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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Wednesday 30 November 2011

एक अरब के स्टेडियम को लगी दीमक

0 उद्घाटन के तीन साल बाद भी अधूरा
0 पैवेलियन के कांच व टाइल्स टूट-फूट रहे
0 मैदान व पिच पर जगह-जगह दीमक
0 स्टेडियम लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर पर अधूरे काम शुरू नहीं
 

शंकर चंद्राकर
रायपुर। नई राजधानी की शान व एक अरब रुपए से भी अधिक की लागत से बने प्रदेश के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को दीमक खा रही है। उद्घाटन के तीन साल बाद भी स्टेडियम अभी तक अधूरा ही है। अभी भी इसमें एसी, जनरेटर, कार्पोरेट बाक्स, कुर्सी लगाने समेत कई काम बचे हुए हैं। स्टेडियम के मैदान व पिच पर जगह-जगह दीमक की बांबी बन गई है। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने स्टेडियम को लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर कर दिया है, लेकिन बाकी बचे कामों पर विभाग अभी तक ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में यहाँ अंतरराष्ट्रीय मैच के बारे में सोचना अभी सपना ही है।
उद्घाटन के बाद इन तीन सालों में स्टेडियम में अभी तक तकरीबन 200 मैच खेले जा चुके हैं। इनमें छत्तीसगढ़ और कनाडा के बीच खेले गए अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच, विभिन्ना आयु वर्ग के बीसीसीआई एसोसिएट ट्राफी व घरेलू मैच शामिल हैं। स्टेडियम के ग्राउंड व पिच के रखरखाव की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने ली है। क्रिकेट संघ ने अपने खर्चे पर वहां छह कर्मचारी नियुक्त किया है, जो किसी तरह ग्राउंड का मेटेनेंस करते हैं। इसके बावजूद मैदान की हालत खराब है। दीमक ने पिच को भी नहीं छोड़ा है।
ग्राउंडमैन का कहना है कि अभी मैच नहीं होने के कारण पानी का छिड़काव नहीं किया गया, इस कारण कई जगह पर दीमक लग गई है। अब जहां-जहां दीमक लगी है, वहां पर नई मिट्टी डालकर कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। मैच के अनुसार पिच का मेंटेनेंस किया जाता है। चूंकि यहां पर नौ पिच हैं, जिस पर मैच होना होता है, उसी पिच पर ध्यान दिया जाता है। इस कारण अन्य पिच पर कहीं-कहीं दीमक लग गई है। उसे ठीक कर लिया जाएगा। 
पैवेलियन के कांच टूटे
मैदान के अलावा पैवेलियन के सामने और प्रवेश द्वार पर लगे कीमती कांच टूट गए हैं। इसके अलावा पैवेलियन के सामने कई जगहों पर टाइल्स भी उखड़ चुकी है। पैवेलियन में लगी कुर्सी भी कई जगह उखड़ गई है। यही हाल अन्य जगहों पर भी है।





एसी, कुर्सी व जनरेटर का काम बचा
स्टेडियम में अभी एयरकंडीशन, कुर्सी लगाने, जनरेटर का काम बचा है। कार्पोरेट बाक्स भी अधूरा है। मेंटेनेंस के अभाव में स्टेडियम के दर्शक दीर्घा समेत अन्य स्थानों पर कचरे का ढेर है। इसके अलावा पैवेलियन में मीडिया गैलरी, अंपायर, डोप रुम समेत अन्य बेसिक सुविधाएं डेवलप करना बाकी है।
आगे का काम पीडब्ल्यूडी के जिम्मे
इस संबंध छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे का कहना है कि ग्राउंड मेंटेनेंस की जिम्मेदारी क्रिकेट संघ ने ली है। वहां छह कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। प्रदेश संघ हर माह कर्मचारियों के वेतन व ग्राउंड के मेंटेनेंस पर करीब 50 हजार रुपए खर्च कर रहा है। स्टेडियम का जो भी अधूरा काम है, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टेडियम के अधूरे काम के लिए पांच करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिया है। इसके लिए विभाग ने संघ से जरूरी काम करवाने के लिए सूची मांगी थी। संघ ने उसकी सूची भी पीडब्ल्यूडी विभाग को दे दी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
स्टेडियम पूरा हो तो जगेगी उम्मीद
श्री दवे ने कहा कि प्रदेश संघ को 2013 में बीसीसीआई से पूर्ण मान्यता मिलना तय है। यदि इसके पूर्व ही स्टेडियम का अधूरा काम पूरा हो जाता है तो बोर्ड से यहां रणजी, दिलीप ट्राफी जैसे महत्वपूर्ण घरेलू टूर्नामेंट के सेमीफाइनल-फाइनल मैच मांगने का प्रयास किया जाएगा। प्रथम श्रेणी मैच के लिए भी स्टेडियम की सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मापदंड के अनुरूप होना जरूरी है। संघ अपनी ओर से पूरी तरह तैयार है।



एक साल में पूरा हो जाएगा काम
'काम शुरू हो गया हो गया है। खेल विभाग के निर्देशानुसार काम किया जाएगा। स्टेडियम के सभी अधूरे कार्य एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है। जैसे-जैसे शासन से पैसा स्वीकृत होगा, वैसे ही काम होता जाएगा। अभी स्टेडियम के चारों ओर सड़क बनाने का काम चल रहा है।"
- बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री लोक निर्माण विभाग।
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स्टेडियम एक नजर
स्थित : ग्राम परसदा, नई राजधानी क्षेत्र।
क्षेत्रफल : 50 एकड़।
उद्घाटन : 11 सितंबर, 2008 को।
इनफील्ड ग्राउंड : 90 गज यार्ड, जो आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न स्टेडियम के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्टेडियम।
अनुमानित लागत : 98.45 करोड़ रुपए। अभी करोड़ों के काम बाकी।
दर्शक क्षमता : 60 हजार से अधिक।
पार्किंग व्यवस्था : 6000 चारपहिया वाहन, अलग से मोटरसाइकिल व साइकिल स्टैंड।
परिवहन व्यवस्था : हावड़ा-मुंबई राष्ट्रीय मार्ग क्र.-6,
रायपुर-भुवनेश्वर-पुरी रेलमार्ग, माना विमानतल, स्टेडियम के पास हेलीपैड।
पिच : 9 मैच पिच, 3 अभ्यास पिच।
सिंचाई व्यवस्था : स्वचलित स्प्रिंकलर।
कार्पोरेट बाक्स : 40 बाक्स।
स्कोरबोर्ड : इलेक्ट्रानिक लाइट।
फ्लड लाइट : 6 हाई मास्क लाइट।
म्यूजियम : क्रिकेट म्यूजियम बनाया जाएगा। म्यूजियम में छत्तीसगढ़ की
संस्कृति की झलक दिखेगी, लेकिन अभी  बना नहीं।
टिकट प्लाजा : 11 प्लाजा।
रेस्टोरेंट : एक पांच सितारा स्तर की सर्वसुविधायुक्त रेस्टोरेंट की व्यवस्था।
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पूरी स्टोरी एक नज़र ......


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