेस देखने पहुँचे थे। सर्किट में पहुँचने के बाद सचिन ने बर्नी से भी मुलाकात की और लगभग आधे घंटे तक उनसे बातचीत की। इस दौरान महान रेसर जेकी स्टुअर्ट और बॉलीवुड अभिनेता गुलशन ग्रोवर भी इन दोनों के साथ मौजूद थे।
हरभजन सिंह अपनी महिला मित्र के साथ
सचिन ने बर्नी, शूमाकर और रेस में भाग ले रहीं सभी 12 टीमों के रेसरों तथा अधिकारियों के साथ ग्रैंड स्टैंड के सामने खड़े होकर वेल्डन और सिमोनसोली को श्रद्धांजलि अर्पित की। ब्रिटिश कार रेसर वेल्डन की अमेरिका के लॉस वेगास में इंडीकार रैली के दौरान हुई 15 कारों की टक्कर में मौत हो गई थी जबकि इतालवी बाइक रेसर सिमोनसोली मलेशियन मोटो जीपी टू के दौरान अपनी मोटरसाइकल फिसल जाने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। उनकी मौत के कारण यह रेस रद्द करनी पड़ी थी।
रेस का रोमांच देखने में वीवीआईपी से लेकर खेल तथा फिल्म जगत की हस्तियाँ भी पीछे नहीं रहे। मुख्यमंत्री मायावती ने वेटल को विजेता ट्रॉफी प्रदान की।
अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और उद्योगपति सिद्धार्थ माल्या 
क्रिकेटरों में सचिन के अलावा कप्तान महेंद्रसिंह धोनी, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजनसिंह, विराट कोहली जैसे धुरंधर खिलाड़ियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। बॉलीवुड अभिनेता शाहस्र्ख खान, अर्जुन रामपाल, इमरान खान व गुलशन ग्रोवर ने भी रेस का लुत्फ उठाया। वहीं बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ प्रीति जिंटा व दीपिका पादुकोण भी रेस का गवाह बनीं। इनके अलावा पॉप गायिका लेडी गागा व मशहूर गायक दलेर मेहँदी भी अपने जलवे बिखरने के लिए पहुँचे।
प्रीटी जिंटा रेस के रोमांचक पल को कैमरे में कैद करती हुयीं














अनिल कपूर कुछ इस अंदाज में रेस देखने पहुंचे 














फरदीन खान अपनी पत्नी के साथ 

Monday, 31 October 2011

रायपुर से दिल्ली तक फार्मूला-वन का रोमांच

0 इंडियन ग्रां-प्रि का गवाह बने  राजधानी के कई लोग
0 छत्तीसगढ़ में भी बढ़ेगा मोटर स्पोर्ट्स का क्रेज

