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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Friday, 11 October 2013

क्रिकेट के 'भगवान' ने टेस्ट क्रिकेट को भी कहा अलविदा

0 14 नवंबर को मुंबई में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलेंगे अपना आखिरी टेस्ट
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2013। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर नवंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में अपना 200वां टेस्ट खेलने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे। क्रिकेट के बेताज बादशाह सचिन ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की एक विज्ञप्ति में अपने संन्यास की घोषणा की। अभी तक अटकलें लग रही थी कि सचिन इस सीरीज के बाद भी खेलते रहेंगे लेकिन टेस्ट तथा वनडे में सर्वाधिक मैचों, रनों एवं शतकों के विश्व रिकार्डधारी ने यह घोषणा कर इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। 14 नवंबर को अपने देश में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलेंगे। मैच का वेन्यू अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह ऐतिहासिक मैच सचिन के गृहनगर मुंबई में खेलेंगे।
सचिन ने अपने संन्यास की चौंकाने वाली घोषणा करते हुए कहा कि मैंने अपने पूरे जीवन में देश के लिए क्रिकेट खेलने का सपना देखा था। पिछले 24 वर्षों में मैं रोजाना इसी सपने के साथ जिया था। मेरे लिए इस बात की कल्पना करना भी बहुत मुश्किल है कि क्रिकेट के बिना मेरा जीवन कैसा होगा।
वर्ष 1989 में अपना करियर शुरू करने के बाद पूरी दुनिया को अपनी बल्लेबाजी से चमत्कृत करने वाले और क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज सर डान ब्रैडमैन को अपना मुरीद बनाने वाले सचिन ने कहा कि मेरे लिए क्रिकेट के बिना खुद को महसूस कर पाना भी बहुत मुश्किल होगा क्योंकि 11 वर्ष की उम्र से मैं यही करता आ रहा हूं।

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले 40 वर्षीय सचिन ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना और पूरी दुनिया में खेलना मेरे लिए एक बड़ा सम्मान था। मुझे घरेलू जमीन पर 200वां टेस्ट खेलने का इंतजार है। जिसके बाद मैं संन्यास ले लूंगा।
सचिन ने गत वर्ष दिसंबर में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा से पहले वनडे से संन्यास ले लिया था। सचिन ने इस वर्ष अपनी टीम मुंबई इंडियन्स को आईपीएल छह जीतने के बाद आईपीएल को और हाल में चैंपियन्स लीग जीतने के बाद ट्वंटी-20 को अलविदा कह दिया था।
क्रिकेट के बेताज बादशाह ने देश की सर्वोच्च क्रिकेट संस्था बीसीसीआई को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं बीसीसीआई को इतने वर्षों में मुझे दिए गए समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं कि उसने मुझे तब संन्यास लेने की अनुमति की जब मेरे दिल ने यह फैसला किया।
सचिन ने साथ ही कहा कि मैं अपने परिवार का उनके धैर्य और समझ के लिए शुक्रिया अदा करता हूं। मैं अपने प्रशंसकों और शुभचिंतकों का भी शुक्रगुजार हूं जिन्होंने अपनी प्रार्थनाओं और दुआओं से मुझे मैदान में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की ताकत दी।
वर्ष 1989 में 15 नवंबर को कराची में पाकिस्तान के खिलाफ 16 वर्ष की मासूम उम्र में अपना अन्तर्राष्ट्रीय करियर शुरू करने वाले सचिन ने हाल ही में चैंपियन्स लीग के दौरान 50 हजार रन पूरे किए थे। उन्होंने अब तक 198 टेस्टों में 53.86 के औसत से 15837 रन बनाए हैं जिनमें विश्व रिकार्ड 51 शतक और 67 अर्धशतक शामिल हैं।
उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 248 रन है। सचिन ने 463 वनडे मैचों में 44.83 के औसत से 18426 रन बनाए हैं जिनमें विश्व रिकार्ड 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल हैं। वह वनडे में दोहरा शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं।
सचिन दोनों तरह की क्रिकेट में शतकों का महाशतक बनाने का अद्भुत कारनामा किया है। सचिन ने अपना पिछला टेस्ट मार्च 2013 में दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। उनका आखिरी वनडे गत वर्ष 18 मार्च को ढाका में पाकिस्तान के खिलाफ था। अपने करियर में सचिन ने मात्र एक ट्वंटी 20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था।
क्रिकेट इतिहास के सबसे संपूर्ण बल्लेबाज माने जाने वाले सचिन को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न (1997-98), अर्जुन पुरस्कार (1994), पद्मश्री (1999) और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण (2008) से सम्मानित किया जा चुका है। सचिन के लिए ही देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के नियमों में संशोधन कर इसमें खिलाड़ियों के वर्ग को भी शामिल किया गया था। हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के साथ सचिन भारत रत्न पाने के सबसे बड़े प्रबल दावेदार है। क्रिकेट के बाइबल विजडन में वर्ष 2002 में सचिन को ब्रैडमैन के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज और विवियन रिचर्ड्स के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ वनडे बल्लेबाज आंका था।
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नवम्बर-दिसम्बर और दस का दिलचस्प संयोग

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2013। क्रिकेट के बादशाह सचिन तेंदुलकर के 24 वर्षों के शानदार करियर में नवम्बर और दिसम्बर महीने तथा दस की संख्या का दिलचस्प संयोग रहा। सचिन के गुरुवार को घोषणा की कि वह नवम्बर में वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज में अपना 200वां टेस्ट खेलने के बाद अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।
टेस्ट और वनडे के विश्व रिकार्डधारी सचिन ने 16 वर्ष की उम्र में अपना टेस्ट करियर 15 नवम्बर 1989 को कराची में पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किया था और वह नवम्बर 2013 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेंगे। यानी उनका टेस्ट पदार्पण और संन्यास का एक ही महीना नवम्बर रहेगा।
सचिन ने अपने वनडे करियर की शुरुआत 18 दिसम्बर को गुजरांवाला में पाकिस्तान के खिलाफ की थी और वनडे से संन्यास भी उन्होंने दिसम्बर में ही लिया। मास्टर ब्लास्टर ने गत वर्ष दिसम्बर में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले वनडे से अपने संन्यास का ऐलान किया था। हालांकि सचिन ने अपना आखिरी वनडे मार्च 2012 में खेला था, लेकिन एकदिवसीय क्रिकेट से उन्होंने संन्यास दिसम्बर में लिया। सचिन के लिए दस की संख्या बेहद शुभ है। वह वनडे में दस की जर्सी पहनकर खेला करते थे और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान उन्होंने जिस तारीख को किया वह 10 अक्टूबर है। यानी अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा तारीख के लिए उन्होंने अपनी पसंदीदा दस की संख्या चुनी।
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10 सबसे यादगार पारियां
 
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर, 2013।
भारत में धर्म बन चुके क्रिकेट के भगवान, साथी खिलाड़ियों के पाजी और विपक्षी टीम के लिए मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपनी 24 साल पुरानी क्रिकेट पारी को अलविदा कहने का दिन तय कर दिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले अपने 200वें टेस्ट के बाद वह क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।
लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार को टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने बीसीसीआई को एक पत्र लिखकर बताया कि 14 नवंबर को वेस्टइंडीज के साथ अपना 200वां टेस्ट खेलने के बाद वह अपनी 24 साल की ‘टेस्ट पारी’ घोषित कर देंगे।
बीसीसीआई सचिव संजय पटेल ने सचिन की ओर से एक बयान जारी किया, जिसमें इस बात का जिक्र है। बीसीसीआई को लिखे एक पत्र में सचिन ने बीसीसीआई को करियर के दौरान समर्थन और अपनी पसंद से सन्यास के लिए समर्थन देने का भी धन्यावाद दिया है। हालांकि लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझने के कारण सचिन तेंदुलकर पर टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का दबाव था। खासकर युवा खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करके उनपर दबाव बना रहे थे।
तेंदुलकर ने संभावना जताई है कि वह अपना अंतिम टेस्ट घरेलू मैदान मुंबई पर खेलेंगे। हालांकि कोलकाता का ईडन गार्डंस भी इस ऐतिहासिक मैच की मेजबानी का प्रबल दावेदार है। बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दो टेस्ट स्थलों की घोषणा नहीं की है। बहरहाल, सचिन के इस फैसले के बाद जहां उनके प्रशंसकों ने अफसोस जताया है, वहीं पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों ने सही समय पर लिया गया निर्णय करार दिया है।
क्रिकेट का भगवान...मास्टर ब्लास्टर...छोटा बाबू...नाम अनेक पर शख्स एक। जी, हम बात कर रहे हैं सचिन तेंदुलकर की। आइये आपको बताते हैं चालीस साल के सचिन की दस पारियां, जो क्रिकेट के इतिहास में हमेशा बेमिसाल रहेंगी।
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर एक ऐसा मशहूर नाम है, जो आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। 24 अप्रैल, 1973 को मुंबई में जन्मा टीम इंडिया का यह सितारा इस उम्र में भी दनादन रन बरसाने के लिए बेचैन रहता है। क्रिकेट में ऐसा कोई भी बड़ा रिकॉर्ड नहीं है, जिसमें इस महान बल्लेबाज का नाम शामिल न हो। भारत को कई मैचों में जीत दिलाने वाले इस सितारे ने पिछले साल दिसंबर में अचानक ही वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में इनका जलवा अभी भी बरकरार है।

1. सिडनी टेस्ट

ऑस्ट्रेलिया के महान फिरकी गेंदबाज शेन वार्न के सपने में आकर डराने वाले तेंदुलकर ने उनके पहले ही टेस्ट मैच में भी यादगार पारी खेली। 1991-92 में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच (सिडन) में उन्होंने 148 रनों की नाबाद पारी खेली। इस टेस्ट में 206 रन बनाने वाले रवि शास्त्री के साथ उन्होंने 196 रनों की साझेदारी भी की, जिसके दम पर भारत लगातार दो मैच में मिल रही हार का सिलसिला तोड़ पाया।

2. फरवरी 1990

तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्गगाह कहे जाने वाले न्यूजीलैंड में फरवरी, 1990 में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में खेली गई। सीरीज का दूसरा मैच नेपियर में खेला गया और यह मैच बारिश से खासा प्रभावित रहा, जिससे मैच ड्रा हो गया, लेकिन मास्टर ब्लास्टर ने इस मैदान पर 88 रनों की उम्दा पारी खेली। अब तक छह टेस्ट मैच खेल चुके सचिन की यह अर्धशतकीय पारी उस समय तक उनके करियर की सबसे बेहतरीन पारी थी।

3. 1992-93

इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर आई और उसे सभी तीनों मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा। सीरीज का दूसरा मैच चेन्नई के चेपक मैदान पर खेला गया और इस मैच में सचिन ने पहली पारी में 296 गेंदों में 165 रनों की लाजवाब पारी खेली, जिसके दम पर भारत ने 560 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके बाद भारतीय फिरकी गेंदबाजों ने इंग्लिश बल्लेबाजों को इस कदर नचाया कि दोनों पारियों में वह भारत के बराबर स्कोर नहीं बना सके और मेहमान टीम को पारी और 22 रनों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

