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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Sunday 3 April 2011

इंडिया ने दिखाया दम, बना विश्व चैंपियन


वर्ल्ड कप ट्राफी के साथ जोश में टीम इंडिया के खिलाड़ी
 मुंबई. गौतम गंभीर और महेंद्र सिंह धोनी की उत्कृष्ट पारियां तथा 121 करोड़ लोगों की दुआ शनिवार को वानखेड़े स्टेडियम में भारत को 28 साल बाद क्रिकेट का विश्व चैंपियन बना गई। भारतीय टीम ने श्रीलंका को छह विकेट से हराकर 1983 के बाद दूसरी बार विश्व कप जीता।
उस दिन भी शनिवार था जब 25 जून, 1983 को कपिल देव के धुरंधरों ने लार्ड्स में इतिहास रचा था। धोनी के रणबांकुरों ने फिर से शनिवार भारतीयों के लिए यादगार बना दिया। भारत ने नया रिकार्ड भी बनाया। वह अपनी सरजमीं पर फाइनल जीतने वाला पहला देश बन गया है। यही नहीं आस्ट्रेलिया (चार बार) और वेस्टइंडीज (दो) के बाद भारत तीसरा देश है जिसने कम से कम दो बार विश्व कप जीता।

पिछले तीन टूर्नामेंट की तरह इस बार फाइनल हालांकि एकतरफा नहीं रहा और इसमें उतार चढ़ाव भी देखने को मिले। गंभीर भले ही शतक से चूक गए लेकिन उनकी 97 रन की पारी और धोनी के नाबाद 91 रन महेला जयवर्धने के सैकड़े पर भारी पड़ गए।
जयवर्धने ने 88 गेंद पर नाबाद 103 रन की पारी खेली। उनके अलावा कुमार संगकारा (48), तिलकरत्ने दिलशान (33) और नुवान कुलशेखरा (32) ने भी अच्छा योगदान दिया। भारतीय गेंदबाजों ने शुरू में कसी हुई गेंदबाजी लेकिन आखिर में जमकर रन लुटाए। श्रीलंका ने आखिरी पांच ओवर में 63 रन बटोरकर छह विकेट पर 274 रन का अच्छा स्कोर खड़ा किया।
वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर के 31 रन के अंदर पवेलियन लौटने के बाद गंभीर ने एंकर की भूमिका बखूबी निभाई। उन्हें विराट कोहली (35) और कप्तान धोनी के रूप में कुशल सहयोगी मिले। धोनी ने विजयी छक्का जड़ा और भारत ने चार विकेट पर 277 रन बनाकर देश में चार दिन के अंदर दूसरी बार दीवाली का माहौल बना दिया।
भारत के चैंपियन बनते ही क्या युवराज और क्या हरभजन सभी खिलाड़ी भावनाओं में बह गए। उनकी आंखों में आंसुओं की धारा बह निकली। तेंदुलकर का विश्व चैंपियन टीम का हिस्सा बनने का सपना आखिर में पूरा हो गया जिसे वह 1992 के बाद से देख रहे थे। धोनी सहित कई भारतीय खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट से पहले कहा था कि वह तेंदुलकर के लिए कप जीतना चाहते हैं और उन्होंने वादा पूरा किया। युवराज सिंह टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी बने। भारतीय टीम ने कोच गैरी कर्स्टन को भी स्वर्णिम विदाई दी।
भारत को इस जीत से 30 लाख डालर (लगभग 14 करोड़ रुपये) मिले जबकि 1996 के चैंपियन श्रीलंका को लगातार दूसरी बार उप विजेता से संतोष करना पड़ा और उसे 15 लाख डालर मिले। इसके साथ ही धोनी दुनिया के पहले कप्तान बन गये जिनके नाम पर टवेंटी 20 और वनडे दोनों का विश्व खिताब है।
भारतीय पारी के शुरू में हालात हालांकि काफी खराब थे। लेसिथ मालिंगा ने दूसरी गेंद पर ही सहवाग को पगबाधा आउट कर दिया जिसमें रेफरल भी खराब गया। तेंदुलकर ने अपने घरेलू मैदान पर एक दो शाट जमाकर दर्शकों में जोश भरने की कोशिश की लेकिन मालिंगा के तीसरे ओवर में संगकारा ने जब विकेट के पीछे उनका नीचा कैच लिया तो सभी के मुंह खुले के खुले रह गए। इसके साथ ही तेंदुलकर का 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक का इंतजार भी बढ़ गया।