रायपुर। इंडियन ग्रां-प्रि (ग्रैड प्रिक्स) फार्मूला वन रेस का रोमांच राजधानी रायपुर से दिल्ली-नोएडा तक छाया हुआ है। ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में पहली बार हुयी इस रेस का रायपुर के कई लोग गवाह बने। मोटर स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों का मानना है कि भारी-भरकम खर्च व रोमांच से भरपूर इस खेल का क्रेज आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के अन्य हिस्सों में भी बढ़ेगा।
देश में पहली बार हो रही फार्मूला-वन रेस का नाम आजकल हर किसी के जुबान पर है। छत्तीसगढ़ मोटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव उज्ज्वल दीपक वहां मार्शल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं संघ के अध्यक्ष हैप्पी सिब्बल भी नोएडा में फार्मूला वन का रोमांचक अनुभव ले रहे हैं।
दिल्ली से श्री सिब्बल ने बताया  कि बहुत की शानदार आयोजन हो रहा है। पहली बार भारत में इतना बड़ा आयोजन हो रहा है। रविवार को होने वाली मुख्य रेस का रोमांच ही अलग होगा। उन्होंने कहा कि इससे देश में फार्मूला वन का क्रेज बढ़ेगा। इस आयोजन से लोगों को भी इसकी ज्यादा जानकारी होगी। 
संघ के सचिव उज्जवल दीपक ने कहा कि इंडियन ग्रांप्री से भारत में मोटर स्पोर्ट्स को बढावा मिलेगा. छत्तीसगढ़ में भी इसे बढावा देने का प्रयास किया जायेगा.
संघ के उपाध्यक्ष डॉ. विष्णु श्रीवास्तव ने कहा कि वे व्यस्तता की वजह से फार्मूला वन रेस देखने नहीं जा सके, लेकिन छत्तीसगढ़ से कई लोग गए हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत ही नहीं, एशिया में सबसे बड़ा आयोजन है। यह ऐसा खेल है, जिसमें रोमांच व स्पीड है। इसमें जितना खर्च हुआ है वह आने वाले समय में उसकी लागत से अधिक वसूल हो जाएगी। देश को भी राजस्व मिलेगा।
मोटर स्पोर्ट्स का क्रेज बढ़ेगा
शाहनवाज खान
प्रदेश के पहले अंतरराष्ट्रीय बाइक रेसर रायपुर के शाहनवाज खान का कहना है कि फार्मूला वन से देश ही नहीं छत्तीसगढ़ में भी मोटर स्पोर्ट्स का क्रेज बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें भी मार्शल का पास मिला था, लेकिन इस समय उनकी ट्रेनिंग चल रही है, इसलिए वे नहीं जा सके। वे टीवी पर देखकर इसका रोमांच लेंगे। इसी माह चेन्नाई से अंतरराष्ट्रीय बाइक रेसिंग में हिस्सा लेकर लौटे शाहनवाज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब धीरे-धीरे युवाओं में मोटर स्पोर्ट्स व बाइक रेसिंग क्रेज बढ़ रहा है। फार्मूला वन से इसका क्रेज और बढ़ेगा।
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दस साल में चार बड़े आयोजन
डॉ. विष्णु श्रीवास्तव
नया राज्य होने के बावजूद बीते दस सालों में छत्तीसगढ़ में नेशनल लेवल के मोटर स्पोर्ट्स के चार बड़े आयोजन हो चुके हैं। इनमें से दो कार रैली और दो नेशनल बाइक रेसिंग शामिल हैं। इस संबंध में संघ के उपाध्यक्ष डॉ. विष्णु श्रीवास्तव का कहना है कि कम समय ही छत्तीसगढ़ में मोटर स्पोर्ट्स को काफी बढ़ावा मिला है। 
छग में अब तक के आयोजन
1. वर्ष 2003 में देश का सबसे बड़ा सिंगल डे मोटर कार रैली। इसके तहत रायपुर से मैनपाट तक करीब 402 किमी की रैली आयोजित की गई।
2. वर्ष 2005 में आल इंडिया एयरटेल वन चैलेंज कार रैली। इसमें छत्तीसगढ़ ने उड़ीसा के बरगढ़ से गोंदिया तक की करीब 300 किमी से कार रैली की मेजबानी की थी, जो नागपुर होते हुए दिल्ली गई।
3. वर्ष 2006 में नेशनल डर्ट ट्रैक बाइक रेसिंग चैंपियनशिप। इसका आयोजन साइंस कालेज मैदान पर हुआ था। इसमें देशभर के बाइक रेसरों ने हिस्सा लिया था।
4. वर्ष 2009 में नेशनल सुपर क्रास बाइक रेसिंग चैंपियनशिप। इसका आयोजन भी साइंस कालेज मैदान पर हुआ था।
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भारत फार्मूला वन का उभरता बाजार
0 छग मोटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव उज्जवल दीपक ने की फार्मूला वन के अंतरराष्ट्रीय मुखिया बर्नी एक्लेस्टोन से मुलाकात
उज्जवल दीपक व बर्नी एक्लेस्टोन
रायपुर। फार्मूला वन मैनेजमेंट के अंतरराष्ट्रीय प्रेसिडेंट व सीईओ बर्नी एक्लेस्टोन का कहना है कि भारत फार्मूला वन का उभरता हुआ बाजार है। वे भारत में इसके तेजी से लोकप्रिय होने के प्रति आशान्वित हैं।
नोएडा में छत्तीसगढ़ मोटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव उज्जवल दीपक ने श्री एक्लेस्टोन से मुलाकात कर चर्चा की। श्री दीपक ने बताया कि चर्चा के दौरान श्री एक्लेस्टोन ने कहा कि भारत में फार्मूला वन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फार्मूला वन के सभी टिकटों की बिक्री हो चुकी है। यहां लोगों में फार्मूला वन के प्रति उत्साह को देखकर वे उत्साहित हैं। फार्मूला वन मैनेजमेंट के लिए भारत एक उभरता हुआ बाजार है और इसे नकारा नहीं जा सकता। फार्मूला वन को बढ़ावा देने के लिए अब अन्य देशों के अलावा भारत पर भी फोकस किया जाएगा। भारत अब फार्मूला वन मैनेजमेंट के प्राथमिकता सूची में शामिल रहेगा।
अगले साल का आबंटन भी
श्री दीपक ने बताया कि फार्मूला वन मैनेजमेंट ने आयोजन की सफलता को देखते हुए अगले साल का आबंटन भी तय कर दिया है। चर्चा के दौरान श्री एक्लेस्टोन ने बताया कि भारत को अगले साल का आबंटन भी दे दिया गया है। वर्ष 2012 में अक्टूबर में ही अगला फार्मूला वन रेस का आयोजन होगा।

Saturday, 17 September 2011

परसदा डेम में होगी नेशनल ट्राइथलॉन चैंपियनशिप

0 भारतीय ट्राइथलॉन फेडरेशन के महासचिव राकेश गुप्ताने लिया तैयारियों का जायजा
0 नई राजधानी क्षेत्र को आयोजन स्थल तय किया गया