4. 22 अप्रैल, 1998
शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए गए 143 रनों को कैसे भुलाया जा सकता है। भारत के सामने उस मुकाबले को जीतने के लिए 285 रनों का लक्ष्य था, जबकि फाइनल में पहुंचने के लिए 254 रन बनाने जरूरी थी। उसी बीच धूल भरी आंधी के कारण खेल को करीब 25 मिनट रोकना पड़ा। उसके बाद लक्ष्य फिर से निर्धारित किया गया। इस बार 46 ओवरों में जीत के लिए 276 रनों का लक्ष्य दिया गया, जबकि फाइनल में पहुंचने के लिए 237 रन निर्धारित किए गए। भारत वह मैच तो नहीं जीत सका, लेकिन सचिन तेंदुलकर द्वारा 131 गेंदों में बनाए गए 143 रनों की बदौलत टीम इंडिया ने 46 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 250 रन बनाए और न्यूजीलैंड को पछाड़कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

5. 24 अप्रैल, 1998
कोका कोला कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए 134 रनों का कोई जवाब नहीं। उस यादगार पारी की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 6 विकेट से हराया था। सचिन ने अपनी पारी में 12 चौके और 3 छक्के लगाए थे। ऑस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों की नजर में भी यह पारी सचिन की सबसे यादगार पारियों में से एक है।

6. 1 मार्च, 2003
विश्व कप क्रिकेट के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ सचिन तेंदुलकर द्वारा 75 गेंदों में बनाए गए 98 रनों की याद आज भी ताजा है। उस मुकाबले में सचिन शतक से महज 2 रन दूर रह गए, लेकिन शोएब अख्तर की गेंद पर बैकवर्ड प्वाइंट क्षेत्र में लगाया गया शानदार छक्का आज भी क्रिकेट इतिहास के लंबे छक्कों में से एक है। भारत ने 26 गेंद शेष रहते वह मुकाबला 6 विकेट से अपने नाम किया था।

7. जनवरी, 2004
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मुकाबले में सिडनी में सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए गए नाबाद 241 रन उनकी बेहतरीन यादगार पारियों में से एक है। सचिन तेंदुलकर ने 613 मिनट तक 436 गेंदों का सामना कर 33 चौकों की मदद से नाबाद 241 रन बनाए थे।

8. 5 नवंबर, 2009

अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 141 गेंदों में बनाए गए 175 रन यादगार पारियों में से एक है। हालांकि उस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 351 रनों के लक्ष्य को टीम इंडिया हासिल नहीं कर सकी और महज 3 रन से मैच हार गई, लेकिन सचिन तेंदुलकर की जबरदस्त पारी ने उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब दिलवाया। सचिन ने उस मैच में 19 चौके और 4 छक्के लगाए थे।

9. 24 फरवरी, 2010
ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने वो कारनामा किया, जिसका इंतजार विश्व क्रिकेट को जमाने से था। सचिन ने नाबाद 200 रनों की पारी खेली और वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर बने। सचिन ने सिर्फ 147 गेंदों में 25 चौके और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 200 रन बनाए।

10. 30 मार्च, 2011
विश्व कप क्रिकेट के सेमीफाइनल मुकाबले में सचिन तेंदुलकर द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ बनाए गए शानदार 85 रनों को कैसे भुलाया जा सकता है। मोहाली में खेले गए उस हाई वोल्टेज मुकाबले में सचिन ने 115 गेंदों में 11 चौकों की मदद से 85 रन बनाए थे, जिसकी बदौलत टीम इंडिया निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 260 रन बना सकी। भारत ने वह मुकाबला 29 रन से जीता और सचिन तेंदुलकर को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
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तेंदुलकर आनलाइन पोल में ब्रैडमैन से आगे
 





लंदन, 10 अक्टूबर 2013। सचिन तेंदुलकर को एक अंग्रेजी अखबार के आनलाइन पोल में सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में डान ब्रैडमैन और ब्रायन लारा से ऊपर शीर्ष स्थान मिला है। इस भारतीय महान बल्लेबाज ने आज टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
द टेलीग्राफ ने अपने पाठकों से 10 बल्लेबाजों से सर्वश्रेष्ठ को चुनने को कहा, जिसमें तेंदुलकर, ब्रैडमैन, लारा, विवियन रिचर्ड्स, रिकी पोंटिंग, गैरी सोबर्स, जाक कैलिस, लेन हटन, राहुल द्रविड़ और एलेन बोर्डर शामिल थे। भारतीय समयानुसार शाम साढ़े आठ बजे तक 2108 मत पड़े थे जिसमें तेंदुलकर को 1,146 वोट (54.36 प्रतिशत) मिले। वह ब्रैडमैन से आगे रहे जिन्हें 558 (26.47 प्रतिशत) मत मिले। लारा और रिचर्ड्स क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर रहे।
इस अखबार ने हालांकि कहा कि तेंदुलकर ने टेस्ट क्रिकेट में किसी भी अन्य खिलाड़ी से ज्यादा रन और शतक जुटाए हों लेकिन वह आईसीसी की करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग में शीर्ष 10 में जगह नहीं बना सके जिसकी पेचीदा गणना खिलाड़ियों को उनकी उनकी फार्म में हासिल उपलब्धियों से रैंकिंग देती है।
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सचिन को भारत रत्न मिलना चाहिये : अनुराग ठाकुर
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2013।
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर चुके सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से नवाजने की मांग करते हुए बीसीसीआई के संयुक्त सचिव अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि वह इसकी सिफारिश खेल मंत्रालय से करने के लिए बीसीसीआई अध्यक्ष को पत्र लिखेंगे।
तेंदुलकर ने गुरुवार को घोषणा की कि वेस्टइंडीज के खिलाफ अगले महीने उनका 200वां टेस्ट करियर का आखिरी टेस्ट भी होगा।
हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद ठाकुर ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और देश के करोड़ों युवा सचिन तेंदुलकर से प्रेरणा लेते हैं। वह सिर्फ मैदान पर टूर्नामेंट जिताने के लिए नहीं जाने जाते बल्कि मैदान के बाहर भी अपने आचरण से युवाओं के रोलमॉडल हैं। अब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा कर दी है तो सरकार को खुद पहल करते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सचिन सही मायने में भारत रत्न के हकदार हैं और उन्हें यह सम्मान देने में देर नहीं की जानी चाहिए। बीसीसीआई को भी उनके नाम की सिफारिश खेल मंत्रालय से करनी चाहिए और मैं खुद बोर्ड अध्यक्ष एन.श्रीनिवासन को आज इस बारे में पत्र लिखूंगा। बोर्ड की अगली बैठक में भी यह मसला उठाउंगा।
तेंदुलकर के विदाई टेस्ट की तैयारियों के बारे में पूछने पर ठाकुर ने कहा कि इस बारे में फैसला मंगलवार को टूर और फिक्चर्स समिति की बैठक के बाद लिया जाएगा। ठाकुर ने कहा कि निश्चित तौर पर तेंदुलकर की विदाई यादगार होगी। उनके विदाई टेस्ट के बारे में फैसला मंगलवार की बैठक में लिया जाएगा।
गृह मंत्रालय के भारत रत्न की श्रेणी में खेल को शामिल करने के खिलाफ होने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि सरकार में निर्णय लेने की क्षमता होती तो तेंदुलकर को बहुत पहले ही भारत रत्न मिल गया होता। सरकार की रूचि खेलों से ज्यादा खेल संघों की आपसी खींचतान में रही है जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। 
तेंदुलकर को भारत रत्न देने की बढ़ती मांग के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तत्कालीन खेलमंत्री अजय माकन के अनुरोध पर 2011 में भारत रत्न के लिए पात्रता में खेलों को शामिल किया था। बाद में खेल मंत्रालय ने महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने की सिफारिश की थी। गृह मंत्रालय ने हालांकि खेलों को भारत रत्न के दायरे से बाहर रखने का सुझाव यह कहकर दिया था कि इससे दावेदारों की कतार खड़ी हो जाएगी।
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स्वर्णिम युग का अंत हो गया: पवार
नई दिल्ली।
बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि सचिन तेंदुलकर के टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने से स्वर्णिम युग का अंत हो गया। पूर्व आईसीसी अध्यक्ष पवार ने कहा कि सचिन तेंदुलकर के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसले से भारतीय क्रिकेट के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के क्रिकेट के स्वर्णिम युग का अंत हो गया। उन्होंने क्रिकेट पर बादशाह की तरह राज किया है और उनकी लंबी पारियों ने खुद उनके और खेल के लिये कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
   
उन्होंने बयान में कहा कि उनकी उपलब्धियां सभी क्रिकेटरों के लिए प्रेरणादायी हैं और वह भविष्य में भी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे। बतौर खिलाड़ी उन्होंने मैदान के अंदर और बाहर जो जज्बा दिखाया है, वह अद्भुत है। पवार ने कहा कि उनकी खेल के प्रति एकाग्रता, प्यार और उत्साह ही उनकी उपलब्धियों की प्रेरक शक्ति है। क्रिकेट खेलने वाले सभी देश उनकी प्रशंसा करते हैं और दुनिया में उनके लाखों प्रशसंक हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी तुलना खेल के कई महान खिलाड़ियों से की गई है और उन्हें उचित रूप से आधुनिक युग के डान ब्रैडमैन कहा जाता है। मुझे भरोसा है कि वह इस खेल से जुड़े रहेंगे। हमारी शुभकामनायें हमेशा उनके साथ रहेंगी।
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भारतीय क्रिकेट के सम्मान और कीर्तिमान पुरुष हैं सचिन
नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर सही मायने में भारतीय क्रिकेट के सम्मान और कीर्तिमान पुरुष हैं। सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल के करियर में अनेक मान-सम्मान और अलंकरण हासिल किए। वह खेलों के माध्यम से राज्य सभा में आए और देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान तथा दूसरा सबसे बड़ा नागरिक अलंकरण हासिल किया। सचिन को 2008 में उनकी उपलब्धियों के लिए देश के दूसरे सबसे बड़ा नागरिक अलंकरण-पद्म विभूषण से नवाजा गया।

उपलब्धियां एक नजर
0 केंद्र सरकार ने 1997-98 में ही सचिन को देश के सबसे बड़े खेल सम्मान-राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा था।
0 वर्ष 2001 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े नागरिक अलंकरण-महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से नवाजा।
0 वर्ष 1999 में सचिन पद्मश्री से नवाजे गए थे। उससे पहले 1994 में सचिन को अर्जुन पुरस्कार दिया गया था।
0 वर्ष 2010 में सचिन को विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वल्र्ड पुरस्कार मिला था।
0 2010 में ही आईसीसी ने सचिन को वर्ष के श्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी का सर गैरी सोबर्स ट्रॉफी प्रदान किया था।
0 2010 में ही सचिन को एली पीपुल्स च्वाइस अवार्ड मिला था।
0 सचिन ने 2009, 2010 और 2011 में आईसीसी वल्र्ड टेस्ट इलेवन में जगह बनाई।
0 वह 2004, 2007 और 2010 में आईसीसी वल्र्ड ओडीआई इलेवन का हिस्सा रहे।
0 1997 में सचिन को विजडन क्रिकेटर ऑफ द इअर चुना गया।
0 2003 में सचिन विश्व कप के सबसे अच्छे खिलाड़ी रहे।
0 2005 में सचिन को राजीव गांधी पुरस्कार से नवाजा गया।
0 2011 में सचिन को कैस्ट्राल इंडियन क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवार्ड से नवाजा गया।
0 2011 में ही सचिन को बीसीसीआई क्रिकेटर ऑफ द ईयर से नवाजा गया।
0 2010 में सचिन को भारतीय वायु सेना ने मानद ग्रुप कैप्टन नियुक्त किया।
0 2012 में सचिन को विजडन इंडिया आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवार्ड दिया गया।
0 2012 में ही सचिन को आस्ट्रेलिया सरकार ने ऑनरेरी मेम्बर ऑफ द आर्डर ऑफ आस्ट्रेलिया से नवाजा।