गंभीर इसके बाद न सिर्फ विकेट पर टिके रहे बल्कि उन्होंने करारे शाट जमाकर रन गति भी नहीं गिरने दी। इस बीच जब वह 16 रन पर थे तब सूरज रणदीव की गेंद पर कुलशेखरा ने उनका कैच छोड़ा। श्रीलंका को यह चूक महंगी पड़ी और गंभीर ने कोहली के साथ लगभग 15 ओवर में 83 रन और धोनी के साथ लगभग 20 ओवर में 109 रन की साझेदारी करके दबाव मिटा दिया।
कोहली ने जब बल्ले से ताकत दिखानी शुरू की थी तभी उनके आन ड्राइव को दिलशान ने अपनी ही गेंद पर डाइव लगाकर कैच में बदल दिया। कोहली ने 49 गेंद खेली और चार चौके लगाये। धोनी आते ही स्टंप आउट होने से बचे लेकिन इसके बाद उन्होंने ऐसी कोई गलती नहीं की।
गंभीर की अगुवाई में भारतीय बल्लेबाजों ने स्पिनरों का अच्छी तरह से सामना किया। मुथैया मुरलीधरन का जादू उन पर नहीं चला जबकि नुवान कुलशेखरा और तिसारा परेरा जैसे मध्यम गति के गेंदबाजों को पिच से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही थी। श्रीलंका को लचर क्षेत्ररक्षण की भी कीमत चुकानी पड़ी। संगकारा ने गेंदबाजी में लगातार बदलाव किए। वह बीच में मालिंगा को भी एक ओवर के लिए आक्रमण पर लाए लेकिन गंभीर या धोनी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। भारतीय कप्तान पीठ दर्द से भी परेशान दिखे लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और मुरलीधरन पर चौका जड़कर अपना अर्धशतक पूरा किया।
गंभीर जब शतक से केवल तीन रन दूर थे तब बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने दर्शकों के अति उत्साह में खुद को शामिल करके आगे बढ़कर स्लाग शाट खेलना चाहा लेकिन वह चूककर बोल्ड हो गए। उन्होंने 122 गेंद खेली और नौ चौके लगाए। इस तरह से फाइनल में पहली बार दो शतक बनने का रिकार्ड नहीं बना।
धोनी के साथ अब प्लेयर आफ द टूर्नामेंट युवराज सिंह (नाबाद 21) थे और उनके सामने स्लाग ओवरों के कातिल मालिंगा की भी नहीं चली। भारत को जब 18 गेंद पर 16 रन चाहिए थे तब धोनी ने मालिंगा पर दो चौके जड़ने के बाद कुलशेखरा पर लांग आन पर छक्का जमाकर वानखेड़े को शोर के आगोश में डुबो दिया। धोनी ने 79 गेंद खेली तथा आठ चौके और दो छक्के लगाए।
टॉस को लेकर बने असमंजस में संगकारा जब सिक्के की उछाल में सफल रहे तो उन्होंने पहले बल्लेबाजी ली। विश्व कप फाइनल में इससे पहले दस में से आठ अवसरों पर लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम पराजित हुई थी। मैच के शुरू में जहीर का जलवा देखने को मिला। उन्होंने अपने पहले पांच ओवर में छह रन देकर एक विकेट लिया लेकिन अंतिम पांच ओवर में वह 54 रन दे गए।
जहीर के पहले तीन ओवर मेडन थे। उन्होंने 19वीं गेंद पर फार्म में चल रहे उपुल थरांगा को सहवाग के हाथों कैच कराकर पवेलियन भेजा। इसके बाद हरभजन की लूप लेती गेंद पर दिलशान ने स्वीप करने के प्रयास में चूककर बोल्ड हो गए। संगकारा और जयवर्धने के बीच जब 11 ओवर में 62 रन की साझेदारी हो गई थी तब इस टूर्नामेंट में भारत के ट्रंप कार्ड युवराज ने वानखेड़े स्टेडियम में जोश भरा। संगकारा ने उन पर दो रन लिए, चौका जड़ा लेकिन आखिर में कट करने के प्रयास में विकेट के पीछे धोनी को कैच थमा गए।
जयवर्धने ने बाद में तिलन समरवीरा के साथ 57 रन जोड़े। युवराज ने समरवीरा को पगबाधा आउट करके यह साझेदारी तोड़ी। साइमन टफेल ने उनकी अपील हालांकि ठुकरा दी थी लेकिन रेफरल भारत के पक्ष में रहा था। युवराज ने 49 रन देकर दो विकेट लिए। वह टूर्नामेंट में कुल 15 विकेट लेने में सफल रहे।