लोगो का विमोचन करते ट्राइथलॉन फेडरेशन के महासचिव राकेश गुप्ता (दायें से दूसरे)
 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार 26 एवं 27 नवंबर को होने वाली नेशनल ट्राइथलॉन व एक्वाथलॉन चैंपियनशिप नई राजधानी क्षेत्र में होगी। इसके लिए स्थान का निर्धारण तय कर लिया गया है। भारतीय ट्राइथलॉन फेडरेशन के महासचिव राकेश गुप्ता ने नई राजधानी क्षेत्र का निरीक्षण कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास स्थित परसदा डेम को मुख्य आयोजन के लिए  तय किया। श्री गुप्ता ने छत्तीसगढ़ ट्रायथलॉन संघ के पदाधिकारियों से आयोजन की तैयारियों की जानकारी भी हासिल की।
दिल्ली से आए फेडरेशन के महासचिव श्री गुप्ता ने यहां स्पर्धा की तैयारी पर संतोष जताया। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि इसे भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के 400 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भी मुलाकात की है। मुख्यमंत्री ने आयोजन में हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में स्पोर्ट्स पर बेहतर काम हो रहा है। छह माह पहले राज्य सरकार ने यहां प्रस्तावित नेशनल गेम्स की तैयारियों को लेकर सभी खेलों के इंडिया फेडरेशन को पत्र लिखकर जरूरी रिक्वायरमेंट की जानकारी मांगी थी। ट्राइथलॉन फेडरेशन ने इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार को जरूरी जानकारी उपलब्ध करा दी है। उन्होंने कहा कि यदि परसदा डेम को अच्छी तरह डेवलप कर दिया जाए, तो यहां वाटर स्पोर्ट्स व टूरिज्म को अच्छा बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही ट्राइथलॉन, कयाकिंग एवं केनोइंग, रोइंग, याटिंग जैसे कई तरह के वाटर गेम्स भी आयोजित किए जा सकते हैं, जिसका फायदा यहां के खिलाड़ियों को मिलेगा।
लोगो का विमोचन

इस मौके पर फेडरेशन के महासचिव राकेश गुप्ता, एडिशनल एसपी आईएच खान, सचिव डॉ. विष्णु श्रीवास्तव व विनीत सक्सेना ने 11वीं सब-जूनियर, जूनियर एवं सीनियर नेशनल ट्राइथलॉन व एक्वाथलॉन चैंपियनशिप के लोगो का विमोचन किया। लोगो में तीनों खेल स्वीमिंग, साइकिलिंग व दौड़ को अंकित किया गया है। 
 

छग में डेवलप नहीं वाटर स्पोर्ट्स
छत्तीसगढ़ ट्राइथलॉन संघ के सचिव डॉ. विष्णु श्रीवास्तव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अभी वाटर स्पोर्ट्स डेवलप नहीं है, इस कारण यहां आयोजन के लिए वाटर बाडी ढूंढ़ने में मुश्किल हो रही है। इस कारण अब तक सिर्फ पांच राज्य स्तरीय स्पर्धा हो पाई है। परसदा डेम डेवलप हो जाने पर सभी तरह के वाटर गेम्स हो सकते हैं।
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छत्तीसगढ़ में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने का प्रयास 
0 राज्यपाल से वायएआई के इवेन्ट मैनेजर ने मुलाकात की
0 रायपुर व धमतरी में वाटर स्पोर्ट्स की संभावनाएं तलाशेंगे

वायएआई के इवेन्ट मैनेजर से चर्चा करते हुए राज्यपाल शेखर दत्त.
रायपुर। राज्य में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा दिए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में शनिवार को राजभवन में राज्यपाल शेखर दत्त से याटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के निर्वाचित कौंसिल मेंबर तथा इवेन्ट कमेटी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केएस राव ने मुलाकात की। श्री राव छत्तीसगढ़ में वाटर स्पोर्ट्स की संभावनाएं तलाशेंगे।
इस अवसर पर रायपुर के बूढ़ातालाब तथा धमतरी के गंगरेल बांध में वाटर स्पोर्ट्स की सम्भावनाओं पर विचार किया गया। याटिंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए प्राकृतिक हवा के प्रवाह की जरूरत होती है। सामान्य रूप से ऐसी हवाएं राज्य में मानसून या उसके पहले बहती है। लेफ्टिनेंट जनरल केएस राव इस संबंध में बूढ़ातालाब तथा गंगरेल बांध का व्यक्तिगत रूप से अवलोकन कर यहां वाटर स्पोर्ट्स की संभावनाओं को भी तलाशेंगे। उल्लेखनीय है कि याटिंग, सेलिंग, रोइंग, कयानिंग एवं केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के प्रति युवाओं में उत्साह रहता है। छत्तीसगढ़ में 37वें राष्ट्रीय गेम्स प्रस्तावित है। इस संदर्भ में भी वाटर स्पोर्ट्स और इसके लिए अधोसंरचनाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
   इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल श्री राव के साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रामनिवास, खेल संचालक जीपी सिंह, प्रभारी कमांडर छत्तीसगढ़ उड़ीसा सब-एरिया कर्नल बिश्नोई, कमाडिंग ऑफिसर वन एनसीसी नेवल विंग कर्नल वाययू सूरी मौजूद थे।






Tuesday, 13 September 2011

वेटलिफ्टर जगदीश भी खेलेंगे कामनवेल्थ

0 यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चयन
0 रुस्तम सारंग का चयन पहले से ही सीनियर टीम में हो चुका है

रायपुर।
छत्तीसगढ़ का वेटलिफ्टर जगदीश विश्वकर्मा का चयन भारतीय यूथ वेटलिफ्टिंग टीम में हुआ है। वे भारतीय टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में 8 से 16 अक्टूबर तक होने वाली कामनवेल्थ यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे।
जगदीश इस साल भारतीय टीम में चयनित होने वाले छत्तीसगढ़ के दूसरे खिलाड़ी हैं। इसके पूर्व प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रुस्तम सारंग का चयन सीनियर भारतीय टीम में हुआ है। वे भी केपटाउन में ही होने वाली कामवेल्थ सीनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे।
छत्तीसगढ़ वेटलिफ्टिंग संघ के सचिव सुकलाल जंघेल ने बताया कि भारतीय फेडरेशन से जगदीश का चयन संबंधी पत्र प्राप्त हुआ है। वर्तमान में जगदीश बेंगलुरू में वेटलिफ्टिंग के इंडिया कैंप में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। उनके चयन पर संघ के अध्यक्ष विजय बघेल, कोषाध्यक्ष नंदू जंघेल, डीडी चंदेल, अजय पराशर, बीएमएस ठाकुर, घनश्याम जंघेल, नरेंद्र साहू, सुंदर सारंग, उत्तम शिंदे, तेजा साहू, छगन यादव व संघ के अन्य सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई। 