24 में अनेक कीर्तिमान
सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है। अगले महीने वेस्टइंडीज के साथ होने वाली दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला के बाद सचिन अपने 24 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम देंगे। इन 24 साल में सचिन ने अनेक कीर्तिमान अपने नाम किए हैं। उन्होंने इतने सारे रिकार्ड अपने नाम किए कि एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें कीर्तिमान पुरुष या फिर रिकार्ड पुरुष कहा जाने लगा।

सचिन के नाम दर्ज प्रमुख रिकार्ड
0 सर्वाधिक 198 टेस्ट (यह आंकड़ा 200 तक पहुंचेगा), सचिन ने अपना पहला टेस्ट 15 नवम्बर, 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची में खेला और अंतिम टेस्ट सम्भवत: मुम्बई में 15 नवम्बर, 2013 को वेस्टइंडीज के साथ खेलेंगे।
0 सर्वाधिक 463 एकदिवसीय मैच, सचिन ने अपना पहला एकदिवसीय मैच 18 दिसम्बर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ गुजरावाला में खेला। अंतिम एकदिवसीय मैच 18 मार्च, 2012 को पाकिस्तान के खिलाफ ढाका में खेला।
0 टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 15,837 रन (यह अंतिम आंकड़ा नहीं है), टेस्ट मैचों में सचिन के नाम 67 अर्धशतक और 115 कैच भी दर्ज हैं।
0 एकदिवसीट मैचों में सर्वाधिक 18,426 रन, एकदिवससीय मैचों में सचिन के नाम 96 अर्धशतक और 140 कैच हैं।
0 टेस्ट मैचों में सर्वाधिक 51 शतक, सचिन का सर्वाधिक व्यक्तिगत योग नाबाद 248 रन है।
0 एकदिवसीय मैचों में सर्वाधिक 49 शतक, एकिदवसीय मैचों में सचिन का सर्वाधिक व्यक्तिगत योग नाबाद 200 रन है।
0 एकदिवसीय मैच में सबसे पहले 200 रनों का व्यक्तिगत आंकड़ा पार करने वाले बल्लेबाज
0 प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में 50,000 रनों का आंकड़ा पार करने वाले पहले भारतीय
0 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप में सर्वाधिक छह शतक लगाने वाले बल्लेबाज
0 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप में 2000 रनों का आंकड़ा पार करने वाले पहले बल्लेबाज
0 एक कैलेंडर वर्ष (1998) में सर्वाधिक 1894 एकदिवसीय रनों का रिकार्ड।
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सचिन सर्वकालिक महान खिलाडिय़ों में से एक : श्रीनिवासन
नई दिल्ली।
बीसीसीआई प्रेसिडेंट एन. श्रीनिवासन ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का फैसला करने वाले सचिन तेंडुलकर की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि वह दुनिया के सर्वकालिक महान खिलाडिय़ों में शुमार हैं।
तेंडुलकर ने गुरुवार को घोषणा की कि वह वेस्ट इंडीज के खिलाफ अगले महीने अपने करियर का 200वां मैच खेलने के बाद टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह देंगे। श्रीनिवासन ने कहा कि मैं तब से सचिन तेंडुलकर का बड़ा मुरीद और प्रशंसक रहा हूं जब वह बुची बाबू टूर्नामेंट में खेलने के लिए चेन्नई आया करते थे। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह भारत के सबसे महान क्रिकेटर हैं। लोगों को तो बल्कि कहना चाहिए कि वह दुनिया के सर्वकालिक टॉप महान खिलाडिय़ों में शुमार हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोबारा बीसीसीआई प्रसिडेंट पद संभालने वाले श्रीनिवासन ने कहा कि तेंडुलकर भारत और भारतीय क्रिकेट के सच्चे ऐंबेसडर हैं। उन्होंने कहा कि किसी ने भी भारतीय क्रिकेट की उतनी सेवा नहीं की, जितनी सचिन ने की। वह सिर्फ क्रिकेटरों नहीं बल्कि खिलाडिय़ों की पीढिय़ों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। हम उनके संन्यास के फैसले का सम्मान करते हैं। हालांकि हमारे में से कई लोग सचिन के बिना भारतीय टीम की कल्पना नहीं कर सकते।
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सचिन की जिंदगी का अनजाना, अनदेखा पहलू...
नई दिल्ली।
क्रिकेट के 'भगवानÓ कहे जाने वाले सचिन तेंडुलकर ने आखिरकार क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से संन्यास ले लिया है। क्रिकेट के इस सबसे बड़े सितारे के बारे में कई ऐसी बाते हैं, जो आप नहीं जानते। आइए आपको बताते हैं सचिन की जिंदगी का अनजाना, अनदेखा पहलू...
- सचिन का नाम पुराने जमाने के मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा गया है
- सचिन तेंदुलकर का घर का नाम तेंदुलिया है। जब सचिन ने सबसे पहला पाकिस्तान का टूर (1989) किया था तब उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर उनके साथ गए थे।
- सचिन पहले फास्ट बॉलर बनना चाहते थे और उन्होंने एमआरएफ पेस एकेडमी, चेन्नई में जा कर डेनिस लिली से ट्रेनिंग भी ली।
- सचिन को पहली शेविंग क्रीम (पाल्मोलिव) उनके फास्ट फ्रेंड और पूर्व क्रिकेटर सलिल अंकोला ने दी।
- पहला इंग्लिश विलो का क्रिकेट बैट दिलीप वेंगसरकर ने दिया।
- अपनी पहली कमाई से अपने पिता रमेश तेंदुलकर को आर्मचेयर भेंट की।
- सचिन ने 1989 के टूर पर पहली बार खुद ऑमलेट बनाया था जो उनके भाई ने मिलकर खाया।
- थर्ड अंपायर द्वारा आउट दिए जाने वाले सचिन पहले बैट्समैन हैं
- पत्नी अंजली से 1990 में मिले, एक इंटरव्यू में सचिन ने कहा कि मुझे उनसे इसलिए प्यार हो गया, क्योंकि वह शरमाना जानती हैं।
- 17 साल की उम्र में अपनी पहली कार खरीदी, नीले रंग की मारुति 800 लेकिन इस कार से अपने दोस्तों को बांद्रा स्टेशन छोडऩे जाते वक्त उन्हें डर था कि कहीं उनका चालान न हो जाए
- 1990 के कामयाब दौरे के बाद अपनी सोसायटी साहित्य सहवास के लोगों को बांद्रा इंटरनैशनल होटल खाना खिलाने लेकर गए थे
- किसी बढिय़ा शॉट के लिए सचिन चुम्मा शॉट शब्द का इस्तेमाल करते हैं
- 1990 में इंग्लैंड दौरे पर मनोज प्रभाकर से तैराकी सीखी, सिर्फ आधे घंटे में
- सचिन कभी-कभी मेहमानों के लिए खुद ही चाय बनाते हैं
- सचिन को बैगन का भर्ता बनाना आता है
- उन्हें घडिय़ां बेहद पसंद हैं, उनके पसंदीदा ब्रैंड हैं कातिये और रॉलेक्स
- मुंबई के लिए खेलने के बाद उनका लोकल ट्रेनों में सफर करना छूट गया
- वर्ली के सत्यम सिनेमा में रोजा फिल्म देखने के लिए भेस बदल कर गए थे सचिन
- उनके हेल्मेट और किट बैग पर तिरंगे का स्टिकर लगा है
- टेस्ट मैच का पहला अनुभव इतना कठिन था कि सचिन को लगा कि वह कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे
- सचिन को अफसोस है कि उन्हें कभी वेस्ट इंडीज के महान फास्ट बोलर मार्शल, रॉबर्ट्स, होल्डिंग और गार्नर का सामना करने का मौका नहीं मिला
- फैसलाबाद टेस्ट में इमरान खान की इनस्विंगर जिसपर सचिन आउट हुए, उसके लिए सचिन ने कहा कि 'फुट भर आत आलाÓ यानी एक फीट अंदर आई...
- सचिन को गुस्सा भी आता है। अपनी इच्छा के खिलाफ परिवार के साथ फोटो खींचने के लिए एक पत्रकार को सचिन ने खूब लताड़ा था
- सचिन जब छोटे थे तब उन्हें क्रिकेट के आंकड़ों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी
- पहली बार किसी अखबार को इंटरव्यू एक ईरानी रेस्त्रां में बैठकर दिया था
- पत्रकारों के फोन कॉल से परेशान होकर एक बार उन्होंने उसी कॉलनी में एक दोस्त के घर फिल्में देखकर कई दिन बिताए
- उनकी पसंदीदा फिल्म है जाने भी दो यारो
- सचिन को ऐक्शन फिल्में काफी पसंद हैं
- रणजी, ईरानी और दलीप ट्रॉफी में अपने पहले मैचों में ही शतक जड़े थे सचिन ने
- परंपरागत पोशाक शायद ही कभी पहनते हैं
- सचिन फॉर्मूला वन के शौकीन हैं और माइकल शुमाकर के फैन हैं
- अमिताभ ने सचिन को देश की धड़कन बताया था
- सचिन खाने के काफी शौकीन हैं। सलिल अंकोला के साथ वह ज्यादा खाने की शर्त लगाते थे और हमेशा जीत जाते थे
- एक ऐसा भी वक्त था जब सचिन एक ही बार में 8 वड़ा पाव खा सकते थे
- भारत और न्यूजीलैंड के बीच 1989-90 में नेपियर टेस्ट में जॉन राइट ने 88 के स्कोर पर उनका कैच लपका और सचिन सबसे कम उम्र में टेस्ट सेंचुरी लगाने से चूक गए
- सचिन पहले फास्ट बोलर बनना चाहते थे और इसके लिए एमआरएफ पेस एकैडमी भी गए जहां डेनिस लिली ने उनसे बोलिंग की बजाय बैटिंग पर ध्यान देने के लिए कहा
- सचिन टेबल टेनिस खेलते हैं, दोनों हाथों से खेल सकते हैं और टूअर पर जाते हैं तो अपना रैकेट साथ ले जाते हैं
- सचिन को अपनी मां के हाथ का बना खाना बहुत पसंद है, खासकर मछली
- सचिन कभी-कभी अपने स्कूल शारदा आश्रम की टीम के लिए बोलिंग की शुरुआत करते थे
- सचिन के किट बैग में उनकी बेटी साराह और अर्जुन द्वारा बनाया एक कॉर्ड रहता है जिस पर लिखा है ऑल द बेस्ट पापा।
- सचिन आज भी अपनी मां रजनी के पांव छुए बगैर घर से नहीं निकलते।
- सचिन के पास 50 से अधिक घडिय़ों की क्लेक्शन है जिनमें देशी और विदेशी दोनों शामिल हैं।
- सचिन को पतंग उड़ाने का शौक है।
- दिल्ली आने पर बटर चिकन और दाल बुखारा खाना नहीं भूलते। जब मुंबई में रहते हैं तो वड़ा पाव खाना पसंद करते हैं।
- उनको लॉफ्टर चैलेंज में राजू श्रीवास्तव की परफॉर्मंस बहुत अच्छी लगती है।
- सचिन अपने क्रिकेट के सामान को लेकर काफी पजेजिव हैं, उनका बैट, पैड या कोई और चीज कोई छुए, उन्हें पसंद नहीं
- सचिन को अपने बच्चों को रात में कहानियां सुनाना अच्छा लगता है। उनकी कहानियों में रोहन नाम का काल्पनिक पात्र है। यह नाम उन्होंने ही रखा है।
- सचिन की ख्वाहिश एक बार महान बॉक्सर मोहम्मद अली से मिलने की है। सचिन एक दिन फॉर्म्युला 1 कार भी चलाना चाहते हैं।
- सचिन गणेश भगवान के भक्त हैं और उन्होंने अपने घर में उनकी कई प्रतिमाएं रखी हैं।
- वह अमिताभ बच्चन के फैन हैं और शोले, दीवार, ब्लैक, हेरा फेरी और सत्ते पे सत्ता फिल्में उनकी पसंदीदा हैं।
- सचिन वास्तु शास्त्र में विश्वास करते हैं। बांद्रा में बन रहा उनका नया घर वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार बन रहा है
- टीवी पर सचिन को डिस्कवरी चैनल देखना बेहद पसंद है।
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क्रिकेटरों ने तेंदुलकर की तारीफों के पुल बांधे
नई दिल्ली।
सचिन तेंदुलकर के अगले महीने अपना 200वां टेस्ट खेलने के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा करने के बाद मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों ने इस महान बल्लेबाज की तारीफों के पुल बांधे। क्रिकेट की दुनिया में हर तरफ तेंदुलकर की सराहना ही देखने को मिली।  
पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि भारतीय बल्लेबाजी में इतना बड़ा निर्वात्त आ गया है। उसकी जगह लेना आसान नहीं होगा। देखिए लक्ष्मण, गांगुली और द्रविड़ के संन्यास लेने के बाद क्या हुआ। मध्यक्रम को एकजुट होने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में चौथे नंबर पर कुछ महान खिलाड़ी खेले हैं। जो भी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करता है वह काफी दबाव में होता है और उसे बड़ी अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है।
आधुनिक क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाज माने जाने वाले तेंदुलकर ने आज घोषणा की कि वेस्टइंडीज के खिलाफ अगले महीने 200वां टेस्ट खेलने के बाद वह टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह देंगे जिससे 24 साल के उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का भी अंत हो जाएगा।
गावस्कर ने कहा कि उन्होंने जब तेंदुलकर को पहली बार नेट पर बल्लेबाजी करते हुए देखा था तभी उन्हें समझ में आ गया था कि वह महान उपलब्धियां हासिल करेगा। गावस्कर ने कहा कि ऐसे किसी खिलाड़ी की कल्पना करना मुश्किल है जिसने खेल के इतिहास में लिटिल मास्टर की तरह पारंपरिक तकनीक और आक्रामकता का ऐसा मिश्रण किया हो। ऐसा कोई शाट नहीं है जिसे वह नहीं खेल सकता।
एक अन्य पूर्व भारतीय कप्तान और लंबे समय तक तेंदुलकर के टीम के साथी रहे सौरव गांगुली ने का कि वेस्टइंडीज सीरीज की शुरुआत से पहले संन्यास की घोषणा करके इस दिग्गज बल्लेबाज ने सही फैसला किया। गांगुली ने कहा कि यह सही फैसला है और उसने इसे सही समय पर लिया। मैं बेहद खुश हूं कि उसने सीरीज की शुरुआत से पहले ऐसा किया। मैं देश के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे इन दो टेस्ट मैच को देखने आए, फिर भले ही यह कोलकाता में हो या मुंबई में, सिर्फ इस महान व्यक्ति के प्रति सम्मान दिखाने के लिए आएं।   
पूर्व भारतीय कप्तान और लोकसभा सदस्य मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा कि तेंदुलकर का फैसला हैरानी भरा नहीं है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर ऐसा होने वाला था लेकिन मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं थी कि कब ऐसा होने वाला है। लेकिन यह उसका फैसला है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए। हमें उसके करियर को ऐसी चीज के रूप में देखना चाहिए जिसने हमेशा हमें खुशी दी और गौरवांवित किया।
अजहर ने कहा कि मैंने पहली बार उसे हैदराबाद बनाम मुंबई रणजी मैच में खेलते हुए देखा जहां उसने अच्छी बल्लेबाजी की। इसके बाद मैंने उसका गजब का साहस अब्दुल कादिर के खिलाफ ड्रेसिंग रूम से देखा। काफी लोगों में प्रतिभा होती है लेकिन जिस चीज ने उसे अलग बनाया वह उसका जुनून है।
तेंदुलकर से जुड़े सबसे यादगार लम्हें के बारे में पूछने पर अजहर ने कहा कि ऐसे कई मौके है लेकिन बेशक 1996 केपटाउन टेस्ट मैच जहां हम दोनों ने शतक बनाया। दक्षिण अफ्रीका के आक्रमण में एलेन डोनाल्ड, शान पोलाक, ब्रायन मैकमिलन और लांस क्लूसनर शामिल थे लेकिन खेल के निश्चित समय के दौरान हमने उनके जबर्दस्त धुनाई की।
गांगुली ने कहा कि तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ विदेशों में जिस तरह से बल्लेबाजी की उससे भारत को क्रिकेट की दुनिया में सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि उसने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ विदेशों में जिस तरह बल्लेबाजी की उससे भारत को वर्ष 2000 के बाद सम्मान मिला। इसमें उसकी अहम भूमिका रही। मेरे लिए यह सबसे बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में सिडनी में उसकी पारी सर्वश्रेष्ठ थी। सिडनी में अंतिम टेस्ट में 240 रन की पारी के दौरान उसने एक भी कवर ड्राइव नहीं लगाया। यह उस व्यक्ति की क्षमता और मानसिक मजबूती को दिखाता है। महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने इसे क्रिकेट के लिए बुरा दिन करार दिया।
मुरलीधरन ने कहा कि मुझे लगता है कि यह भारतीय क्रिकेट और विश्व क्रिकेट के लिए बुरा दिन है। हम सचिन को दोबारा खेलते हुए नहीं देखेंगे। वह अपने शर्तों पर संन्यास ले रहा है। श्रीलंका के इस स्टार खिलाड़ी ने कहा कि निश्चित तौर पर हम हमेशा सचिन का विकेट लेना चाहते थे। सभी विरोधी उसे आउट करना चाहते हैं। अधिकांश समय वह जंग में जीत जाता है। वह इतना महान खिलाड़ी है।
तेंदुलकर को महानतम क्रिकेटर करार देते हुए पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने कहा कि इस दिग्गज बल्लेबाज का यह फैसला उनके लिए हैरानी भरा था। उन्होंने कहा कि सचिन भारत का सबसे महान क्रिकेटर है और सभी क्रिकेटरों के लिए मैदान के अंदर और बाहर बेहतरीन आदर्श। उसने सभी प्रारूपों में लगभग हर रिकार्ड अपने नाम किया और खेल के इतिहास के उसका करियर सबसे महान करियर में से एक है।
भारत की ओर से 116 टेस्ट खेलने वाले वेंगसरकर ने कहा कि मुझे उससे संन्यास की उम्मीद नहीं थी। मैंने सोचा था कि वह पूरा साल (सत्र) खेलेगा। उसने 200 टेस्ट के बाद शीर्ष पर रहते हुए संन्यास का फैसला किया।
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सचिन ने सही वक्त पर किया संन्यास का फैसला: गांगुली
कोलकाता। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने गुरुवार को कहा कि महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने सही समय पर संन्यास का फैसला किया है। गांगुली ने कहा कि अब बीसीसीआई को सचिन के अनुभव का उपयोग क्रिकेट के होनहारों को तराशने के लिए किया जाना चाहिए। सचिन के साथ लम्बे समय तक एकदिवसीय मैचों में जोड़ीदार रहे गांगुली ने कहा कि सचिन ने सही समय पर फैसला किया है।
सचिन के साथ अच्छी साझेदारियां निभा चुके गांगुली ने कहा कि सचिन की सबसे बड़ी खासियत उनका खेल के प्रति समर्पण और उनका नजरिया रहा है।
गागुंली ने कहा कि वह सचिन से सबसे पहले इंदौर में आयोजित एक अंडर-16 कैम्प में मिले थे। गांगुली ने कहा कि मैंने जब उन्हें देखा था, तब मैं उनकी प्रतिभा से हैरान था। वह सभी तरह के शॉट खेल सकते थे। उनमें इस खेल में सफल होने की जबरदस्त भूख थी। सचिन के अनुभव का कैसे उपयोग किया जाए, इस सम्बंध में गांगुली ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में सचिन की महान उपयोगिता है। वह भारतीय क्रिकेट के अनमोल धरोहर हैं। उन्हें इस देश में क्रिकेट प्रतिभाओं को तराशने के लिए कहा जाना चाहिए।
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मीडिया में सचिन का संन्यास......










