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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Sunday 30 January 2011

जोकोविक बने आस्ट्रेलियन ओपन के बादशाह

मरे को हराकर पुरुष एकल खिताब पर किया कब्जा

मेलबोर्न. नोवाक जोकोविक ने बेहतरीन खेल का नजारा पेश करते हुए रविवार को एंडी मरे का 75 साल बाद ग्रैंड स्लैम विजेता ब्रिटिश खिलाड़ी बनने का सपना तोड़कर आस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट में पुरुष एकल के खिताब पर कब्जा जमा लिया।
दुनिया के नंबर तीन सबिर्याई जोकोविक ने खिताबी मुकाबले में मरे को लगातार सेट में 6-4, 6-2, 6-3 से हराकर अपना दूसरा ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया। इससे पहले उन्होंने 2008 म आस्ट्रेलियाई ओपन के रूप में ही पहला ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट जीता था। यह पिछले तीन साल में पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल था जिसमें रोजर फेडरर या राफेल नडाल में से कोई नहीं था। जोकोविक ने पांचवीं वरीय मरे पर शुरू से दबदबा बनाए रखा और आखिर में जीत की खुशी में अपनी हाफपैंट निकाल दी।
मरे इस हार से बेहद निराश थे क्योंकि तीसरी बार वह किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पराजित हुए हैं। इससे पहले भी दोनों अवसरों पर लगातार सेट में हार गए थे। ब्रिटेन के लिए फ्रेड पैरी ने आखिरी बार 1936 में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट जीता था और मरे की हार से ब्रिटिशवासियों को फिर से निराशा ही हाथ लगी। मरे हालांकि मैच में किसी भी समय खिताब जीतने की स्थिति में नहीं दिखे। जोकोविक ने उन पर शुरू से दबाव बना दिया और दो घंटे 39 मिनट तक चले मैच में आसान जीत दर्ज की। यह जोकोविक का लगातार दूसरा ग्रैंड स्लैम फाइनल था। वह पिछले साल अमेरिकी ओपन के फाइनल में नडाल से हार गए थे। दिलचस्प बात यह है कि 2007 में भी जब जोकोविक अमेरिकी ओपन में उप विजेता रहे तो उन्होंने इसके बाद आस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब जीता था। तब उन्होंने फ्रांसीसी जो विल्फ्रेड सोंगा को हराया था।
जोकोविक ने जीत के बाद कहा, 'मैं इस खिताब को अपने परिवार को समर्पित करता हूं। सर्बिया में हमारे लोगों के लिए यह समय मुश्किल भरा है लेकिन हम प्रत्येक दिन अपने देश को बेहतर तरीके से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और इसलिए यह मेरे देश के लिए है।' जोकोविक और मरे जब से जूनियर सर्किट में खेलते थे तभी से अच्छे मित्र हैं। यह ग्रैंड स्लैम में उनका पहला मुकाबला था। सर्बियाई खिलाड़ी ने कहा, 'हम लंबे समय से एक दूसरे को जानते हैं और उसके खिलाफ खेलना वास्तव में मुश्किल था। आशा है कि आपको (मरे) ग्रैंड स्लैम जीतने का अगला मौका मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आपके पास प्रतिभा है और आप यह मुकाम जरूर हासिल करोगे।' मरे ने बाद में कहा कि जोकोविक ने बेहतरीन खेल दिखाया और वह जीत का हकदार था। उन्होंने कहा, 'पिछले साल की तुलना में मेरा खेल अच्छा था लेकिन आज नोवाक ने अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन खेल का नजारा पेश किया। यह हार बहुत निराशाजनक है लेकिन आपको इसे स्वीकार करना होगा।' इस जीत के बावजूद जोकोविक दुनिया के तीसरे नंबर के ही खिलाड़ी बने रहेंगे। नडाल अभी एटीपी रैंकिंग में शीर्ष पर जबकि फेडरर दूसरे स्थान पर हैं। मरे की शुरुआत अपेक्षानुरूप नहीं रही और उनका पहला सर्विस गेम ही 14 मिनट तक चला जिसमें चार बार ड्यूस देखने को मिला।
 इस सेट में दोनों खिलाड़ियों ने नौवें गेम तक अपनी सर्विस बचाए रखी। मरे जब 4-5 से पीछे चल रहे थे तब उन्होंने दसवें गेम में डबल फाल्ट किया और फिर अपना बैकहैंड नेट पर मार दिया। जोकोविच ने यह सेट 59 मिनट में अपने नाम किया। जोकोविक को अगले दोनों सेट भी जीतने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

नेस्टर-कैटरीना को मिश्रित युगल का खिताब

कनाडा के डेनियल नेस्टर और स्लोवेनिया की कैटरीना स्रेबोत्निक की दूसरी वरीयता प्राप्त जोडी ने आस्ट्रेलिया के पाल हेनले और चीनी तोइपे की चान जुंग जान को आज यहां 6-3,  3-6,  10-7 से हराकर आस्ट्रेलियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट का मिश्रित युगल खिताब जीत लिया।
 नेस्टर और स्रेबोत्रिक ने राड लेवर एरेना में खेले गए इस खिताबी मुकाबले में पहला सेट जीतकर बढत बनाई लेकिन अगले सेट में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सुपर टाईब्रेक में नेस्टर और स्रेबोत्निक ने 10-7 से जीत दर्ज करते हुए खिताब पर कब्जा कर लिया।  स्रेबोत्रिक का यह आस्ट्रेलियन ओपन में पहला और कुल चौथा मिश्रित युगल ग्रैंड स्लेम खिताब है। उन्होंने दो बार सर्बिया के नेनाद जिमोनजिच के साथ ग्रैंड स्लेम जीता है। नेस्टर के साथ उन्होंने पहली बार कोई ग्रैंड स्लेम खिताब जीता है। नेस्टर ने एलेना लिखोवत्सेवा के साथ 2007 में यहां खिताब जीता था।

मां और पत्नी पर गुस्सा करते हैं सचिन

मुंबई. क्रिकेट के मैदान में हमेशा शांत रहने वाले 'किंग आफ क्रिकेट' सचिन तेंदुलकर को भी गुस्सा आता है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि यह खुद सचिन का कहना है। एक समारोह में सचिन ने खुद अपने जीवन का यह राज खोलते हुए बताया कि उन्हें भी गुस्सा आता है। वह अपना गुस्सा अपनी मां और पत्नी पर उतारते हैं। सचिन ने अपने भाई नितिन की कविताओं और अपने स्वगर्वासी पिता रमेश तेंदुलकर की मराठी कविताओं की सीडी रिलीज करने के बाद कहा कि उन्हें कभी-कभी क्रिकेट के मैदान पर भी गुस्सा आता है। उन्होंने कहा, 'आपको खेल के मैदान में अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना होता है क्योंकि आप वहां भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं। कई बार मैं अपना गुस्सा ड्रेसिंग रूम में निकालता हूं। कई बार ऐसा होता है जब कोई निर्णय आपके खिलाफ चला जाता है और आप मैच हार जाते हैं। यह कई बार हुआ है, मगर मैं उन अंपायरों के नाम नहीं लूंगा।' जब सचिन से पूछा गया कि क्या वे अपनी मां और पत्नी के गुस्से से डरते हैं। उन्होंने कहा वे लोग मेरे गुस्से से डरते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं मैदान पर गुस्सा नहीं होता। मगर अपना गुस्सा घर में निकालता हूं।' अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए सचिन भावुक हो गए।

