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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Tuesday 21 February 2012

डीजीएम का पुत्र मोह बीएसपी को महंगा पड़ा

0 बेटे को फाइनल में खिलाने की जिद
0 सीएम ट्रॉफी अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट में भिलाई विजेता घोषित
भिलाई/रायपुर। मुख्यमंत्री ट्रॉफी अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट जैसी प्रतिष्ठित स्पर्धा के फाइनल में रविवार को बीएसपी के डीजीएम स्पोर्ट्स महमूद हसन की मनमानी और पुत्र मोह टीम को ले डूबी। बेटे मोहतसिम हसन को मैच में नहीं खेलने देने पर डीजीएम ने मैच का ही बहिष्कार कर दिया। पूरे घटनाक्रम के बाद निर्णायकों ने भिलाई को वाकओवर देते हुए विजेता कर दिया। डीजीएम की जिद से अब बीएसपी के छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के टूर्नामेंट में खेलने को लेकर प्रश्न चिह्न लग गया है।
 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नाम पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने सीएम ट्रॉफी सीनियर अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया। स्पर्धा का फाइनल सेक्टर-10 बीएसपी क्रिकेट ग्राउंड में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और भिलाई क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के बीच खेला जाना था। छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने मैच के पूर्व ही स्पष्ट कर दिया था कि जो खिलाड़ी अन्य राज्यों में रजिस्टर्ड हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ से नहीं खेलने दिया जाएगा। यही नहीं ऐसे खिलाड़ियों के नाम भी सूचीबद्ध कर भेजा गया था। फाइनल मैच के अंपायर अतुल टॉक और मनोज तिवारी ने टॉस करने के पूर्व दोनों टीमों के खिलाड़ियों की अंतिम सूची मांगी, जो इस मैच में खेलने वाले थे। बीएसपी की सूची में मोहतसिम हसन का भी नाम था, जबकि बीसीए के भीमाराव, अभिषेक खरे और अभिषेक ताम्रकार का नाम सूचना मिलने के बाद खिलाड़ियों की सूची से नाम काट दिया गया था। अंपायर ने बीएसपी की ओर से मोहतसिम हसन के मैच में खेलने पर आपत्ति की और उन्हें टीम से हटाने की बात कही। इस पर बीएसपी के डीजीएम (स्पोर्ट्स) महमूद हसन अपने बेटे मोहतसिम को मैच खिलाने पर अड़ गए। श्री हसन पूर्व रणजी क्रिकेटर रह चुके हैं। इस मामले में उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि उनका बेटा मोहतसिम मैच में नहीं खेलेगा तो बीएसपी की टीम फाइनल में नहीं उतरेगी। एक तरह से धमकी भरे लहजे के कारण दोनों अंपायरों ने छग स्टेट क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे से दिशा-निर्देश मांगा। इसके बाद बीएसपी की टीम को मैदान में उतरने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया, लेकिन डीजीएम की हठधर्मिता से बीएसपी की टीम मैदान पर नहीं उतरी। खिलाड़ी चाहकर भी डीजीएम के निर्णय का विरोध नहीं कर सके, क्योंकि उन्हें चेतावनी मिल गई थी कि अपना मुंह बंद रखे। अंतत: मैच के अंपायरों ने सीएससीएस के मार्गदर्शन में भिलाई क्रिकेट एसोसिएशन को विजेता घोषित कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद 'नईदुनिया" ने जब डीजीएम श्री हसन से संपर्क साधा तो उनसे बात नहीं हो पाई।
बीएसपी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा : दवे
 इस मामले में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे ने कहा कि यह नियमों की अवहेलना और अनुशासनहीनता का मामला है। श्री दवे ने 'नईदुनिया" से चर्चा में कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र को चार दिन पहले ही ई-मेल के जरिए नियम की सूचना देते हुए खिलाड़ी का नाम भी स्पष्ट कर दिया था कि ये मैच नहीं खेलेंगे। उन्होंने कहा कि मोहतसिम हसन मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन से रजिस्टर्ड खिलाड़ी हैं जो इस वर्ष जबलपुर डिवीजन से खेले हैं। बीसीसीआई और सीएससीएस के नियमानुसार एक खिलाड़ी एक कैलेंडर वर्ष में एक ही स्टेट से खेल सकता है। चूंकि सीएम ट्रॉफी एक ऑफिशियल व प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है, इसलिए हम निर्धारित नियमों की कड़ाई से पालन कर रहे हैं। श्री दवे ने कहा कि इस मामले में बीएसपी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।