Monday, 24 December 2012

क्रिकेट के 'भगवान' को वनडे से दिया संन्यास


सचिन के बजाय बीसीसीआई ने की घोषणा !
मुंबई, 23 दिसंबर, 2012। दुनिया में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने 23 दिसंबर रविवार को वनडे मैचों से अपने संन्यास की घोषणा कर दी है, लेकिन संन्यास की घोषणा सचिन के बजाय बीसीसीआई ने की। इससे पहले उनके पाकिस्तान के साथ होने वाली सीरीज में खेले जाने को लेकर अटकलें लग रही थीं। अचानक सचिन के संन्यास की खबर सुनकर पूरा देश सन्न रह गया। सभी को उम्मीद थी कि सचिन भारत-पाकिस्तान सीरीज जरूर खेलेंगे। उन्होंने इच्छा भी जाहिर की थी, लेकिन बीसीसीआई ने 'भगवान' पर भरोसा नहीं किया और जल्दबाजी में उनके संन्यास की घोषणा कर दी। सचिन ने अभी तक 463 वनडे मैच खेले जिसमें उन्होंने 18426 रन बनाए। इसमें उन्होंने 49 शतक 96 हाफसेंचुरी लगाई। उन्होंने अपने संन्यास की बात बीसीसीआई चेयरमेन एन श्रीनिवासन से की है। पिछली कुछ सीरीज से उनकी खराब फार्म के चलते उनपर संन्यास लेने को लेकर दबाव भी बन रहा था। उन्होंने ढाका में आखिरी वनडे खेला था। 1989 में पहली बार वह पाकिस्तान के खिलाफ मैदान पर दिखाई दिए थे। उस वक्त सचिन की उम्र महज 16 साल की थी। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि छोटा सा दिखने वाला यह बच्चा आगे जाकर क्रिकेट का भगवान कहलाने लगेगा और बड़े से बड़ा गेंदबाज उसके सामने गेंद फेंकने से डरेगा।
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मास्टर के बेमिसाल कीर्तिमानों में से कुछ बेमिसाल क्षण..
मुंबई। सचिन तेंदुलकर ने अब वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। लेकिन पिछले 23 सालों से उनके बल्ले से निकले ढेरों रिकॉर्ड लंबे समय तक उनकी याद दिलाएंगे। 50-50 ओवर के इस प्रारूप में उन्होंने 49 शतकों के साथ 18 हजार से ज्यादा रन बनाए हैं जो उनके कई दुर्लभ कीर्तिमानों में से एक है।
दुनियाभर के मैदानों पर रचे गए मास्टर ब्लास्टर की ढेरों कीर्तिमानों में से कुछ चुनिंदा पलों को याद करने की कोशिश की गई। जिसे आपके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है...