जापान का रिकार्ड चौथी बार एशिया कप पर कब्जा

दोहा. स्थानापन्न तदानरी ली के अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ में किए गए शानदार गोल की बदौलत जापान ने शनिवार रात यहां खेले गए खिताबी मुकाबले में आस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर रिकार्ड चौथी बार एएफसी एशिया कप फुटबाल टूर्नामेंट पर कब्जा कर लिया।
 खलीफा स्टेडियम में लगभग 38000 हजार दर्शकों की मौजूदगी में खेले गए इस खिताबी मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर हुई और कोई भी टीम निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं कर पार्इं जिससे मैच अतिरिक्त समय में खिंच गया। हालांकि निर्धारित समय के दौरान जापानी खिलाडियों ने गेंद को अधिकांश समय तक अपने कब्जे में रखा लेकिन आस्ट्रेलियाई टीम ने गोल करने के बेहतर मौके बनाए। आस्ट्रेलिया के स्ट्राइकर हैरी केवेल के पास 71वें मिनट में गोल करने का बेहतरीन मौका था लेकिन उनका शाट सीधे ईजी कवाशिमा के हाथों में समा गया।  अपने स्टार मिडफील्डर शिंजी कगावा की गैरमौजूदगी में जापानी टीम को काफी संघर्ष करना पड़ा। टीम को 66वें मिनट में गोल करने का मौका मिला लेकिन शिंजी ओकाजाकी का हेडर गोलपोस्ट को नहीं भेद पाया। मैच के अतिरिक्त समय के पहले हाफ में भी कोई टीम गोल नहीं दाग पाई। लेकिन दूसरे हाफ के 109वें मिनट में ली ने गोल दागकर जापान को जीत दिला दी।
 इसके साथ ही जापान ने एशिया कप पर सर्वाधिक चार बार कब्जा करने का रिकार्ड बना लिया है। इससे पहले जापान ने 1992, 2000 और 2004 में इस खिताब को जीता था। तीन बार के चैंपियन जापान ने सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को पेनल्टी शूट आउट में 3-0 से शिकस्त दी थी।  जबकि आस्ट्रेलिया ने उजबेकिस्तान को 6-0 से रौंदकर खिताबी मुकाबला का टिकट कटाया था। दक्षिण कोरिया ने उजबेकिस्तान को 3-2 से हराकर टूर्नामेंट में तीसरा स्थान हासिल किया।