जहीर ने चमारा कापुगेदारा आउट करके टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट (21) लेने में शाहिद अफरीदी की बराबरी की। जयवर्धने और कुलशेखरा लगभग आठ ओवर में 66 रन जोड़ दिए। जहीर ने अंतिम दो ओवर में 35 रन दिए। कुलशेखरा ने 48वें ओवर में उन पर पारी का पहला छक्का जड़ा जबकि जयवर्धने ने लगातार दो चौके जड़कर विश्व कप में तीसरा और वनडे में 14वां शतक पूरा किया। तिसारा परेरा ने आखिर में नौ गेंद पर नाबाद 22 रन ठोके।
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टीम इंडिया ने देर रात तक जश्न नहीं
मुंबई. भारतीय टीम ने क्रिकेट विश्व कप खिताब जीतने के बाद देर रात तक उधम भरी पार्टी नहीं की क्योंकि यह जश्न उनके लिए भावनाओं से भरा था जिसमें कुछ खिलाड़ियों का परिवार भी यहां मौजूद था। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का लगाकर ज्यों ही टीम को जीत दिलाई तो वानखेड़े स्टेडियम में खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और एक दूसरे को गले लगाने लगे।
28 साल बाद आए इस अविश्वसनीय क्षण को कुछ ने सहेजने के लिए स्टंप उखाड़ लिए और फिर भावनाओं का उद्गार आसुंओं से भी हुआ। मैदान पर जीत का जश्न मनाने और पुरस्कार समारोह वितरण के बाद जश्न सिर्फ ड्रेसिंग रूम तक ही सीमित रहा जिसमें शैंपेन की बोतलें खोली गई और सभी खिलाड़ियों को इसमें भिगो दिया गया। इसके अलावा खिलाड़ियों ने ड्रेसिंग रूप में रात का खाना खाया और शैंपेन पी, लेकिन टीम के होटल में किसी भी तरह का जश्न नहीं मनाया गया। टीम मैनेजर रंजीब बिस्वाल ने कहा, 'टीम होटल में किसी भी तरह का विशेष जश्न नहीं मनाया गया क्योंकि यह काफी भरा हुआ था। खिलाड़ी अपने कमरों में चले गए।'
बिस्वाल ने कहा कि ज्यादातर जश्न सिर्फ स्टेडियम तक ही सीमित रहा। उन्होंने कहा, 'यह खिलाड़ियों के लिए काफी भावुक क्षण था। इसे हासिल करने के लिए उन्होंने काफी कड़ी मेहनत की है इसलिए यह उनके लिए विशेष था।' बिस्वाल ने कहा, 'ड्रेसिंग रूम में काफी खिलाड़ियों की आंखों में आंसू थे। वे काफी खुश थे। उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया और इस क्षण का लुत्फ उठाया। इसमें काफी शैंपेन भी खोली गई। उन्होंने फोटो भी लिए।'
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धोनी बहुत बुद्धिमान और
चतुर कप्तान है : संगकारा
मुंबई. श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा ने क्रिकेट विश्व कप फाइनल में महेंद्र सिंह धोनी की टीम से मिली शिकस्त के बाद कहा कि भारत का बल्लेबाजी क्रम इतना मजबूत है कि 300 रन का स्कोर भी जीत के लिए पर्याप्त नहीं होता।
संगकारा ने कहा कि जब आपका बल्लेबाजी क्रम इतना शानदार हो तो जीत के लिए 300 रन भी काफी नहीं होते। उन्होंने कहा कि उनकी (भारत) बल्लेबाजी अविश्वसनीय है, जो वनडे क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ है। महेंद्र सिंह धोनी बहुत बुद्धिमान और चालाक कप्तान हैं।
संगकारा ने बीती रात मैच के बाद कहा कि बाएं हाथ मैंने जो भी बल्लेबाज देखे हैं, उसमें गंभीर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने विराट कोहली के साथ मिलकर साझेदारी की। महेंद्र सिंह धोनी जानते थे कि क्या करना चाहिए।
यह पूछने पर कि टॉस को लेकर क्या भ्रम हुआ था तो उन्होंने कहा कि किसी ने भी अपनी पसंद नहीं बोली थी। उन्होंने कहा कि किसी ने भी अपनी पंसद नहीं बोली थी। धोनी ने सोचा कि मैं हार गया जबकि हम दोनों टॉस जीतना चाहते थे।