हीरो कप, 1993 [दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ]

दक्षिण अफ्रीका को भारत के खिलाफ इस मैच में जीतने के लिए अंतिम ओवर में छह रन की और जरूरत थी। आखिरी ओवर सचिन तेंदुलकर ने किया और महज तीन ही रन दिए जिससे भारत ने यह मुकाबला आसानी से जीत लिया।

बतौर ओपनर, 1994 [न्यूजीलैंड के खिलाफ]

तेंदुलकर इस समय टीम इंडिया के उपकप्तान थे और टीम नियमित ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू के गर्दन की नस खींच गई थी ऐसे में मास्टर ब्लास्टर ने कप्तान अजहर और कोच अजित वाडेकर से अनुरोध किया कि उन्हें एक मौका दिया जाए। और कहा कि मैं शुरुआती 15 ओवर में बड़े शॉट खेल सकता हूं। अगर मैं असफल होता हूं तो आपके पास कभी नहीं आऊंगा। इस मैच में उन्होंने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 49 गेंदों में शानदार 82 रनों की पारी खेली थी।

टाइटन कप, 1996 [दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ]

दक्षिण अफ्रीका टूर्नामेंट में शानदार खेल रहा था और उससे पार पाने की टीम इंडिया ने अपनी नई योजना बनाई। बतौर कप्तान सचिन तेंदुलकर ने आन साइड में पांच क्षेत्ररक्षक तैनात कर दिया। उन्होंने रोबिन सिंह से धीमी गेंद करने को कहा और सुझाव दिया कि गेंद आन साइड पर ही रखे। इस तरह से लो स्कोरिंग मैच में उन्हें शानदार जीत मिली।

सहारा कप, 1997 [पाकिस्तान के खिलाफ]

पाक के खिलाफ इस चर्चित वनडे सीरीज में टीम इंडिया के तीन मुख्य गेंदबाज अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद नहीं खेल रहे थे और नए खिलाडि़यों अभय कुरुवीला, हरविंदर सिंह और देवाशीष मोहंती के दम पर शानदार प्रदर्शन करते हुए चिर-प्रतिद्वंद्वी टीम को 4-1 से हरा दिया।

शारजाह में दो शतक, 1998 [ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ]

तेंदुलकर इस समय अपने क्रिकेट करियर की ऊंचाई पर थे और उन्होंने मैदान पर विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाकर अपने प्रशंसकों का जमकर मनोरंजन कराया। शरजाह में त्रिकोणीय सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 283 रन बनाए। इस मैच में भारत पर फाइनल की पात्रता हासिल करने का दबाव था। चार विकेट लगातार अंतराल पर गंवाने के बाद सचिन के साथ वीवीएस लक्ष्मण क्रीज पर थे और इस समय भारत को करीब छह की औसत से रनों की जरूरत थी। इस बीच तेज आंधी के कारण करीब आधे घंटे का खेल रोका गया। भारत को 46 ओवरों में 237 का संशोधित लक्ष्य मिला और जीत के लिए 87 गेंदों पर 94 रनों की जरूरत थी। मैदान जाते ही सचिन ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की जो धुनाई की उसे आज भी याद किया जाता है। वह 143 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन उससे पहले टीम को फाइनल के लिए क्वालीफाई करवा दिया। भारत 20 रनों से मैच हार गया लेकिन रन रेट के आधार पर उसने न्यूजीलैंड को पछाड़ दिया। इसके बाद उन्होंने फाइनल में भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जोरदार शतक लगाया।

विश्व कप, 1999 [पाकिस्तान के खिलाफ]

इस पारी की बदौलत भारत ने विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपराजेय रहने का रिकॉर्ड बरकरार रखा। पाक ने विश्व कप के इस लीग मैच में सात विकेट पर 273 रन बनाए। सईद अनवर ने शतक (101) बनाया। 274 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सचिन ने पाक गेंदबाजों पर शुरुआत से ही आक्रमण बोल दिया। उन्होंने 75 गेंदों पर 12 चौकों और एक छक्के से 98 रन बनाए थे। उनकी पारी का एकमात्र छक्का शोएब अख्तर की गेंद पर लगाया था, जिसे बाद में शॉट ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। वह इस मैच में मैन ऑफ द मैच रहे और बाद में मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी बनें।

वनडे सीरीज, 2004 रावलपिंडी 2004 [पाकिस्तान के खिलाफ]

यह वह दौर था जब लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया था कि सचिन में अब आक्रामकता खत्म हो चुकी है। पाक ने यासिर हमीद (86) और शाहीद आफरीदी (80) की पारियों से छह विकेट पर 329 रन बनाए। 330 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सचिन ने 135 गेंदों पर 17 चौकों और एक छक्के से 141 रन बनाए। उन्हें शोएब मलिक की गेंद पर अब्दुर रज्जाक ने लपका। जब तक तेंदुलकर क्रीज पर थे उस समय तक मैच भारत के कब्जे में लग रहा था लेकिन उसे 12 रनों से हार का सामना करना पड़ा।

वनडे सीरीज 2009 [ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, 175 रन]

सात मैचों की सीरीज का यह पांचवां मैच था। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शॉन मार्श के शतक (112) से चार विकेट पर 350 रन बनाए। जवाब में सचिन तेंदुलकर ने वीरेंद्र सहवाग (38) के साथ सधी शुरुआत की। लेकिन मध्यक्रम लड़खड़ा गया। 36 साल के तेंदुलकर ने सुरेश रैना (59) के साथ पांचवें विकेट के लिए 137 रन और रवींद्र जडेजा (23) के साथ सातवें विकेट के लिए 32 रन जोड़ते हुए टीम को मैच में बनाए रखा। अहम मौके पर सचिन क्लाइंट मैके का शिकार बने। आउट होने से पहले उन्होंने 175 रनों की दमदार पारी खेलकर भारत को जीत दिलाने की पूरी कोशिश की, लेकिन भारत यह मैच तीन रन से हार गया।

वनडे सीरीज, 2010 [दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, 200* रन]

सचिन तेंदुलकर की यह पारी वनडे इतिहास की सबसे यादगार पारियों में दर्ज है। वनडे इतिहास में पहला दोहरा शतक और वह भी विश्व के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आक्रमण के सामने। तेंदुलकर ने डेल स्टेन, वेन पर्नेल, जैक्स कैलिस जैसे गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 147 गेंदों पर नाबाद 200 रन बनाए। वह भारत की पूरी पारी के दौरान मैदान पर खड़े रहे। भारत ने तीन विकेट खोकर 401 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर ख़़डा किया। जवाब में दक्षिण अफ्रीकी टीम 42.5 ओवरों में 248 रन पर सिमट गई।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक, 2012 [बांग्लादेश के खिलाफ]

मास्टर ब्लास्टर ने इसी साल 16 मार्च को बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप में शानदार शतक लगाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक लगाने का कारनामा अपने नाम कर लिया। उन्होंने यह शतक जमाकर न सिर्फ सौ शतकों का कारनामा कर दिखाया बल्कि टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों के घर में टेस्ट व वनडे में शतक लगाने वाले एकमात्र बल्लेबाज बन गए। हालांकि उनकी शतकीय पारी के बावजूद टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा था।
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सचिन रिकार्ड तेंदुलकर का यादगार सफर
1989: सोलह बरस के सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत करते हुए श्रीकांत की कप्तानी वाली टीम में छह पारियों में देश के लिए दो अर्धशतक बनाए।

1990:
तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक [नाबाद 119] ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ जमाया।

1993: भारतीय सरजमीं पर अपना पहला टेस्ट शतक [163] तेंदुलकर ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ बनाया।

1994: सचिन ने अपना पहला वनडे शतक अपने 79वें मैच में कोलंबो में आस्ट्रेलिया के खिलाफ सिंगर कप में बनाया।

1996: भारतीय उपमहाद्वीप में हुए विश्व कप में सचिन ने दो शतक सहित 523 रन बनाए। इसी साल तेंदुलकर की कप्तानी में ही भारत ने आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका को हराकर टाइटन कप जीता।

1997: टोरंटो में पाकिस्तान के खिलाफ सहारा कप में 4-1 से जीत दर्ज की। इसी साल सचिन सर्वश्रेष्ठ विजडन क्रिकेटर चुने गए।

1998: आस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 155 रन चेन्नई में बनाए जिससे भारत ने 179 रन से जीत दर्ज की।

2001: वनडे में दस हजार रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बने।

2002:
सचिन ने पोर्ट आफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ 117 बनाकर सर डॉन ब्रेडमैन के 29 टेस्ट शतक की बराबरी की और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 193 बनाकर ब्रेडमैन के रिकार्ड को पार किया।

2003: आईसीसी विश्व कप के 11 मैचों में 673 बना कर टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने।

2004: सुनील गावस्कर के 34 शतक के रिकार्ड की बराबरी करने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी बने। 50 मैन ऑफ द मैच हासिल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने।

2005: टेस्ट क्रिकेट में 122वें मैच में दस हजार रन पूरे किए।

2006: वनडे में 14 हजार रन पूरे कर नया विश्व रिकार्ड बनाया। 40वां शतक वेस्टइंडीज के खिलाफ कुआलालंपुर में पूरा किया।

2007: 400वां वनडे मैच खेला।

2008: वनडे में 16 हजार रन बनाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने। इसी साल टेस्ट क्रिकेट में ब्रायन लारा के 11,953 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

2009: हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 175 रन बनाए और 17 हजार वनडे रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने।

2010: वनडे में दोहरा शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने और स्टीव वॉ के 168 टेस्ट खेलने के रिकॉर्ड को पार किया।

2011: विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ पहला मैच खेलने के साथ ही वह सबसे ज्यादा वनडे खेलने वाले खिलाड़ी बने और सनथ जयसूर्या के 444 मैचों के रिकार्ड को पीछे छोड़ा।

2011: विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। भारत के लिए विश्व कप में सबसे ज्यादा 482 रन बनाने वाले बल्लेबाज बने।

2012: एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ 114 रन बनाकर अपना अंतरराष्ट्रीय करियर का सौवां शतक पूरा किया। साल के आखिरी महीने में उनके करियर में पहली बार संन्यास शब्द आया।
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Saturday, 21 July 2012

क्रिकेट में छत्तीसगढ़ की ऊंची उड़ान

0 अंडर-19 व 22 में प्लेट ग्रुप के बाद अंडर-16 में भी सेंट्रल जोन में हुआ प्रमोट
0 बीसीसीआई की दिल्ली में हुई बैठक में लिया गया निर्णय 
0 अगले साल रणजी की पूर्ण मान्यता मिलना तय


शंकर चंद्राकर
रायपुर। क्रिकेट में छत्तीसगढ़ ने सोमवार को एक और ऊंची उड़ान भरने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गया। दिल्ली में 16 जुलाई को हुई बीसीसीआई की बैठक में छत्तीसगढ़ को अंडर-16 में एसोसिएट से सेंट्रल जोन में प्रमोट कर दिया। छत्तीसगढ़ अंडर-19 व 22 वर्ग में पहले से ही प्लेट ग्रुप में प्रमोट हो चुका है। यह छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ की बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब छत्तीसगढ़ तीनों वर्गों में बीसीसीआई के एसोसिएट टूर्नामेंट से प्रमोट हो गया है। इस उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ को अगले साल रणजी ट्राफी की पूर्ण मान्यता मिलना लगभग तय है।
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया एवं सचिव राजेश दवे ने बताया कि छत्तीसगढ़ की अंडर-16 टीम अब सेंट्रल जोन टूर्नामेंट में राजस्थान, विदर्भ, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के साथ खेलेगी। यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश की अंडर-16 टीम गत दो सालों से एसोसिएट ट्राफी चैंपियन है। इसका फायदा छत्तीसगढ़ को मिला। छत्तीसगढ़ को वर्ष 2008 में एसोसिएट मेंबर की मान्यता मिलने के बाद से प्रदेश संघ लगातार कई बड़े टूर्नामेंटों का आयोजन किया। साथ ही प्रदेश संघ ने लगातार तीन साल से तीनों वर्गों के बीसीसीआई एसोसिएट ट्राफी टूर्नामेंट का सफलतापूर्वक आयोजन किया। प्रदेश टीम तीनों वर्गों में चैंपियन रही। इसी तरह महिला सीनियर टीम भी इस साल एसोसिएट ट्राफी जीती। पिछले तीन सालों में छत्तीसगढ़ की क्रिकेट गतिविधियों को देखकर बीसीसीआई ने कई बार प्रदेश क्रिकेट संघ के कार्यों की तारीफ की थी। बीसीसीसीआई के एसोसिएट मेंबर प्राप्त राज्यों में सिर्फ छत्तीसगढ़ ही एकमात्र राज्य है, जो तीनों वर्गों में प्रमोट हुआ है। अगले साल रणजी की पूर्ण मान्यता मिलने के बाद छत्तीसगढ़ पूर्ण मान्यता हासिल करने वाला पहला राज्य बन जाएगा। 

