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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Monday 4 July 2011

छत्तीसगढ़ की नैना ने नापी हिमालय की ऊंचाई

0 बचेंद्री पाल के नेतृत्व में हिमालय लांघने वाली छत्तीसगढ़ की पहली पर्वतारोही बनीं
00 सफल रहा टाटा स्टील का स्नोमैन ट्रेक अभियान

बचेंद्री पाल के साथ नैना धाकड़
रायपुर। मशहूर पर्वतारोही बचेन्द्री पाल के नेतृत्व में भारतीय महिलाओं के 11 सदस्यीय दल ने भूटान में स्नोमैन ट्रेक अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस दल में शामिल छत्तीसगढ़ की नैना धाकड़ ने भारतीय टीम के साथ सफलतापूर्वक हिमालय लांघा। इसके साथ ही नैना हिमालय लांघने वाली छत्तीसगढ़ की पहली महिला पर्वतारोही बन गईं। इस ट्रेक को विश्व का सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेक माना जाता है। पहली बार भारतीय महिलाओं के किसी दल को यह उपलब्धि हासिल हुई है।
स्नोमैन ट्रेक अभियान पर जाने वाले इस 11 सदस्यीय महिला दल युवा और अनुभव से लबरेज था। एक ओर जहां साहसी युवा महिलाएं शामिल थीं, वहीं दूसरी ओर उनकी हौसला अफजाई करने के लिए अनुभवी महिला पर्वतारोही भी शामिल थीं। पहली बार ट्रेकिंग पर जाने वाली युवा पर्वतारोहियों के इस टीम में छत्तीसगढ़ की नैना धाकड़ (21) एवं उत्तराखंड की राधा राणा (23) शामिल थीं। वहीं अनुभवी सदस्यों में चावला जागीरदार (गुजरात), वासुमती श्रीनिवासन (कर्नाटक) एवं विमला देवस्कर (महाराष्ट्र) शामिल थीं। दल के अन्य सदस्य लालमीत बिरुली एवं पायो मुर्मू (दोनों ही झारखंड के आदिवासी समुदाय से), चेतना साहू (पश्चिम बंगाल), पूस देवी (हिमाचल प्रदेश) एवं सर्वेश (दिल्ली) थीं। उल्लेखनीय है कि टाटा स्टील के इस पर्वतारोही अभियान में जगदलपुर निवासी नैना धाकड़ पर जब टीएसआरडीएस के खेल प्रशिक्षक शंकर पटेल की नजर पड़ी तो उन्होंने उसका चयन किया और फिर आगे उसे प्रशिक्षण के लिए भेजा। 
स्नोमैन ट्रेक को दूरी और पहुंचने में कठिनाई की दृष्टि से विश्व के सबसे कठिन ट्रेकों में शुमार किया जाता है। यह अभियान 2 जून, 2011 को भूटान के पारो - ड्रकगाइल जोंग से शुरू हुआ और 27 जून, 2011 को सेफू में समाप्त हुआ। इस कठिन अभियान के दौरान महिला पर्वतारोहियों को सुदूर लुनाना जिले से गुजरना पड़ा और इस क्रम में 11 काफी ऊंचे दर्रों को पार करना पड़ा।
 

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