 

Tuesday, 6 September 2011

शाहबाज बने छत्तीसगढ़ के पहले इंटरनेशनल बाइक रेसर

0 चेन्नाई में हुई इंटरनेशनल बाइक रेस चैंपियनशिप में पांचवें व छठे स्थान पर रहे
शाहबाज
 रायपुर। राजधानी के शेख शाहबाज छत्तीसगढ़ के पहले इंटरनेशनल बाइक रेसर बन गए हैं। वे 4 सितंबर को चेन्नाई में हुई एमआरएफ नायलो ग्रीप जैप्पर इंटरनेशनल बाइक रेस चैंपियनशिप में पांचवे व छठे स्थान पर रहे।
छत्तीसगढ़ मोटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव उज्जवल दीपक ने बताया कि शाहबाज ने इस इंटरनेशनल चैंपियनशिप के दो इवेंट में हिस्सा लिया था। 250 सीसी वर्ग की बाइक रेस में वे 11 प्रतिभागियों में छठे स्थान पर रहे।
 इसी तरह वे 600 सीसी की रेस में 10 बाइक रेसरों में पांचवें स्थान पर रहे। यह उपलब्धि हासिल करने वाले शाहबाज प्रदेश के पहले बाइक रेसर बन गए हैं। अभी तक इस चैंपियनशिप के लिए प्रदेश का कोई भी बाइक रेसर क्वालीफाई नहीं कर पाया था। दीपक ने कहा कि शाहबाज की उपलब्धि से छत्तीसगढ़ में मोटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। यहां दो बार सुपर मोटोक्रास बाइक रेस चैंपियनशिप आयोजित की चुकी है। उसी का नतीजा है कि शाहबाज को यहां तक पहुंचने में सफलता मिली।
 बाइक रेसिंग के पूर्व शाहबाज.

Friday, 2 September 2011

ओटामेंडी ने अर्जेन्टीना को जीत दिलाई

अंतरराष्ट्रीय मैत्री फुटबॉल मैच : वेनेजुएला को 1-0 से हराया
 ०दर्शकों में सर चढ़कर बोला मैसी का जादू 
  गोल दागने के बाद जश्न मानते अर्जेंटीना के खिलाड़ी.
कोलकाता। निकोलस ओटामेंडी द्वारा हैडर के जरिए किए गए गोल की मदद से अर्जेन्टीना ने सॉल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए अंतरराष्ट्रीय मैत्री फुटबॉल मैच में वेनेजुएला को 1-0 से पराजित किया। मैच का एकमात्र गोल ओटामेंडी ने 67वें मिनट में दागा। मैच में सभी की निगाहें सुपर स्टार लियोनेल मैसी पर थी, लेकिन वे कोई गोल नहीं दाग पाए।
 मैच के दौरान शानदार मूव बनाते मैसी
 इस बहुप्रतीक्षित मैच में अधिकांश समय अर्जेन्टीना का दबदबा बना रहा और यदि उसके खिलाड़ियों ने मिले मौकों को भुनाया होता तो उसकी जीत का अंतर ज्यादा होता। खेल के शुरुआती मिनटों में अर्जेन्टीना का दबदबा रहा और गेंद ज्यादा समय तक उनके खिलाड़ियों के नियंत्रण में थी। गेंद जैसे ही  मैसी के पास जाती, दर्शक सीटी बजाने लग जाते थे और पूरा स्टेडियम शोर में डूब जाता था। नौवें मिनट में अर्जेन्टीना के डी मारिया के पास अच्छा मौका मिला था, लेकिन वेनेजुएला के रक्षकों ने उम्दा तरीके से गेंद क्लियर की। वेनेजुएला के पास 16वें मिनट में बढ़त बनाने का अवसर था, लेकिन बॉक्स के अंदर गोलपोस्ट के ठीक सामने गेंद को टच करने के लिए उनका कोई खिलाड़ी मौजूद ही नहीं था। मैसी ने दो मिनट बाद ही बॉक्स के अंदर मारिया को सटीक पास दिया, लेकिन उनका शॉट बाहर निकल गया। मैसी 30वें मिनट में अपनी टीम को बढ़त दिलाने की स्थिति में थे, लेकिन उनके कमजोर शॉट पर विपक्षी गोलकीपर रफेल रोमो ने बचाव कर लिया। 33वें मिनट में मैसी का शॉट विपक्षी बॉक्स में अपने ही खिलाड़ी से टकराकर गोल पोस्ट के बाहर से निकल गया। वेनेजुएला के फेल्टशर के पास 35वें मिनट में गोल करने का सुनहरा मौका था, लेकिन उनका शॉट गोल पोस्ट के थोड़े बाहर से निकल गया। पहले हाफ के अंतिम कुछ मिनटों में वेनेजुएला के खिलाड़ियों ने कई आक्रमण किए और उनकी टीम बेहतर नजर आ रही थी।
गोलरहीत मध्यांतर के बाद 67वें मिनट में कॉर्नर पर मैसी ने गेंद पोस्ट के समक्ष भेजी जिस पर ओटामेंडी ने हैडर के जरिए गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। 82वें मिनट में मैसी के पास टीम की बढ़त को 2-0 करने का मौका था लेकिन उनके कमजोर शॉट पर गोलकीपर रोमो ने गेंद क्लियर की। 89वें मिनट में अर्जेन्टीना के सोसा ने जोरदार शॉट लगाया, लेकिन विपक्षी गोलकीपर रोमो ने फिर अच्छा बचाव किया। अर्जेन्टीना ने यह मैत्री मुकाबला 1-0 से जीतकर वेनेजुएला के खिलाफ अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। 