खिलाड़ियों व प्रदेश संघ की मेहनत का फल : भाटिया
बीसीसीआई द्वारा छत्तीसगढ़ की अंडर-16 टीम को सेंट्रल जोन में प्रमोट किए जाने पर छग स्टेट क्रिकेट संघ के सचिव बलदेव सिंह भाटिया ने कहा कि यह प्रदेश के खिलाड़ियों व संघ के लिए खुशी की बात है। यह प्रदेश के खिलाड़ियों और प्रदेश संघ की कड़ी मेहनत का फल है। इसके लिए प्रदेश संघ बीसीसीआई का आभार व्यक्त करता है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को रणजी की मान्यता मिलेगी तो यहां कई बड़े टूर्नामेंट का भी आयोजन किया जाएगा। इसका फायदा यहां के खिलाड़ियों को मिलेगा। 

छग के खिलाड़ियों के लिए दरवाजा खुला : दवे
छग स्टेट क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे ने कहा कि अंडर-16 टीम के सेंट्रल जोन में प्रमोट होने से अब छत्तीसगढ़ तीनों वर्गों में प्रमोट हो गया है। एक तरह से यहां के खिलाड़ियों के लिए बीसीसीआई का दरवाजा पूरी तरह खुल चुका है। अब सिर्फ हमें आगे बढ़ना है। 11 सालों तक यहां के खिलाड़ी बीसीसीआई के बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने से वंचित हो जाते थे, लेकिन अब सीधे ही बोर्ड के टूर्नामेंटों में हिस्सा लेंगे। इसके लिए प्रदेश क्रिकेट संघ और खिलाड़ियों ने काफी मेहनत की है। उसी का नतीजा हम सबके सामने है। 

वर्ष 2008 के बाद संघ की गतिविधियां
0 लगातार 2009 से तीन सालों तक बीसीसीआई एसोसिएट ट्राफी का आयोजन। प्रदेश की अंडर-19, 22 व 16 टीम तीनों वर्गों में चैंपियन हुए।
0 अंडर-14, 16, 19 व 22 के टूर्नामेंट आयोजित करना और यहां की टीम को दूसरे राज्यों में खेलने के लिए भेजना।
0 नवंबर 2010 में कनाडा की राष्ट्रीय टीम विश्वकप से पहले छत्तीसगढ़ दौरे पर आई। तीनों मैचों में छत्तीसगढ़ ने कनाडा को हराया।
0 पिछले साल अंडर-22 में प्लेट ग्रुप के मैच में छत्तीसगढ़ ने गोवा, असम, विदर्भ, हरियाणा  के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन किया।

Tuesday, 27 March 2012

रायपुर में आशियाना बनाएँगे कॉमनवेल्थ चैम्पियन ओंकार सिंह


0 स्थायी रूप से छत्तीसगढ़ में बसने का किया इरादा
0 रायपुर में देख रहे मकान
0 भविष्य में वे छत्तीसगढ़ की ओर से खेल सकते हैं
रायपुर में अपने मामाजी के यहाँ अंतरराष्ट्रीय शूटिंग ख़िलाड़ी ओंकार सिंह
शंकर चंद्राकर
रायपुर।
दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग में तीन स्वर्ण व एक रजत जीतने वाले अंतरराष्ट्रीय शूटर ओंकार सिंह अब रायपुर में अपना आशियाना बनाएंगे। उन्होंने अब स्थायी रूप से छत्तीसगढ़ में बसने का इरादा कर लिया है। इसके लिए वे यहां मकान खरीदना चाहते हैं। इसी सिलसिले में सीमित प्रवास पर अपने मामाजी के यहां रायपुर आए ओंकार ने रविवार को दो-तीन जगह मकान भी देखे। यहां सेटल हो जाने के बाद वे भविष्य में छत्तीसगढ़ की ओर से खेल सकते हैं। मूलत: मध्यप्रदेश के अनूपपुर के रहने वाले ओंकार वर्तमान में नेवी की ओर से खेलते हैं।
रायपुर आये
ओंकार सिंह ने विशेष चर्चा करते हुए बताया कि वे दूसरी बार रायपुर आए हैं अभी यहां दो-तीन मकान देखे हैं, लेकिन फाइनल नहीं किया है। पसंद आने पर शीघ्र ही वे यहां मकान खरीद लेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में 30 पदक और राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 60 से अधिक पदक जीतने वाले ओंकार इस समय कोयंबटूर में भारतीय नौसेना पोत अग्रणी में चीफ पेटी आफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने लंदन जाएंगे

रायपुर में चर्चा करते हुए ओंकार सिंह
ओंकार ने बताया कि यहां से वे दिल्ली जाएंगे। वहां वे 10 दिवसीय ट्रांजिट शिविर में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे भारतीय टीम के साथ 16 से 24 अप्रैल तक लंदन में होने वाली वर्ल्ड कप शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने इंग्लैंड रवाना हो जाएंगे। उनका पूरा ध्यान वर्ल्ड कप में पदक जीतने पर है। लंदन के बाद वे 14 से 22 मई तक इटली के मिलान और फिर 23 से 28 मई तक जर्मनी के म्यूनिख में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे। लंदन ओलिंपिक में क्वालीफाई नहीं कर पाने का अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि अब वे उसकी कमी को वर्ल्ड कप में पदक जीतकर पूरा करेंगे। ओलिंपिक 50 मी. फ्री पिस्टल और 10 मी. एयर पिस्टल में हिस्सा लेने वाले ओंकार वर्ल्ड कप में 10 मी. एयर पिस्टल कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतने वाले अकेले भारतीय खिलाड़ी हैं। साथ ही वे पिछले साल कुवैत में हुई चौथी एशियन एयरगन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं।
ओलिंपिक में तीन-चार पदक
दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी रहे ओंकार ने कहा कि इस बार लंदन ओलिंपिक में पदकों की संख्या में निश्चित रूप से इजाफा होगा। खासकर शूटिंग में इस बार तीन से चार पदक मिलने की पूरी संभावना है। इसमें पूर्व ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा और रोंजन सोढ़ी से पदक की उम्मीद है। साथ ही गगन नारंग व विजय कुमार की भी तैयारी अच्छी है। उनसे भी पदक की उम्मीद है।
स्पोर्ट्स कल्चर व ग्रास रूट पर सपोर्ट जरूरी

15 वर्ल्ड कप में पदक जीत चुके ओंकार का मानना है कि भारत में स्पोर्ट्स कल्चर व ग्रास रूट में सपोर्ट की कमी है। इसके कारण हम अभी भी ओलिंपिक में पीछे हैं। इसके लिए चीन व रूस की तरह यहां स्पोर्ट्स कल्चर डेवलप करने की जरूरत है। खिलाड़ियों को मोटिवेट करने के लिए सरकार व अभिभावकों का सपोर्ट बहुत जरूरी है। देश में इकॉनामी के साथ ही स्पोर्ट्स को भी महत्व देना जरूरी है। खेलों को आगे बढ़ाने के लिए कार्पोरेट सेक्टर को भी आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर क्रिकेट की तरह शूटिंग को भी 10 प्रतिशत कार्पोरेट सहयोग मिल जाए तो देश में 10 अभिनव बिंद्रा निकल जाएंगे। इस समय शूटिंग में भारत दुनिया के टॉप टेन में शामिल है। लंदन ओलिंपिक क्वालीफाई के हिसाब से देखें तो भारत सिर्फ अपने पड़ोसी देश चीन व रूस से ही पीछे है।
शूटिंग खर्चीला गेम नहीं
ओंकार ने कहा कि आमतौर में शूटिंग को खर्चीला गेम के तौर पर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। आम मध्यमवर्गीय खिलाड़ी भी शूटिंग में आगे बढ़ सकते हैं। वे खुद इसका उदाहरण है, बशर्ते उन्हें घर से पूरा सपोर्ट मिलना चाहिए। देश में शूटिंग को आगे बढ़ाने व लोकप्रिय बनाने के लिए स्कूल लेवल पर सीमित संसाधनों में भी प्रैैक्टिस रेंज बनाई जा सकती है। 

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रुस्तम ने ओलिंपिक के लिए कसी कमर

 0 पटियाला साई सेंटर में खूब बहा रहे पसीना
0 एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण जीते तो ओलिंपिक की उम्मीद
0 अगले महीने कोरिया जाएंगे एशियन में हिस्सा लेने
शंकर चंद्राकर
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ओलिंपिक की तैयारी के लिए पूरी तरह कमर कस लिया है। रुस्तम इस समय पटियाला साई सेंटर में लगे विशेष ओलिंपिक कैंप में खूब पसीना बहा रहे हैं। अगले महीने वे भारतीय टीम के साथ 22 से 30 अप्रैल तक कोरिया के प्योंगटेक में होने वाली एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे। इसमें स्वर्ण पदक जीतने पर भारतीय टीम को लंदन ओलिंपिक के लिए एक कोटा हासिल हो जाएगा।
पटियाला से फ़ोन पर रुस्तम ने चर्चा करते हुए कहा कि इस समय उनका पूरा फोकस एशियन चैंपियनशिप पर है, जो कांटिनेंटल ओलिंपिक क्वालीफिकेशन इवेंट है। इसमें विजेता टीम को लंदन ओलिंपिक का एक कोटा हासिल होगा, इसलिए पूरी टीम का लक्ष्य हर हालत में स्वर्ण जीतना है। रुस्तम ने कहा कि स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर भी ओलिंपिक के लिए चयन निश्चित नहीं है। सब कुछ भारतीय वेटलिफ्टिंग संघ और उस समय संबंधित खिलाड़ी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ी भी यदि ओलिंपिक आयोजन के समय फिट नहीं रहे तो उनका चयन मुश्किल होगा, इसलिए अपने प्रदर्शन को निरंतर बरकरार रखना जरूरी है।