संगकारा ने स्वीकार किया कि श्रीलंकाई टीम ने शुरू में वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर को आउट करने के बावजूद मौका गंवा दिया। उन्होंने कहा कि जब हमें पहले दो विकेट मिल गए थे, उसके बाद हम अच्छी गेंदबाजी नहीं कर पाए। महेंद्र सिंह धोनी क्रीज पर जम गए।
संगकारा ने कहा कि पूरे मैच के दौरान पिच काफी अच्छी थी। पारी के बीच में यह थोड़ी टर्न कर रही थी। हम उन्हें ज्यादा परेशान नहीं कर पाए। जहां तक स्पिन की बात है मुरली हमारा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज हैं। वह गेंद टर्न कर रहा था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने 18वें या 19वें ओवर में 100 रन बना लिए, हम समझ गए थे कि वे अच्छा प्रयास कर रहे हैं। इसी समय हमें उन पर थोड़ा दबाव बनाना चाहिए था, लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाए। अंजता मेंडिस की जगह सूरज रणदीव को शामिल करना फायदेमंद नहीं हुआ लेकिन श्रीलंकाई कप्तान ने कहा कि भारत के खिलाफ रणदीव के शानदार रिकार्ड को देखते हुए उसे अंतिम एकादश में शामिल किया गया। संगकारा ने कहा कि हम मेंडिस के विकल्प के बारे में सोच रहे थे। हमें एंजलो मैथ्यूज के कारण क्रम में बदलाव करने पर बाध्य होना पड़ा। रणदीव ने भारत के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया है। श्रीलंका ने 1996 की विश्व कप खिताब जीता था। संगकारा ने कहा कि मैथ्यूज का बाहर होना हमारे लिए बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में करारा झटका था लेकिन इसके बारे में हम कुछ नहीं कर सकते।
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फफक पड़े युवराज-भज्जी
सचिन को कंधे पर घुमाया
मुंबई. सचिन तेंदुलकर के लिए विश्व कप जीतने का वादा करने वाली टीम इंडिया ने जब श्रीलंका को फाइनल में हराकर इसे पूरा किया तो खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और इस चैम्पियन बल्लेबाज को कंधे पर बिठाकर टीम इंडिया ने वानखेड़े स्टेडियम का चक्कर लगाया।
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का लगाकर ज्यों ही टीम को जीत दिलाई, दूसरे छोर पर उनके साथ खड़े युवराज सिंह दौड़कर उनके गले मिले और फफक पड़े। ड्रेसिंग रूम में बैठे तमाम भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर दौड़कर युवराज और धोनी को गले लगा लिया। हरभजन सिंह हो या सचिन तेंदुलकर या फिर पहला विश्व कप खेल रहे विराट कोहली, सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे।
युसूफ पठान, सुरेश रैना और विराट कोहली ने मिलकर सचिन को कंधे पर उठा लिया और पूरी टीम ने सचिन सचिन चिल्लाते हुए वानखेड़े स्टेडियम का चक्कर लगाया। विराट ने कहा कि इस चैम्पियन खिलाड़ी ने 21 साल तक देश की उम्मीदों का बोझ उठाया है और आज हमारी बारी थी उन्हें कंधे पर उठाकर सम्मान देने की।
फाइनल में 97 रन की मैच जिताऊ पारी खेलने वाले गौतम गंभीर ने कहा कि हम सभी की आंखों में खुशी के आंसू हैं। हमने 2007 विश्व कप में खराब खेला था लेकिन आज जीतने का सपना सच हो गया।
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सचिन के लिए विश्वकप
जीतना चाहता था : युवी 
मुंबई. भारत की खिताबी जीत के सूत्रधार रहे मैन आफ द टूर्नामेंट युवराज सिंह ने खुलासा किया कि वह सचिन तेंदुलकर के लिए विश्व कप जीतना चाहते थे।