Tuesday, 30 August 2011

अलंकृत होकर खिले चेहरे


0 खेल दिवस पर राज्य खेल पुरस्कार से अलंकृत हुए 21 खिलाड़ी
0 मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को शहीद राजीव पांडे, शहीद कौशल यादव, वीर हनुमान सिंह, शहीद विनोद चौबे व शहीद पंकज विक्रम अवार्ड से नवाजे

रायपुर।
राज्य खेल अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित हुए तो खिलाड़ियों के चेहरे खिल गए।  वर्ल्ड कप खेलने के 33 साल बाद सरकारी मंच से पुरस्कृत होने वाले हॉकी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विंसेंट लकड़ा के चेहरे का भाव उनकी खुशी बयां कर रहे थे। तकरीबन यही भाव सभी खिलाड़ियों के चेहरे पर था। पं. रविवि प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यअतिथि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सोमवार को पांच खिलाड़ियों को शहीद राजीव पांडे, छह को शहीद कौशल यादव, दो को वीर हनुमान सिंह, एक को शहीद विनोद चौबे एवं सात खिलाड़ियों को शहीद पंकज विक्रम अवार्ड से नवाजे। इस तरह कुल 21 खिलाड़ियों को कुल 21.25 लाख रुपए के पुरस्कार बांटे गए। इसके अलावा राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले 374 खिलाड़ियों को भी 46.06 लाख रुपए के नकद पुरस्कार दिए गए।
समारोह की शुरुआत में अतिथियों ने शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जलित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद शहीदों के माता-पिता व उनकी धर्मपत्नी का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले हॉकी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विंसेंट लकड़ा को शहीद विनोद चौबे सम्मान से अलंकृत किया। जैसे ही श्री लकड़ा के नाम की घोषणा हुई, पूरा हाल तालियों की गड़गड़हाट से गूंज उठा। 33 साल बार पहली बार मिले सम्मान से श्री लकड़ा भावविभोर हो गए। इसके बाद बाक्सिंग के निर्णायक आर. राजेंद्रन व पावरलिफ्टिंग के कोच हरिनाथ को वीर हनुमान सिंह अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके बाद शहीद राजीव पांडे, शहीद कौशल यादव व शहीद पंकज विक्रम अवार्ड के विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, खेल मंत्री लता उसेंडी, छग गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष सुभाष राव, महापौर डॉ. किरणमयी नायक, युवा आयोग के अध्यक्ष संतोष पांडे, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवकुमार पांडेय व छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया मौजूद थे।
खेल में नई बुलंदियों को छुएगा छग : रमन
समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों को सिर्फ मेडल ही नहीं नकद राशि के रूप में पुरस्कृत कर उन्हें आर्थक सहायता दे रही है। साथ ही प्रदेश संघ खिलाड़ियों को जिस तरह से तैयार कर रहे हैं, इससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ खेल जगत में नई बुलंदियों को छुएगा। यहां के खिलाड़ी छत्तीसगढ़ का नाम देश व दुनिया में रोशन करेंगे।
खेल वातावरण तैयार होगा : कौशिक
समारोह में विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी आगे बढ़ रहे हैं। सरकार जिस तरह से उन्हें प्रोत्साहित कर रही है, उससे यहां बेहतर खेल वातावरण बनेगा और भविष्य में यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और पहचान बनाएंगे।
समर्पण की भावना पैदा होगी : बृजमोहन
लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यहां सभी अवार्ड के नाम हमारे शहीदों के नाम पर दिए जा रहे हैं। इससे खिलाड़ियों में देश के प्रति समर्पण की भावना पैदा होगी। छत्तीसगढ़ सरकार खिलाड़ियों को करीब 70 लाख रुपए पुरस्कार बांट रही है,जो  देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे ज्यादा पुरस्कार है। 
खेलोगे कूदोगे, बनोगे नवाब : उसेंडी
समारोह में खेल मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने इतना अधिक पुरस्कार दिया जा रहा है कि अब पुराने मुहावरा को बदलकर रख दिया है। अब यहां 'खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब" की जगह अब 'खेलोगे कूदोगे तो बनोगे नवाब" हो गया है। अब नौ नए राज्य बनने से खिलाड़ियों को और ज्यादा फायदा होगा।
सम्मानित होने वाले खिलाड़ी
शहीद राजीव पांडे अवार्ड
खिलाड़ी                              खेल                                     स्थान
अंजनी पटेल                         पैराओलिंपिक                     बिलासपुर
रोशिता केरकेट्टा                  पावरलिफ्टिंग                     दुर्ग
अनिता शिंदे                         वेटलिफ्टिंग                       दल्ली राजहरा
सीमा सिंह                           बास्केटबाल                        भिलाई
एम. अनिता राव                  हैंडबाल                              भिलाई
शहीद कौशल यादव अवार्ड
खिलाड़ी                             खेल                                    स्थान
एल. दीपा                            बास्केबाल                          भिलाई
संगीता मंडल                      बास्केटबाल                         भिलाई
केशव साहू                         वेटलिफ्टिंग                         रायपुर
जय कुंजाम                       कराते                                  भिलाई
संध्या उर्वशा                     पावरलिफ्टिंग                      दल्ली राजहरा
सृष्टि नाग                          तैराकी                                बिलासपुर
वीर हनुमान सिंह अवार्ड
कोच/निर्णायक                  खेल                                 स्थान
हरिनाथ                              पावरलिफ्टिंग                  दल्ली राजहरा
आर. राजेंद्रन                       बाक्सिंग                         भिलाई
शहीद विनोद चौबे सम्मान
खिलाड़ी                             खेल                               स्थान
विंसेंट लकड़ा                       हॉकी                              धरमजयगढ़
शहीद पंकज विक्रम अवार्ड
खिलाड़ी                            खेल                                  स्थान
सुरेश सिंह                          वालीबाल                           रायपुर
ज्योति पटेल                      फुटबाल                              दुर्ग
पी. किशोर                         जूडो                                 भिलाई
श्रद्धा सोनवानी                   तीरंदाजी                           बिलासपुर
मनोज धृतलहरे                 साफ्टबाल                         रायपुर
राजेश कुमार                     बेसबाल                          बिलासपुर
फारुख अहमद खान             कैरम                             रायपुर
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हॉकी खेलने अब नहीं आते बच्चे : विंसेंट
0 सम्मानित होने के बाद पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विंसेंट ने कहा