चार खिलाड़ियों में प्रतिस्पर्धा
भारतीय वेटलिफ्टिंग फेडरेशन ने लंदन ओलिंपिक के लिए 17 खिलाड़ियों का कोर ग्रुप बनाया है। ग्रुप के सभी खिलाड़ी इस समय पटियाला में विशेष प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। यदि भारतीय टीम एशियन चैंपियनशिप में ओलिंपिक कोटा हासिल कर लिया तो लंदन जाने के लिए होने वाले ट्रायल में कोर ग्रुप के चार खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है। उन चारों में रुस्तम भी शामिल हैं। रुस्तम 62 किग्रा वर्ग में हिस्सा लेते हैं। उनके वर्ग में भी तीन खिलाड़ी हैं। रुस्तम ने कहा कि सबसे पहले उन्हें अपने ही वर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। फिर उनके सामने कोर ग्रुप के अन्य खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती होगी। तैयारी के दौरान वे चोटिल न होने का पूरा ख्याल रख रहे हैं, क्योंकि दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान कलाई में लगी चोट से वे मुश्किल से उबर पाए हैं।
छोटे भाई भी ओलिंपिक कोर ग्रुप में
 राज्य बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब वेटलिफ्टिंग में ओलिंपिक के लिए लगाए गए विशेष प्रशिक्षण शिविर के कोर ग्रुप में छत्तीसगढ़ से एक साथ दो भाइयों का चयन हुआ है। रुस्तम के छोटे भाई अजयदीप सारंग भी 17 सदस्यीय ओलिंपिक के कोर ग्रुप में शामिल हैं। अजयदीप ने मंगलवार को नेपाल में समाप्त हुए प्रथम दक्षिण एशिया (सैफ) वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारतीय टीम के साथ हिस्सा लिया और इसमें उन्होंने 77 किग्रा वर्ग में अपना प्रदर्शन जारी रखते हुए देश के लिए तीन कांस्य पदक जीते। अजयदीप भी इस समय पटियाला में विशेष प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।  

छत्तीसगढ़ की महिला बास्केटबाल टीम ने जीता रजत

 0 26वीं फेडरेशन कप बास्केटबाल चैंपियनशिप में दक्षिण रेलवे से हारा
रायपुर।
केरल के कोचिन में हुई 26वीं फेडरेशन कप बास्केटबाल चैंपियनशिप के महिला वर्ग के फाइनल में रविवार को गत चैंपियन छत्तीसगढ़ को संघर्षपूर्ण मैच में दक्षिण रेलवे चेन्नाई से 82-93 से हार का सामना करना पड़ा।
छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ के महासचिव व महिला टीम के कोच राजेश पटेल ने बताया कि फाइनल में खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन रेलवे की खिलाड़ियों ने अंतिम समय में बढ़त हासिल कर खिताब पर कब्जा कर लिया। टीम की ओर से पूनम चतुर्वेदी ने सर्वाधिक 17 अंक, अंजू लकड़ा 16, सीमा सिंह 15, कविता 14, आकांक्षा सिंह आठ, एल. दीपा पांच व अंजना डेज्जी इक्का ने चार अंक हासिल किए।
इसके पूर्व शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में छत्तीसगढ़ की महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान केरल को 69-66 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। मैच में अंजू लकड़ा ने सर्वाधिक 29 अंक, सीमा सिंह 15, कविता 12, एल. दीपा पांच और आकांक्षा सिंह व पूनम चतुर्वेदी ने चार-चार अंक अर्जित किए।
मैच में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की महिला टीम को पुरस्कार के रूप में 75000 रुपए और ट्राफी मिली।

20 प्रशिक्षकों ने सीखीं क्रिकेट की बारीकियां

 0 एनसीए लेवल-बी कोचिंग कोर्स का समापन
0 प्रदेश के तीन कोच ने लिया हिस्सा
रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ की मेजबानी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा में 13 मार्च से शुरू हुए राष्ट्रीय क्रिकेट एकादमी लेवल-बी कोचिंग कोर्स का सोमवार को समापन हुआ। हफ्तेभर चले इस कोचिंग कोर्स में छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, राजस्थान व उत्तरप्रदेश समेत कुल 9 राज्यों के 20 प्रशिक्षकों ने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। 
 सभी प्रशिक्षकों को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के कोच एजुकेशन प्रोग्राम के हेड डॉ. किंजल सूरतवाला, बैटिंग कोच दिनेश नानावती, अंडर-19 भारतीय कोच बी. अरुण, फील्डिंग कोच अपूर्व देसाई, राजस्थान रणजी टीम के कोच अमित असावा एवं एनसीए के वीडियो एनालिस्ट व टेक्निकल हेड संजू सिंह ने क्रिकेट की सभी तकनीकी जानकारियांॅ दीं। इसमें छत्तीसगढ़ से तीन कोच दिलीप सिंह, राजेय सिंह परिहार एवं मुजाहिद हक ने हिस्सा लिया। कोर्स के दौरान प्रशिक्षकों को क्रिकेट की विभिन्ना छोटी-छोटी बारीकियों जैसे स्किल सुधारना, समय-समय पर युवा खिलाड़ियों के खेल में सुधारना, बैटिंग, बालिंग, फील्डिंग, विकेटकीपिंग, स्पोर्ट्स साइंस एवं वीडियो एनालिस्ट आदि विषयों से अवगत कराया गया।

369 दिनों के बाद आया सचिन का महाशतक


एशिया कप में बंगलादेश के खिलाफ शतकों का शतक पूरा किया.
ढाका (16 march 2012). मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (114) को अपने महाशतक के लिए कुल 369 दिनों का इंतजार करना पड़ा। पिछले साल 12 मार्च को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक जमाने के बाद 33 पारियों के बाद यह स्वप्निल शतक आया है। शतकों के महाशतक लगाने वाले सचिन के लिए यह शतक इस मामले में भी खास है क्योंकि अपनी इस महान पारी में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में 2008 चौके मार लिए हैं। 
आस्ट्रेलिया में खेली गई त्रिकोणीय वनडे सीरीज में सचिन महाशतक का सपना नहीं पूरा कर सके थे। उन्होंने अपने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए एशिया कप में खेलने की इच्छा जताई थी जिस कारण उन्हें इस टूर्नामेंट के लिए शामिल किया गया। सचिन ने इससे पूर्व बांग्लादेश के खिलाफ 12 वनडे मैच खेले थे लेकिन उसमें उनका सर्वाधिक स्कोर 82 रन था। इस तरह से उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ वनडे क्रिकेट में शतक के सूखापन को समाप्त किया।
ऐसा पहली बार हुआ है जब उनका बल्ला पूरे एक साल यानी 365 दिन तक बिना किसी शतक के रहा। तेंदुलकर ने अपना आखिरी शतक विश्व कप 2011 में 12 मार्च को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में लगाया था और इसके बाद वह टेस्ट और वनडे में कुल मिलाकर 33 पारियां खेलने के बाद उनका महाशतक आया। इस बीच उन्होंने आठ अर्धशतक जमाए जिनमें से दो बार 90 रन के पार भी पहुंचे। एशिया कप के अपने पहले मैच में भारत ने बड़ी जीत हासिल की थी लेकिन सचिन इस मैच में दहाई का आंकड़ा नहीं छू सके थे।
मास्टर ब्लास्टर अपने करियर में एक बार 34 अंतरराष्ट्रीय पारियों तक शतक नहीं लगा पाए थे लेकिन तब समय इतना लंबा नहीं खिंचा था। तेंदुलकर ने 26 मई 2007 से चार जनवरी 2008 के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 34 ऐसी पारियां खेली थी जिनमें वह तिहरे अंक में नहीं पहुंच पाए थे। उन्होंने तब हालांकि 223 दिन के अंदर ये पारियां खेल ली थी। वह तब कई अवसरों पर नर्वस नाइंटीज के शिकार बने और तीन बार तो 99 रन पर आउट हुए थे। तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद अपना पहला शतक जमाने के लिए भी 272 दिन का समय लिया था। पाकिस्तान के खिलाफ 15 नवंबर 1989 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले सचिन ने अपना पहला शतक 14 अगस्त 1990 को इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में लगाया था।
इसके बाद 1992 में भी 299 दिन तक उनके नाम पर कोई अंतरराष्ट्रीय शतक दर्ज नहीं हो पाया था लेकिन इस बीच बल्लेबाजी के बादशाह ने केवल 11 पारियां ही खेली थी। तेंदुलकर ने वर्तमान दौर से पहले अपने अंतरराष्ट्रीय शतक के लिए सबसे लंबा समय 1995-96 में लिया था। वह तब 315 दिन तक शतक नहीं लगा पाए थे लेकिन इस बीच भारत ने बहुत कम क्रिकेट खेली थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सचिन ने इस दौरान केवल दस अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली थी। इसके बाद 2004 में भी ऐसा दौर आया था जबकि तेंदुलकर को शतक के लिए 257 दिन तक का इंतजार करना पड़ा था।
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पहले शतक से महाशतक तक का सफरनामा
मीरपुर। महान बल्लेबाल सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में हर उस टीम के खिलाफ सैकड़ा जड़ा है जिसके खिलाफ उन्होंने दस या इससे अधिक मैच खेले लेकिन उन्होंने सर्वाधिक शतक दुनिया की सबसे मजबूत टीम आस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाए हैं। 
मास्टर ब्लास्टर ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ सर्वाधिक 20 शतक लगाए हैं। इनमें से 11 शतक उन्होंने टेस्ट मैच और नौ शतक वनडे मैचों में लगाए हैं। इसके बाद श्रीलंका [17], दक्षिण अफ्रीका [12], इंग्लैंड और न्यूजीलैंड [दोनों 9], जिंबाब्वे [8], वेस्टइंडीज और पाकिस्तान [7], बांग्लादेश [5], केन्या [4] और नामीबिया [1] का नंबर आता है। यह बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मैचों में सचिन का पहला शतक है। तेंदुलकर के 100 शतकों में से 42 शतक भारतीय सरजमीं पर बने हैं। उन्होंने 41 शतक विदेशी टीमों की धरती और 17 शतक तटस्थ स्थानों पर बनाए हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में वह अब तक 71 शतक जमा चुके हैं।
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महाशतक से फिर चमका 'ब्रांड' सचिन
नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर के 100वें शतक को लेकर न केवल उनके प्रशंसक, बल्कि वे ब्रांड भी उत्साहित हैं जिनका तेंदुलकर प्रमोशन करते हैं। ऐसे ब्रांडों की कंपनियों ने नए विज्ञापन अभियान शुरू करने की तैयारी भी कर ली है। 
 सचिन तेंदुलकर एडिडास, कोका-कोला, बूस्ट, आईटीसी, रेनाल्ड्स, अवीवा और कैनन सहित 17 ब्रांडों का प्रमोशन करते हैं। तेंदुलकर के अनूठे रिकार्ड को उत्सव के तौर पर मनाने के लिए कोका कोला ने भारत में पहली बार अपने कैन पर तेंदुलकर की तस्वीर छापी है और कंपनी तेंदुलकर के सबसे शानदार शतकों के ब्यौरे वाले नौ कैन जारी भी कर चुकी है। वहीं, एडिडास अप्रैल के पहले सप्ताह में तेंदुलकर के साथ एक नया मार्केटिंग अभियान शुरू करने की तैयारी की है। सचिन तेंदुलकर ने आज ढाका के शेरे बंगला नेशनल स्टेडियम में चल रहे एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ अपना बहुप्रतीक्षित 100वां शतक पूरा किया। 
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कालसर्प ने बनाया सचिन को 'भगवान'

मेरठ। कालसर्प दोष यानी अपशय, दुर्घटना, बीमारी और हानि। आपको जानकार हैरानी होगी कि सचिन तेंदुलकर की कुंडली में काल सर्पयोग है। इसी योग के चलते ग्रहों ने अच्छे समीकरण बनाए और सचिन को क्रिकेट का भगवान बना दिया। यह उन लोगों के लिए सुखद बात है, जिन्होंने ढपोरशंख ज्योतिषियों के फेर में पड़कर अपनी जिंदगी को इतना खौफनाक बना लिया है कि कालसर्प के नाम पर उन्हें अपनी परछाई से भी डर लगता है। जबकि शास्त्रों के मुताबिक यह योग रंक से राजा भी बना देता। 