बीएसपी टीम को जारी होगी नोटिस
0 सीएम ट्राफी फाइनल मैच के बहिष्कार का मामला
0 छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर
0 नोटिस देकर जवाब-तलब किया जाएगा

रायपुर।
छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने सीएम ट्राफी सीनियर अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल मैच के बहिष्कार के मामले को गंभीरता ले लिया है। प्रदेश क्रिकेट संघ शीघ्र ही बीएसपी को नोटिस जारी कर मामले की जानकारी लेकर रिपोर्ट अनुशासन समिति को सौंपेगा।
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे ने कहा कि यह टूर्नामेंट पूरी तरह बीसीसीआई के मापदंडों के अनुरूप हुआ है और उनके नियमों की अवहेलना नहीं की जा सकती। यह मामला गंभीर है और इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश क्रिकेट संघ शीघ्र ही बीएसपी को नोटिस जारी कर उन्हें जवाब देने का मौका देगा। फिर इस मामले को संघ की अनुशासन समिति के सामने रखा जाएगा। अनुशासन समिति ही अंतिम कार्रवाई करेगी।
कोई भेदभाव नहीं : दवे
श्री दवे ने कहा कि टूर्नामेंट के आयोजन में कोई भेदभाव नहीं हुआ है। यह पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुआ है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही दूसरे राज्यों से रजिस्टर्ड खिलाड़ियों को नहीं खिलाने संबंधी निर्देश जारी कर दिया गया था। टूर्नामेंट के दौरान प्रदेश संघ को रायपुर, बीएसपी व भिलाई में दूसरे राज्यों से रजिस्टर्ड खिलाड़ियों के खेलने की शिकायत मिली थी। इस पर उक्त खिलाड़ियों की सूची समेत संबंधित जिला इकाइयों को टूर्नामेंट में नहीं खिलाने का निर्देश दे दिया गया था। सेमीफाइनल तक सभी जिला इकाइयों ने इसका पालन भी किया, लेकिन फाइनल में जानबूझकर बीएसपी टीम मध्यप्रदेश से रजिस्टर्ड खिलाड़ी मोहतसीम हसन को खिलाने पर अड़ गई। इस कारण मैच को वाकओवर करना पड़ा।
हमें मैच खेलने नहीं दिया : हसन
इस मामले में बीएसपी के डीजीएम (स्पोर्ट्स) मेहमूद हसन ने 'नईदुनिया" से चर्चा करते हुए कहा कि बीएसपी की टीम मैच खेलने के लिए तैयार थी, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए हमारी टीम को मैच खेलने ही नहीं दिया गया और भिलाई को वाकओवर देकर विजेता घोषित कर दिया गया। श्री हसन ने कहा कि टूर्नामेंट के दौरान प्रदेश क्रिकेट संघ का रवैया पूरी तरह भेदभावपूर्ण रहा। बीएसपी की टीम ने प्रदेश संघ के निर्देश का पूरी तरह पालन किया और दूसरे राज्य से रजिस्टर्ड अपने दो खिलाड़ी को सेमीफाइनल मैच नहीं खिलाया, लेकिन भिलाई व बिलासपुर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए दूसरे राज्यों के रजिस्टर्ड खिलाड़ियों को मैच खिलाया। नियम सभी के लिए एकसमान होना चाहिए। हमने इसका विरोध किया तो टीम को मैदान पर उतरने ही नहीं दिया गया।
क्या है नियम
संघ के सचिव श्री दवे के मुताबिक बीसीसीआई के नियमानुसार किसी एक कैलेंडर वर्ष में जो खिलाड़ी जिस राज्य से रजिस्टर्ड है, वह सिर्फ उसी राज्य से ही खेल सकता है। वह बोर्ड के कोई भी टूर्नामेंट में दूसरे राज्यों से नहीं खेल सकता।

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