मुक्यमंत्री डॉ. रमण सिंह के हाथों सम्मानित होते विन्सेंट लकड़ा 
रायपुर। 33 साल के लंबे इंतजार के बाद पहली बार प्रदेश सरकार से सम्मानित होने वाले हॉकी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विंसेंट लकड़ा को किसी से कोई गिला-शिकवा नहीं है। पुरस्कार मिलने से बेहद खुश नजर आए श्री लकड़ा ने कहा कि अब हॉकी खेलने के लिए उनके पास बच्चे ही नहीं आते तो कैसे उन्हें सिखाएं।
उन्होंने कहा कि देर से ही सही पर पुरस्कार तो उन्हें मिल ही गया। इससे खुशी की क्या बात होगी। उन्होंने देश व प्रदेश में हॉकी की दयनीय स्थिति पर कहा कि इसके लिए सिर्फ सरकार ही नहीं सभी जिम्मेदार हैं। बच्चे भी अब हॉकी खेलने में इच्छा नहीं दिखाते तो उन्हें कैसे सिखाया जाए।
   अवार्ड के साथ विन्सेंट लकड़ा
शुरू में उन्होंने बच्चों को हॉकी सिखाने की बहुत कोशिश की, लेकिन अब बच्चों ने इसमें रूचि लेना कम कर दिया। सुविधाओं के बारे में कहा कि यह दुर्भाग्य है कि राज्य बनने के दस साल बाद भी हॉकी का एक भी एस्टोटर्फ मैदान नहीं बन पाया है। यहां एस्टोटर्फ बनने व खेल मैदान विकसित करने से ही यहां के खिलाड़ी आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मैदान तक लाने के लिए अच्छी सुविधा व खेल मैदान मिलना जरूरी है। खेती-बाड़ी कर जीवन-यापन करने वाले विंसेंट अब तक सिर्फ आर्मी से मिलने वाले पेंशन पर ही निर्भर हैं। उनके तीनों बेटे भी खेती-किसानी में उनका हाथ बंटाते हैं।
 

Sunday, 28 August 2011

गिनीज वर्ल्ड रिकार्डधारी राजदीप का जोरदार स्वागत

0 बीजिंग से नया गिनीज रिकार्ड बनाकर लौटे
   छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव बलदेव सिंह भाटिया के साथ राजदीप सिंह हरगोत्रा.
 रायपुर। चीन के बीजिंग में हुए एक कार्यक्रम में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर लौटे राजदीप सिंह हरगोत्रा का शनिवार को रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत किया गया। स्टेशन से वे छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के कार्यालय गए, जहां संघ के महासचिव बलदेव सिंह भाटिया ने उनका स्वागत किया।
स्टेशन पर राजदीप के पहुंचते ही वहां बाजे-गाजे बजने लगे। ट्रेन से उतरते ही राजदीप के माता-पिता, कोच व छत्तीसगढ़ जंप रोप के सचिव अखिलेश दुबे और खिलाड़ियों ने पुष्पहार से जोरदार स्वागत किया। इस दौरान राजदीप के पिता बलवीर सिंह हरगोत्रा, मांॅ इंदरजीत कौर, कोच श्री दुबे, क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष विजय शाह, श्याम मोहदीकर, नवनीत झा, नन्हे खिलाड़ी अभिजीत, अनुराग, हिमांशु, रक्षक समेत अन्य खिलाड़ी मौजूद थे। स्टेशन पर स्वागत के बाद राजदीप ने छग ओलिंपिक संघ के कार्यालय पहुंॅचकर संघ के महासचिव श्री भाटिया से मुलाकात की। श्री भाटिया ने वहां पर राजदीप का पुष्पहार से स्वागत किया और उनकी उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। श्री भाटिया ने कहा कि राजदीप की उपलब्धि भारत व छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। राजदीप ने अपनी सफलता को छत्तीसगढ़ को समर्पित किया। इसके लिए उन्होंने प्रदेश ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह व महासचिव श्री भाटिया के प्रति आभार व्यक्त किया।
अगला लक्ष्य वर्ल्ड कप : राजदीप

  रायपुर पहुँचाने के बाद रेलवे स्टेशन पर राजदीप अपने माता-पिता के साथ.
 राजदीप ने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य 2012 में यूएसए में होने वाले वर्ल्ड कप में पदक जीतकर भारत का परचम फहराना। उन्होंने कहा कि चीन में मिली सफलता से वे बेहद खुश हैं। नया रिकार्ड बनाना उनके लिए चुनौती थी, लेकिन वे सफल हो गए। उन्होंने अमेरिका में इंटरनेशनल ट्रेनिंग के लिए फेडरेशन से चर्चा की है। राजदीप ने कहा कि जंप रोप का प्रदर्शन वुडन फ्लोर पर किया जाता है। यहां इसकी कमी है, इसलिए सीमेंट फ्लोर में प्रैक्टिस करनी पड़ती है, इससे प्रदर्शन प्रभावित होता है। राजधानी के इंडोर स्टेडियम में वुडन फ्लोर है। वहांॅ पर नियमित प्रैक्टिस की सुविधा मिल जाए तो बेहतर होगा।

Thursday, 25 August 2011

विंसेंट लकड़ा समेत 21 को छत्तीसगढ़ राज्य खेल पुरस्कार

0 खेल मंत्री ने शहीद राजीव पांडे, शहीद कौशल यादव, वीर हनुमान सिंह व शहीद पंकज विक्रम अवार्ड विजेताओं की घोषणा की
विंसेंट लकड़ा
  रायपुर । हॉकी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विंसेंट लकड़ा समेत 21 खिलाड़ियों को इस साल राज्य खेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। खेल मंत्री लता उसेंडी ने गुरुवार को राज्य खेल पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की। पांच खिलाड़ी शहीद राजीव पांडे, छह शहीद कौशल यादव, एक कोच व एक निर्णायक वीर हनुमान सिंह अवार्ड, एक शहीद विनोद चौबे व सात खिलाड़ी शहीद पंकज विक्रम अवार्ड से सम्मानित होंगे।
खेल मंत्री ने बताया कि चयनित खिलाड़ी राष्ट्रीय खेल दिवस पर 29 अगस्त को शाम 6 बजे पं. रविशंकर शुक्ल प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों सम्मानित होंगे। इसके अलावा समारोह में राष्ट्रीय स्पर्धाओं में प्रदेश के लिए पदक जीतने वाले राज्य के 305 खिलाड़ियों को भी नकद पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद यहां के खिलाड़ी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने नए जिले बनने पर हर्ष व्यक्त करते कहा कि इससे खिलाड़ियों को ज्यादा फायदा होगा। बड़े जिला होने से कई खिलाड़ी उपेक्षित हो जाते थे, लेकिन नए जिले बनने से उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
 खेल मंत्री ने जताई नाराजगी
विजेताओं की घोषणा करती हुईं खेल मंत्री लता उसेंडी 
खेल मंत्री ने घोषणा के पूर्व ही विजेताओं की सूची लीक होने के मामले में नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। आगे से इसका ध्यान रखा जाएगा। सूची लीक होने पर यदि कोई दोषी पाया जाता है तो विभाग के संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की गलती न हो।




नेशनल गेम्स की तैयारी सही दिशा में
खेल मंत्री सुश्री उसेंडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 37वें नेशनल गेम्स की तैयारी सही दिशा में है। इसके लिए अलग से सचिवालय बन गया है। इसके लिए डीपीआर भी तैयार किया जा रहा है। सही समय पर सभी इंफ्रास्ट्रक्चर बनकर तैयार हो जाएगा।
सेटअप व अकादमी शीघ्र
खेल मंत्री ने कहा कि खेल विभाग का सेटअप शीघ्र की पूर्ण कर लिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चल रही है। राज्य में अकादमी स्थापित करने का काम भी चल रहा है। अकादमी के लिए 13 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। इस पर जल्द ही कार्य किया जाएगा।
सम्मानित होने वाले खिलाड़ी 
केशव साहू रायपुर
 शहीद राजीव पांडे अवार्ड : अंजनी पटेल बिलासपुर पैराओलिम्पिक गेम,
हरिनाथ दल्ली राजहरा
रोशिता केरकेट्टा दुर्ग पावरलिफ्टिंग, अनिता शिंदे वेटलिफ्टिंग, सीमा सिंह बास्केटबाल व एम. अनिता राव हैंडबाल शामिल हैं। इन्हें ढाई-ढाई लाख रुपए, प्रशस्ति फलक व ट्राफी दी जाएगी।
शहीद कौशल यादव अवार्ड : एल. दीपा व संगीता मंडल दोनों दुर्ग बास्केटबाल, केशव साहू रायपुर वेटलिफ्टिंग, जया कुंजाम भिलाई कराते, संध्या उर्वशा दल्ली राजहरा पावरलिफ्टिंग व सृष्टि नाग बिलासपुर तैराकी शामिल हैं।
आर. राजेंद्र भिलाई
इन्हें एक-एक लाख रुपए, प्रशस्ति फलक व ट्राफी दी जाएगी।