फाइनल मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में युवराज ने कहा कि मुझे खेद है कि मैं आपको निराश कर रहा हूं। मैं अपनी गर्लफ्रेंड के लिए नहीं बल्कि सचिन तेंदुलकर के लिए विश्व कप जीतना चाहता था। युवराज ने अहमदाबाद में क्वार्टर फाइनल मैच में आस्ट्रेलिया पर टीम को जीत दिलाने के बाद कहा था कि वह किसी खास व्यक्ति के लिए विश्व कप जीतना चाहते हैं और फाइनल के बाद ही उसका खुलासा करेंगे। युवराज ने पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और मौजूदा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को संकट के दौर में उनका साथ देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जब मैंने अपना कैरियर शुरू किया तब सौरव कप्तान थे और उन्होंने मेरा खूब साथ दिया। जब मैंने उतार चढ़ाव देखे तो माही ने मेरा साथ दिया। माही बेहतरीन कप्तान है और जिसे जो भी छूता है, वह सोना बन जाता है। सौरव और धोनी ने मेरा खूब साथ दिया। युवराज ने कहा कि पिछले साल मैं चोट और खराब फार्म से जूझता रहा। रणजी मैचों के दम पर मैंने वापसी की और सही समय में फार्म में लौटा। नौ मैचों में 369 रन बनाने और 15 विकेट लेने वाले युवराज ने कहा कि खराब दौर में मिली आलोचना से वह हैरान नहीं थे। उन्होंने कहा कि आलोचना भी खेल का हिस्सा है। अच्छा नहीं खेलने पर इसे झेलना पड़ता है। अब हम जीत गए हैं तो आलोचना नहीं होगी।
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विश्व कप में दिखा बदला हुआ युवराज
मुंबई. पिछले साल ही भारतीय टीम से बाहर किए गए युवराज सिंह विश्व कप में भारत के सफल अभियान में पूरी तरह से बदले हुए से नजर आए। इस क्रिकेट महाकुंभ में पंजाब के इस खिलाड़ी का वह अंदाज देखने को मिला जिसके कारण उन्हें भारतीय टीम का मैच विजेता कहा जाता है।
भारत की जीत के बाद युवराज भावुक हो गए थे और वानखेड़े स्टेडियम में 33 हजार दर्शकों और टेलीविजन पर देख रहे करोड़ों लोगों के सामने फफक-फफक कर रो पड़े थे। युवराज ने कहा कि जीत के बाद भावनाओं पर काबू पाना मुश्किल था और पहली बार उनकी आंखों में आंसू आए। उन्होंने इस क्षण को टीम के लिए सपना सच होने जैसा बताया।
युवराज ने कहा कि शायद पहली बार मेरी आंखों में आंसू आए। मेरी आंखों में इसलिए आंसू आए क्योंकि सभी की आंखें भरी हुई थी। इस आलराउंडर ने टूर्नामेंट में 369 रन बनाने के अलावा 15 विकेट भी लिए। उन्होंने कहा कि वह सचिन तेंदुलकर के लिए यह टूर्नामेंट जीतना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि मैं यह टूर्नामेंट उनके लिए जीतना चाहता था क्योंकि उन्होंने भारतीय क्रिकेट में जितना योगदान दिया है उतना किसी ने नहीं दिया है। उनकी उपलब्धियां बेमिसाल है। मैं हमेशा भगवान से प्रार्थना करता था कि उनके संन्यास लेने से पहले भारत विश्व कप जीत जाए।
बाएं हाथ के इस बल्लेबाज का भाग्य तेजी से बदला क्योंकि कुछ महीने पहले ही खराब फार्म के कारण उन पर उंगलियां उठ रही थी। वह वनडे टीम के नियमित सदस्य रहे लेकिन कभी टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए जिसके बारे में उनका कहना है कि यह किसी भी क्रिकेटर का सपना होता है।
पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के संन्यास के बाद युवराज को टेस्ट टीम में जगह पक्की करने का मौका मिला लेकिन वह इस मौके का फायदा नहीं उठा पाए। युवराज टेस्ट टीम से अंदर बाहर होते रहे और आखिर में पिछले साल अक्टूबर में आस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। यहां तक कि उन्हें जून में एशिया कप की एकदिवसीय टीम में भी नहीं चुना गया।
उन्होंने कहा कि टवेंटी20 विश्व कप में हार के बाद मेरी काफी आलोचना हुई। सात आठ साल बाद भारतीय टीम से बाहर होना मेरे लिए बड़ा झटका था। इसके बाद ही मैंने बेहतर करने की सोची और अतिरिक्त मेहनत करनी शुरू की विश्व कप से पहले तक युवराज चोट और खराब फार्म से जूझते रहे और उन्होंने स्वीकार किया कि टूर्नामेंट से पहले वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फार्म में नहीं थे।
उन्होंने कहा कि वास्तव में मैं अपनी सर्वश्रेष्ठ फार्म में नहीं था। मैं धीरे-धीरे फार्म में लौटा। मैंने अच्छी गेंदबाजी, अच्छी बल्लेबाजी और अच्छा क्षेत्ररक्षण करना शुरू किया। पिछले साल से वास्तव में मैंने अपने खेल पर बहुत काम किया। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं इतना चोटिल क्यों हो रहा हूं।
युवराज ने कहा कि वह मेरे लिए मुश्किल दौर था। यह पिछले दस साल में मेरे लिए सबसे मुश्किल दौर था। तब ऐसा भी समय आया जब मैंने खुद से पूछा कि क्या मुझे खेलना जारी रखना चाहिए। मैंने गंभीरता से यह सोचना शुरू कर दिया कि क्या मैं आगे खेलना चाहता हूं या नहीं। मैं बहुत नकारात्मक बातें सोच रहा था।
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ट्विटर पर विजेता भारतीय

टीम को बधाईयों का तांता
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के 28 साल बाद दोबारा विश्व कप ट्राफी जीतने के बाद बालीवुड की मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, क्रिकेट प्रशासकों और खिलाड़ियों की बधाईयों का तांता लग गया है।
महान स्पिनर शेन वार्न और अन्य खिलाड़ी जैसे महेश भूपति, सानिया मिर्जा, राज्यवर्धन राठौड़, करुण चंडोक से लेकर खेल मंत्री अजय माकन, बालीवुड तारिका शिल्पा शेट्टी सभी ने टीम इंडिया की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए टि्वटर पर बधाई दी।
बीती रात सह मेजबान भारत ने मुंबई में वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को छह विकेट से हरा दिया, जिसके बाद देश के सभी राज्यों की सड़कों पर जश्न के अलग-अलग तरीके अपनाए गए और माइक्रो ब्लागिंब वेबसाइट पर बधाईयों की कतार लग गई।
खेल मंत्री अजय माकन ने टि्वट किया, धोनी और टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत जीत का हकदार था। वार्न ने भारतीय टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत को एक बार और बधाई हो। आईपीएल चार का राजस्थान रायल्स का पहला ट्रेनिंग सत्र आज शुरू होगा। खिलाड़ियों ने शायद नींद पूरी नहीं की।
वार्न ने लिखा कि दोनों टीमों को शानदार टूर्नामेंट और बेहतरीन फाइनल के लिए बधाई। भारतीय टीम ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और खिताब जीता। इसका लुत्फ उठाओ। आईपीएल टीम राजस्थान रायल्स की सह मालिक शिल्पा शेट्टी ने लिखा कि सड़कों पर जश्न देखा जाना चाहिए और इस पर विश्वास करना चाहिए। भारत जश्न मना रहा है और यह इसका सबूत है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा।