Saturday 29 January 2011

क्लिस्टर्स ने जीता ग्रैंड स्लेम

साल का पहला खिताब ‘सुपर मॉम’ के नाम, युगल में ब्रायन बंधु जीते

मेलबोर्न. पहले सेट में जिस तरह ली ना ने तेज तर्रार और सधी हुई शुरुआत की थी, उसे देख एक पल के लिए भी ऐसा नहीं लग नहीं रहा था कि क्लिस्टर्स वापसी कर पाएंगी। फिर भी क्लिस्टर्स ने शानदार वापसी करते हुए पहला सिंगल्स ग्रैंड स्लैम खिताब जीत ही लिया।
यह खिताब तब और पक्का हो गया जब नौवीं वरीय चीनी खिलाड़ी 28 बरस की ली ना ने तीसरी वरीय बेल्जियम की किम क्लिस्टर्स को पहले ही सेट में 3-6 से मात दे दी। इस सेट में ली का खेल एकतरफा रहा। उनकी अचूक सर्विस और सटीक फोरहैंड का मानो क्लिस्टर्स के पास कोई तोड़ नहीं दिख रहा था। ऐसा लगा कि तीन बार की अमेरिकी ओपेन चैंपियन और एक बच्चे की मां बेल्जियम की यह खिलाड़ी ली के शानदार खेल के सामने अपना मनोबल और लय गंवा चुकी है। लेकिन अनुभव भारी पड़ा।
क्लिस्टर्स ने दूसरे सेट में कमाल की वापसी की। पहले सेट की अपेक्षा अब उनके शॉट और सर्विस ठीक निशाने पर लगते दिखे। क्लिस्टर्स के इस तरह वापसी करने से ली को झटका जरूर लगा क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पहला सेट 3-6 से गंवाने के बाद क्लिस्टर्स इस तरह धार और रफ्तार पकड़ लेंगी। ली ने फाइनल मुकाबले की पूर्व संध्या पर कहा भी था कि 'जीतेगी वही, जो शुरुआत बेहतर करेगा', और बेहतर शुरुआत करने के बाद वह शायद निश्चिंत हो चुकी थीं कि अगला सेट भी आसानी से जीतकर वह इतिहास रच देंगी। संन्यास के बाद वापसी करने वाली क्लिस्टर्स ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का एक बार फिर अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अगले दोनों सेट 6-3, 6-3 से अपने नाम करने के साथ ही आॅस्ट्रेलियाई ओपेन का महिला सिंगल्स खिताब भी अपने नाम कर लिया। 2004 में वह यहां फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन खिताब से दूर रहीं। तीन अमेरिकी ओपेन खिताब के बाद यह उनका पहला आॅस्ट्रेलियाई ओपेन खिताब और कुल चौथा ग्रैंड स्लैम खिताब है। आने वाली ताजा डब्ल्यूटीए रैंकिंग में क्लिस्टर्स तीसरे से दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगी। पिछले दो खिताब अमेरिका की सेरेना विलियम्स के नाम रहे थे, जिन्होंने इस बार टूर्नामेंट में भाग नहीं लिया। वहीं, आस्ट्रेलियाई ओपन टाइटल जीतने के बाद क्लिस्टर्स ने कहा, 'अब मुझे एक नया नाम भी मिल गया है। अब आप मुझे आॅसी किम भी बुला सकते हैं क्योंकि मैंने यह टाइटल हासिल कर लिया है।' जीत से बेहद खुश नजर आ रही क्लिस्टर्स ने ट्रॉफी लेते समय कहा, 'मैं अभी भी हिली हुई हूं। ली ना वाकई बहुत ही कठिन प्रतिद्वंद्वी है। उसने मुझे शुरुआत में यह अहसास करा दिया था कि मेरा रास्ता आसान नहीं है। मैं सचमुच बैकफुट पर चली गई थी, लेकिन मैंने भी बढ़िया वापसी की। पहले सेट में मैं निराशा में डूब गई थी जबकि दूसरे सेट में यही निराशा उसके चेहरे पर झलकने लगी थी।  मुझे खुशी है कि अंत में मैं जीत हासिल करने में सफल रही।'

पेस और भूपति का सपना चकनाचूर

मेलबोर्न. लिएंडर पेस और महेश भूपति की 'इंडियन एक्सप्रेस' जोड़ी को शनिवार को मेलबर्न पार्क में पुरुष युगल स्पर्धा में माइक और बॉब ब्रायन से हार का मुंह देखना पड़ा जिससे उनका आस्ट्रेलियाई ओपन ट्राफी जीतने का सपना भी चकनाचूर हो गया। ब्रायन बंधुओं ने इस तरह खिताबों की हैट्रिक भी पूरी की।
तीसरी वरीय भारतीय जोड़ी ने नौ साल बाद एक साथ खेलने का फैसला किया था और उनका लक्ष्य अपना करियर स्लैम पूरा करना था। लेकिन अमेरिका की शीर्ष वरीय जोड़ी ने एक घंटे से ज्यादा चले मुकाबले में ली-हैश को शिकस्त देकर उनका सपना तोड़ दिया। पेस-भूपति यह खिताब दूसरी बार जीतने से चूक गए। इससे पहले दोनों भारतीय 1999 में फाइनल में पहुंचे थे। ब्रायन बंधुओं की यह पांचवीं आस्ट्रेलियाई ओपन ट्राफी है। दोनों खिलाड़ी अलग-अलग जोड़ीदारों के साथ यहां फाइनल में पहुंच लेकिन कोई भी खिलाड़ी अपना करियर स्लैम पूरा नहीं कर सका है। ोस ने चेक गणराज्य के मार्टिन डैम के साथ 2006 में फाइनल में जगह बनाई थी जबकि भूपति 2009 में बहामास के मार्क नोल्स के साथ उप विजेता रहे थे। इस भारतीय जोड़ी ने 2011 में शानदार शुरुआत की थी और इस महीने चेन्नई ओपन जीता था। पेस और भूपति ने अपना अंतिम ग्रैंड स्लैम 2002 में खेला था, जिसमें वे दूसरे राउंड में हार गए थे। भूपति ने कहा कि वह बचे हुए सत्र में पेस के साथ खेलना जारी रखेंगे। फाइनल में ब्रायन बंधुओं ने दबदबा बनाए रखा और सहज गल्तियों में भी उन्होंने काफी सतकर्ता बरती। हालांकि पहले गेम में अगर भारतीय जोड़ी ब्रेक प्वाइंट बनाने में सफल रहती तो परिणाम कुछ भी हो सकता था।