संध्या उर्वशा दल्ली राजहरा
वीर हनुमान सिंह अवार्ड : कोच हरिनाथ दल्ली राजहरा पावरलिफ्टिंग व निर्णायक आर. राजेंद्र भिलाई बाक्सिंग शामिल हैं। इन्हें पुरस्कार के रूप में एक-एक लाख रुपए, प्रशस्ति फलक व ट्राफी दी जाएगी।
शहीद विनोद चौबे अवार्ड : विंसेंट लकड़ा धरमजयगढ़ (पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी)। इन्हें 25 हजार रुपए, प्रशस्ति फलक व ट्राफी दी जाएगी।
सुरेश सिंह रायपुर

सृष्टि नाग बिलासपुर
शहीद पंकज विक्रम अवार्ड : सुरेश सिंह रायपुर वालीबाल, ज्योति पटेल दुर्ग फुटबाल, पी. किशोर दुर्ग जूडो, श्रद्धा सोनवानी बिलासपुर तीरंदाजी, मनोज धृतलहरे रायपुर साफ्टबाल, राजेश कुमार बिलासपुर बेसबाल व फारुख अहमद खान रायपुर कैरम शामिल हैं। इन्हें पुरस्कार के रूप में 25-25 हजार रुपए, प्रशस्ति फलक व ट्राफी दी जाएगी।

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अवार्ड के लिए 33 साल लंबा इंतजार!
0 वर्ल्ड कप हाकी खेलने वाले विन्सेंट लकड़ा को राज्य बनने के दस साल बाद मिला सम्मान
विन्सेंट लकड़ा
 रायपुर। हाकी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जशपुर के विन्सेंट लकड़ा को किसी अवार्ड के लिए पूरे 33 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि अविभाजित मध्यप्रदेश में वे उपेक्षित तो रहे ही, राज्य बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ में अवार्ड के हकदार होने के बावजूद उन्हें 10 साल इंतजार करना पड़ा। खेल विभाग ने इस साल उन्हें शहीद विनोद चौबे अवार्ड (खेल विभूति) से सम्मानित करने की घोषणा की है। कई बार मांग उठने के बाद आखिरकार सरकार ने उन्हें सम्मानित करने के लिए 10 साल बाद सुध ली।
बेहद सीधे-साधे विन्सेंट ने 1978 में अर्जेंटीना के ब्यूनसआयर्स में हुए वर्ल्डकप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। यह प्रतियोगिता 18 मार्च से एक अप्रैल तक हुई थी। 1 जुलाई 1954 को जन्में विन्सेंट के पास उनकी उपलब्धियों के पदक भी हैं। भारतीय टीम के कई सितारा खिलाड़ियों के साथ वे हॉकी खेल चुके हैं। बड़े राज्य होने से वे हमेशा अविभाजित मध्यप्रदेश में उपेक्षित रहे। उन्होंने कभी किसी से पुरस्कार के लिए गुहार नहीं लगाई और न ही कभी आवेदन दिया। उनकी सोच थी कि यदि उन्होंने इस राज्य के लिए कुछ किया है तो उन्हें पुरस्कार मांगने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें देना चाहिए। उनकी इस तमन्नाा को पूरा होने में पूरे दस साल लग गए।
विन्सेंट छत्तीसगढ़ के ऐसे पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, जिनका पूरा जीवन सादगी से परिपूर्ण रहा है। वे खेती-किसानी कर जीवन-यापन कर रहे हैं। कभी-कभी तो परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्हें हाट-बाजारों में फल्ली बेचने का काम भी करना पड़ता है। खेल विभाग की ओर से उन्हें एक हजार रुपए पेंशन मिलता है। पर सुनने में आया है कि वह पेंशन भी अब बंद हो गया है।
आवेदन भरवाया गया
इस साल खेल अधिकारियों ने विन्सेंट से अवार्ड के लिए आवेदन भरवाया। वे स्वयं होकर कभी भी आवेदन नहीं किया। हालांकि उन्हें कई बार राज्य की खेल पुरस्कारों की चयन समिति के सदस्य भी बनाए गए। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ के ग्राम सिधरा के रहने वाले विन्सेंट को पिछले साल ही अवार्ड देने की मांग काफी जोरों से उठी थी, तब कहीं जाकर खेल विभाग ने इस साल उनके नाम पर विचार किया। विन्सेंट राजधानी में पिछले साल आयोजित की गई कामनवेल्थ गेम्स की बैटन रिले के पहले धावक थे। उन्हें पिछले साल भी अवार्ड नहीं दिया जा सका, क्योंकि उन्होंने कोई आवेदन नहीं किया था। इस साल खेल संचालक जीपी सिंह की पहल पर उनसे आवेदन भरवाया गया। इस साल वे खेल विभूति सम्मान से सम्मानित होने वाले एकमात्र खिलाड़ी होंगे।
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