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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Monday 27 June 2011

ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करना मुख्य लक्ष्य

0 अपनी पदोन्नाति स्वीकार करने आए अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ने कहा
रायपुर। प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग साई इंस्टीट्यूट पटियाला में वर्ल्ड चैंपियनशिप और लंदन ओलिंपिक की तैयारी के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। अपनी पदोन्नाति स्वीकार करने के लिए संक्षिप्त प्रवास पर रायपुर आए रुस्तम ने चर्चा के दौरान कहा कि उनका व भारतीय टीम का मुख्य लक्ष्य लंदन ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करना है।
रुस्तम ने बताया कि इस समय साई सेंटर पटियाला में भारतीय टीम में 24 खिलाड़ी वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हुए हैं। वे इस संभावित टीम में चुने गए छत्तीसगढ़ से एकमात्र खिलाड़ी हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप इस साल नवंबर में फ्रांस की राजधानी पेरिस में होगी। एक तरह से यह लंदन ओलिंपिक- 2012 के लिए क्वालीफाइंग टूर्नामेंट है। इसमें प्रदर्शन के आधार पर टॉप टेन देशों की टीम लंदन ओलिंपिक के लिए टिकट कटाएगी, इसलिए इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक से कहीं ज्यादा अलग-अलग वर्गों में प्वाइंट हासिल करना महत्वपूर्ण है। भारतीय टीम का चयन अगस्त के अंतिम या सितंबर के पहले सप्ताह में किया जाएगा। रुस्तम ने भारतीय टीम में अपने चयन के बारे में कहा कि वे 62 किग्रा वर्ग में खेलते हैं और उनकी कैटेगरी में चार खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस कैटेगरी से एक या दो खिलाड़ी का चयन होना है, इसलिए भारतीय टीम में उनका चयन प्रशिक्षण कैंप में प्रदर्शन के आधार पर ही निर्भर है।

टीम को मिलता है प्रवेश
रुस्तम ने बताया कि वेटलिफ्टिंग में किसी खिलाड़ी के व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय टीम को ओलिंपिक के लिए प्रवेश दिया जाता है। किसी देश की टीम में आठ पुरुष व सात महिला खिलाड़ी होते हैं। इनमें से दोनों वर्गों के पांॅच विशेष कैटेगरी में प्रदर्शन के आधार पर टीम को प्वाइंट दिया जाता है। इसी प्वाइंट के आधार पर बेस्ट टॉप टेन टीम को ओलिंपिक में जगह दी जाती है।

ओलिंपिक के लिए चयन जरूरी नहीं
रुस्तम ने बताया कि ओलिंपिक का क्वालीफाइंग टूर्नामेंट करीब साल-डेढ़ साल पहले होता है। इस कारण जिस खिलाड़ी ने क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया हो, उसका चयन इंडिया टीम में ओलिंपिक के लिए हो, जरूरी नहीं। सालभर के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले कई नए खिलाड़ी आ जाते हैं और उनका प्रदर्शन खराब रहा तो उन्हें भारतीय टीम से हटाया जा सकता है। खिलाड़ियों का ओलिंपिक में खेलना भारतीय वेटलिफ्टिंग फेडरेशन व खुद खिलाड़ी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
चोट से 80 फीसदी उबर गए हैं
रुस्तम ने बताया कि दिल्ली कामनवेल्थ गेम्स के दौरान वे घायल हो गए थे और अब  80 फीसदी ठीक हैं। पटियाला में वे साई के डॉक्टर से नियमित इलाज करवा रहे हैं। रायपुर के डॉक्टर से भी परामर्श लेते रहते हैं। रुस्तम ने उम्मीद जताई कि वर्ल्ड चैंपियनशिप तक वे पूरी तरह चोट से उबर जाएंॅगे।  

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