सचिन की कुंडली में जन्म लग्न तुला राशि और चंद्र राशि धनु है। सारे ग्रह राहु और केतु के परिक्षेत्र में हैं। कालसर्प योग की मौजूदगी में मंगल ग्रह रुचक योग बना रहा है। इस योग का जातक प्रसिद्धि, साहसी और शत्रु को शिकस्त देने वाला होता है। इसके अलावा सचिन की कुंडली में पारिजात योग भी बन रहा है। इन योगों ने सचिन को क्रिकेट का भगवान बना दिया। हालांकि सचिन का चंद्रमा राहु से पीड़ित है, इसलिए वह कप्तानी के मोर्चे पर उतने सफल नहीं रहे। चंद्रमा की महादशा में राहु की अंतरदशा के चलते सचिन की कप्तानी में भारत ने कई मैच खेले। इस दौरान सचिन की बल्लेबाजी में गिरावट आई। और कप्तानी से भी हटना पड़ा।
इनकी कुंडली में भी कालसर्प
दुनिया के कई नामचीन खिलाड़ियों की कुडली में कालसर्प दोष है। इनमें कपिल देव, मोहम्मद अजहरुद्दीन, शाहिद आफरीदी जैसे नामचीन क्रिकेटर तो टेनिस स्टार लिएंडर पेस भी हैं।
सूचना का अधिकार है ज्योतिष
सितारों की गतिविधियां और इरादे जानने के लिए सृष्टि के रचनाकार ने इंसान को सूचना का अधिकार यानी ज्योतिष विज्ञान की सुविधा दी है। हाइटेक युग में स्वार्थी ज्योतिषियों ने इस पवित्र विद्या का भी बाजारीकरण कर दिया। कालसर्प योग जैसे डरावने शब्दों की ब्रांडिंग की गई। जबकि सच्चाई यह है कि इस योग के चलते आदमी बुलंदियों को भी छू लेता है।
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रो पड़े थे सचिन के गुरु आचरेकर
सचिन के गुरु रमाकांत आचरेकर सर ने टीवी पर मैच का लिया आनंद.
मुंबई। भारत-बांग्लादेश के बीच शुक्रवार 16 मार्च को खेले गए मैच के दौरान सचिन तेंदुलकर के प्रशंसक सांसें थाम कर महाशतक का इंतजार कर रहे थे। इन प्रशंसकों में शतकों के शहंशाह सचिन के कोच रमाकांत आचरेकर भी शामिल रहे। अपने सबसे प्रिय चेले के महाशतक पर वे अपनी भावनाओं को काबू नहीं कर सके और उनकी आंखें भर आई।
80 वर्षीय आचरेकर की भीगी आंखें एक साथ बहुत कुछ बयां कर रही थीं। 
उन्होंने बातचीत में बताया, 'मुझे पूरा विश्वास था कि सचिन अपना बहुप्रतीक्षित शतक आज पूरा करेगा और जैसे ही उसने इस जादुई आंकड़े को छूआ पूरे भारत ने राहत की सांस ली।' शरीर के दाएं हिस्से को लकवा मार देने की वजह से आचरेकर ठीक से बोल और चल पाने में असमर्थ हैं। अपने सबसे चहेते शिष्य की बैटिंग देखने के लिए वे सुबह से ही अपने परिवार के साथ सोफे से चिपक गए। जब सचिन 89 पर खेल रहे थे तो उनसे यह पूछने पर कि क्या आज सचिन अपना सौवां शतक पूर कर पाएंगे? इस पर आचरेकर ने बड़े विश्वास के साथ जवाब दिया कि सचिन आज अपना शतक पूरा कर लेगा। जब सचिन रन आउट होते-होते बचे उस वक्त वह काफी मायूस हो गए थे, उनके चेहरे पर चिंता साफ देखी जा सकती थी।
सचिन के शतक पूरा करते ही आचरेकर की आंखें आंसूओं से भर आईं। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों जब सचिन शतक नहीं बना पा रहा था तब मैं काफी डरा रहता था। लेकिन, इस समय सचिन ने उस खुशी को दी है जिसका पूरा देश काफी दिनों से इंतजार कर रहा था। मैं काफी खुश हूं कि उसने ऐसा कर दिखाया। आचरेकर के पोते वैदिक मुरकर ने बताया, 'आज सुबह ही मैंने दादा से सचिन के शतक को लेकर शर्त लगाई थी। मैंने कहा था कि वह अपना शतक पूरा नहीं कर पाएंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि सचिन अपना शतक आज जरूर पूरा करेगा।' मुरकर ने कहा कि मुझे खुशी है कि मैं शर्त हार गया।
यह हर कोई जानता है कि सचिन अपने गुरु आचरेकर का बहुत सम्मान करते हैं। वे हर दौरे की शुरुआत बिना उनसे आशीर्वाद लिए नहीं करते हैं। दौरे से लौटने के बाद भी उनसे मिलने जरूर आते हैं। खुद आचरेकर को विश्वास नहीं होता कि शिवाजी पार्क में जिस लड़के को वह कोचिंग दिया करते थे वो इन बुलंदियों पर पहुंचेगा। आचरेकर चाहते हैं कि सचिन ईमानदारी से खेलता रहे और नई ऊंचाइयों को छूए।
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महाशतक की खुशी हुई फीकी
बांग्लादेश ने टीम इंडिया को दी पटखनी

मीरपुर।
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर (114) के सौंवे अंतरराष्ट्रीय शतक की खुशी उस समय फीकी हो गई जब भारत को एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट के रोमांचक मुकाबले में बांग्लादेश से 4 गेंदें शेष रहते 5 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश की यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है। भारत की बांग्लादेश के खिलाफ यह तीसरी हार है। शकीब अल हसन को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
बांग्लादेश को हर हाल में जीत की दरकार थी, जिसे उसने शानदार तरीके से हासिल करते हुए फाइनल में पहुँचने की उम्मीदों को जीवित रखा। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 5 विकेट पर 289 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश ने 49.2 ओवर में 5 विकेट खोकर जीत दर्ज कर ली। लक्ष्य का पीछा करने उतरे बांग्लादेशी बल्लेबाजों ने अर्द्धशतकीय पारियाँ खेलते हुए टीम को यादगार जीत दिला दी। नजीमुद्दीन (5) का विकेट सस्तेे में गँवाने के बाद तमिम इकबाल (70) और जहुरूल इस्लाम (53) ने दूसरे विकेट के लिए 113 रन जोड़ते हुए टीम को लक्ष्य की ओर बढ़ाया। इसके बाद नासिर हुसैन (54) और शकीब अल हसन (49) ने उपयोगी पारियाँ खेलीं। अंतिम ओवरों में कप्तान मुश्फिकुर रहीम ने 25 गेंदों पर आक्रामक 46 रन बनाए। मेजबान टीम को जीत के लिए 4 ओवरों में 37 रनों की जरूरत थी। पठान द्वारा फेंके गए 48वंे ओवर में 17 रन बने, जिसमें रहीम के दो छक्के शामिल थे। इसके बाद बांग्लादेश की जीत औपचारिकता रह गई, जिसे उसने आसानी से पा लिया। 
इससे पहले भारतीय पारी पूरी तरह सचिन के इर्द-गिर्द घुमती रही और तमाम प्रशंसकों का लंबा इंतजार अंतत: समाप्त हो गया। सचिन ने पारी के 43वें ओवर में शकीब अल हसन की गेंद पर एक रन लेते हुए अपने शतकों का शतक पूरा कर लिया। उन्होंने शतक पूरा करने में 138 गेंदें लगी, जो संभवत: उनकी वन-डे की धीमी पारियों में से एक है। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने अपने हाथ खोले और शहादत हुसैन की गेंद पर लगातार दो चौके लगाए। दूसरे छोर पर उनके साथी सुरेश रैना ने विपक्षी गेंदबाजों की धुनाई करते हुए 38 गेंदों पर 51 रनों की पारी खेली। सचिन पर शतक का दबाव साफ तौर पर देखा जा सकता था। उन्होंने 80 से 100 तक पहुँचने में 36 गेंदों का सामना किया। कई बार ऐसे मौके भी आए जहाँ तेज रन लिए जा सकते थे लेकिन उन्होंने मना कर दिया। सचिन अंतत: 47वें ओवर में मशरफे मुर्तजा की गेंद पर विकेट के पीछे मुश्फिकुर रहीम द्वारा लपके गए। उन्होंने 147 गेंदों पर 12 चौकों और एक छक्के की मदद से 114 रन बनाए। सचिन और रैना के बीच 86 रनों की साझेदारी हुई।
इससे पहले गौतम गंभीर (11) के जल्द आउट होने के बाद सचिन और विराट कोहली (66) ने पारी को आगे बढ़ाया। हालाँकि कोहली भाग्यशाली रहे और शफीउल इस्लाम की पहली गेंद पर वे साफ पगबाधा आउट थे लेकिन अंपायर पॉल रफेल ने अपील नकार दी। दोनों ने बिना जोखिम उठाए दूसरे विकेट के लिए 148 रन जोड़े। पारी के अंत में कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी ने नाबाद 21 रन बनाए, जिसमें से अंतिम ओवर में 16 रन बने।
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स्कोर बोर्ड
भारत                                                                    रन    गेंद    4    6   
गंभीर बो. इस्लाम                                                  11    16    1    0
तेंडुलकर कै. रहीम बो. मुर्तजा                                114    147    12    1
कोहली बो. रज्जाक                                                66    82    5    0
रैना कै. तमिम बो. मुर्तजा                                       51    38    5    2
धोनी नाबाद                                                          21    11    2    0
रोहित रन आउट                                                    4    6    0    0
जडेजा नाबाद                                                        4    2    0    0
अतिरिक्त : (लेगबाई 6, वाइड 10, नोबॉल 2) 18, कुल : (5 विकेट पर, 50 ओवर में) 289, विकेट पतन : 1-25, 2-173, 3-259, 4-259, 5-267, गेंदबाजी : मुर्तजा 10-1-44-2, इस्लाम 5-0-24-1, शहादत 10-0-81-0, शकीब 10-0-63-0, रज्जाक 10-0-41-1, महमदुल्ला 4-0-24-0, नासिर 1-0-6-0
बांग्लादेश :                                                      
रन    गेंद    4    6
तमिम कै. जड़ेजा बो. प्रवीण                                 70    99    6    0
नजीमुद्दीन कै. रोहित बो. प्रवीण                           5    15    0    0
जहुरूल कै. रोहित बो. जड़ेजा                                53    68    4    1
नासिर कै. रैना बो. प्रवीण                                    54    58    5    0
शकीब स्ट. धोनी बो. अश्विन                              49    31    5    2
मुश्फिकुर नाबाद                                               46    25    3    3
महमदुल्लाह नाबाद                                          4    2    1    0
अतिरिक्त : (लेगबाई 7, वाइड 3, नोबॉल 2) 12, कुल : (5 विकेट पर 49.2 ओवर में) 293, विकेट पतन : 1-15, 2-128, 3-156, 4-224, 5-288, गेंदबाजी : प्रवीण कुमार 10-0-56-3, इरफान पठान 9-0-61-0, अशोक डिंडा 5.2-1-38-0, सुरेश रैना 7-1-30-0, रोहित शर्मा 2-0-13-0, आर. अश्विन 10-0-56-1, रवीन्द्र जड़ेजा 6-0-32-1. 

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'मीडिया' में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर