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Tuesday, 27 March, 2012

इस साल छत्तीसगढ़ को घरेलू मैचों की मेजबानी तय


0 बीसीसीआई की उम्मीदों पर खरे उतरा छग क्रिकेट संघ
0 प्रदेश संघ अब तक बोर्ड के कई टूर्नामेंटों का सफलतापूर्वक आयोजन कर चुका

शंकर चंद्राकर 

रायपुर। छत्तीसगढ़ को इस साल बीसीसीआई के घरेलू टूर्नामेंटों के मैच की मेजबानी मिलना अब तय हो चुका है। बीसीसीआई के आला अफसर भी छत्तीसगढ़ को घरेलू मैचों की मेजबानी देने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। घरेलू मैचों की मेजबानी मिलने के बाद अब छत्तीसगढ़ भी बीसीसीआई के फ्रंट स्टेट में आ जाएगा।
अब तक उपेक्षित रहा छत्तीसगढ़ एसोसिएट मेंबर मिलने के बाद बीसीसीआई की नजरों में आ गया है। बोर्ड ने भी यहांॅ के क्रिकेट कल्चर व लोकप्रियता को देखते हुए अपना फोकस छत्तीसगढ़ पर कर दिया है। प्रदेश क्रिकेट संघ ने हाल ही में स्पिन व तेज गेंदबाजों की खोज के लिए यहां रॉ-टैलेंट अभियान का सफल आयोजन कर बीसीसीआई को संतुष्ट कर दिया। बीसीसीआई अब पूरी तरह आश्वस्त हो चुका है कि छत्तीसगढ़ बड़े टूर्नामेंटों का आयोजन भी सफलतापूर्वक कर सकता है। यही कारण है कि जब बोर्ड ने देशभर में गेंदबाजों की खोज के लिए अभियान चलाया तो इसकी मेजबानी के लिए चार राज्यों में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ को चुना। इस पूरे अभियान में बाकी अन्य तीनों राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व झारखंड के मुकाबले यहां ट्रायल में सबसे ज्यादा रिकार्ड 1790 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसमें छत्तीसगढ़ के 1483 खिलाड़ी शामिल हुए। ट्रायल लेने आए पूर्व क्रिकेटर व एनएसीए के डायरेक्टर (क्रिकेट आपरेशन) संदीप पाटिल ने सिर्फ छह खिलाड़ियों का चयन किया, जिसमें एक लेग स्पिनर छत्तीसगढ़ के मोहन सोनी भी शामिल हैं। इसके पूर्व भी छत्तीसगढ़ बीसीसीआई के अंडर-22, 19 व 16 एसोसिएट ट्राफी की सफलतापूर्वक मेजबानी कर चुका है।
छत्तीसगढ़ का नाम तय
सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई जुलाई में घरेलू टूर्नामेंटों के आयोजन के लिए सूची तैयार करेगा तो उसमें कुछ मैचों की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ का नाम लगभग तय कर लिया है। छत्तीसगढ़ को इस साल घरेलू टूर्नामेंटों के दो-तीन मैचों की मेजबानी मिलना निश्चित है। 
स्टेडियम के पूरे होने का इंतजार
छत्तीसगढ़ में किसी भी घरेलू या बड़े टूर्नामेंटों के आयोजन में स्टेडियम का अधूरा होना सबसे बड़ा रोड़ा है। अभी स्टेडियम में अधूरे काम का निर्माण तेजी से चल रहा है। आयोजन के बहाने हर बार बीसीसीआई के पदाधिकारी रायपुर आते हैं और वे स्टेडियम का मुआयना भी करते हैं। सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई को भी स्टेडियम के पूर्ण होने का इंतजार है।
अगले साल रणजी की मान्यता
छत्तीसगढ़ को वर्ष 2008 में एसोसिएट मेंबर की मान्यता मिली थी। बीसीसीआई के नियमानुसार पांच साल बाद ही किसी राज्य को उनके प्रदर्शन के आधार पर रणजी की मान्यता मिलना है। वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ मेंबरशिप मिलने का पांॅच साल पूरा हो जाएगा। इस हिसाब से अगले साल छत्तीसगढ़ को रणजी की मान्यता मिलना भी तय है, क्योंकि अब तक छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन शानदार रहा है और छत्तीसगढ़ अंडर-22 वर्ग में चैंपियन बनकर प्लेट ग्रुप में पहुंच चुका है। साथ ही अंडर-19 व 16 में भी चैंपियन बन चुका है। 
हर स्तर पर बोर्ड संतुष्ट : दवे 

 छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे का कहना है कि प्रदेश संघ ने हर स्तर पर बीसीसीआई को संतुष्ट किया है। हमारे खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है और तीनों वर्गों में एसोसिएट ट्राफी जीती है। महिला टीम भी इस साल चैंपियन बनी। छत्तीसगढ़ तीनों वर्गों की एसोसिएट ट्राफी की सफलतापूर्वक मेजबानी भी कर चुका है। बोर्ड के अधिकारी हर बार यहांॅ से संतुष्ट होकर गए हैं। इस साल हमें घरेलू टूर्नामेंटों की मेजबानी मिलना तय है और अगले साल छत्तीसगढ़ को रणजी की मान्यता मिलने की पूरी उम्मीद है।

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