उन्होंने लिखा कि इतिहास रच गया। अद्भुत क्षण जो हमेशा के लिए हमारे दिमाग पर चिन्हित हो गया। बधाई हो टीम इंडिया। हमारा सपना सच कर हमें खुशी से रोने पर मजबूर कर दिया। आईपीएल के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी ने भी भारतीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि शानदार समापन। सर्वश्रेष्ठ टीम जीती। चारों ओर बढ़िया क्रिकेट। दुनिया के क्रिकेट प्रेमी इसकी प्रशंसा कर रहे हैं। निश्चित रूप से क्रिकेट ने पैर पसारे। भारतीय टीम अद्भुत।
मोदी ने लिखा कि एमएसडी भारत के लिए शानदार कप्तान हैं। वह लगातार प्रदर्शन कर रहा है। उन्हें बधाई। मेरे दोस्त युवी को मैन आफ द टूर्नामेंट के लिए बधाई। वह हमेशा की तरह बेहतरीन था और इसका हकदार था। उन्होंने श्रीलंकाई टीम को भी बधाई दी जो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
अनुभवी टेनिस खिलाड़ी भूपति ने लिखा कि इस जीत को शब्द बयां नहीं कर सके। दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम। अद्भुत प्रयास। हम भी जश्न का हिस्सा होने के लिए निकल पड़े।
सानिया मिर्जा ने लिखा कि टीम इंडिया और सभी खिलाड़ियों को जीत के लिए बधाई। तुम लोगों ने अरबों लोगों को गर्व महसूस कराया और उनके चेहरों पर मुस्कान लाए। धन्यवाद टीम इंडिया। गॉड ब्लैस यू।
उन्होंने टि्वट किया कि सचिन कितने महान हैं इस अहसास को बयां नहीं किया जा सकता। भारतीय होकर काफी गर्व महसूस कर रही हैं, जैसा इस समय आप महसूस कर रहे हैं।
ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले निशानेबाज राठौड़ ने कहा कि बधाई हो टीम इंडिया। श्रीलंका ने अच्छा खेल दिखाया लेकिन आप पड़ोसी टीम से सर्वश्रेष्ठ थे। फार्मूला वन ड्राइवर चंडोक ने टि्वट किया, याहा...कितना शानदार अंत।
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सचिन, जहीर और युवराज आईसीसी
टीम ऑफ द टूर्नामेंट में
नई दिल्ली. भारत की विश्व कप जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और जहीर खान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की टूर्नामेंट की टीम में शामिल किया गया है।
कुमार संगकारा को इस 12 सदस्यीय टीम का कप्तान चुना गया है जिसमें श्रीलंका के महेला जयवर्धने, तिलकरत्ने दिलशान और मुथैया मुरलीधरन भी शामिल हैं। फाइनल के मैन ऑफ द मैच रहे महेंद्र सिंह धोनी हालांकि इस टीम में जगह नहीं बना पाए।
आईसीसी की मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार इस टीम को विशेषज्ञों के समूह ने चुना है जिन्हें उपमहाद्वीप की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर टूर्नामेंट के प्रदर्शन के आधार पर टीम चुनने के लिए कहा गया था। आंकड़ों पर ध्यान दिया गया, लेकिन केवल वही चयन के आधार नहीं थे।
पाकिस्तान के एकमात्र खिलाड़ी कप्तान शाहिद अफरीदी जबकि दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स और डेल स्टेन को इस टीम में जगह मिली है। ऑस्ट्रेलिया से शेन वाटसन इस टीम में शामिल हैं जबकि न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज टिम साउथी को 12वां खिलाड़ी चुना गया है। इंग्लैंड का कोई भी खिलाड़ी इस टीम में नहीं है।
टूर्नामेंट की टीम इस प्रकार है
सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, जहीर खान (सभी भारत), तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगकारा (विकेटकीपर और कप्तान), महेला जयवर्धने, मुथैया मुरलीधरन (सभी श्रीलंका), एबी डिविलियर्स, डेल स्टेन (दोनों दक्षिण अफ्रीका), शेन वाटसन (ऑस्ट्रेलिया) शाहिद अफरीदी (पाकिस्तान)। 12वां खिलाड़ीः टिम साउथी (न्यूजीलैंड)।
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