सचिन का सपना पूरा करे टीम इंडिया

पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर विनोद कांबली का दावा, इस बार वर्ल्ड कप खिताब का प्रबल दावेदार है भारत
  खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त करते कांबली


रायपुर. पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर विनोद कांबली की भी दिली इच्छा है कि टीम इंडिया इस बार वर्ल्ड कप जीतकर सचिन का सपना जरूर पूरा करे। उन्होंने कहा कि इस बार भारत वर्ल्ड कप खिताब के 99 प्रतिशत दावेदार है, जबकि एक फीसदी का दावा बाहरी टीम कर सकती है।
कांबली ने कहा कि टीम इंडिया का चयन काफी हद तक संतुलित है, लेकिन भारतीय महाद्वीप की पिच को देखते हुए एक लेफ्त आर्म स्पिनर को जगह मिलनी चाहिए थी, क्योंकि इस महाद्वीप में होने वाले वर्ल्ड कप में स्पिनर बड़ा रोल प्ले करेगा। सुरेश अग्रवाल मेमोरियल कार्पोरेट क्रिकेट चैंपियनशिप के समापन समारोह में हिस्सा लेने रायपुर आए श्री कांबली शनिवार को पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। 1996 वर्ल्ड कप खेल चुके कांबली ने कहा कि धोनी व अन्य खिलाड़ियों को अभी काफी अभ्यास करना पड़ेगा। सभी देशवासियों की आशाएं उन पर टिकी हुई हैं। घरेलू मैदान होने से खिलाड़ियों पर बेहद प्रेशर होता है, क्योंकि वे खुद वर्ल्ड कप खेल चुके हैं और इस प्रेशर से वे वाकिफ हैं। जब लोग अपनी होम टीम को सपोर्ट करते हैं, खिलाड़ियों के अंदर संयम और आत्मविश्वास आता है, लेकिन धैर्य के साथ खेलना होता है। इस बार भारत का वर्ल्ड कप जीतना न सिर्फ सचिन का ही सपना है, बल्कि पूरे भारतवासियों का भी सपना है। यह टीम इंडिया के लिए एक सुनहरा मौका है। अभी लोहा गर्म और टीम इंडिया को जोश के साथ खेलते हुए हथौड़ा मारना होगा।
धोनी को बचना होगा इंज्युरी से
टीम के प्रदर्शन के बारे में श्री कांबली ने कहा कि टीम इंडिया काफी हद तक संतुलित है और टीम के संतुलन के लिए खासकर कैप्टन धोनी को इंज्युरी से बचना होगा। सभी लोगों की कामना हैं कि वे वर्ल्ड कप में पूरी तरह फिट रहेंगे, क्योंकि उनके इंज्युरी होने पर इसका प्रभाव पूरी टीम के प्रदर्शन पर पड़ेगा। उन्होंने टीम में एक विकेटकीपर के चयन पर टीम के प्रदर्शन पर किसी तरह के प्रभाव पड़ने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी भारत ने सिर्फ एक विकेटकीपर के बूते ही वर्ल्ड कप खेला है। यह कोई नई बात नहीं है।
स्टेमिना,फिटनेस से प्रभावित होता है खेल
श्री कांबली ने कहा कि खिलाड़ियों की स्टेमिना व फिटनेस से खेल जरूर प्रभावित होता है, लेकिन स्टेमिना खिलाड़ियों के ऊपर निर्भर करता है। क्रिकेट में हार-जीत होती रहती है। 1996 वर्ल्ड कप के लीग मैच में हमने लगातार दो मैच श्रीलंका व आस्टेÑलिया से हारे। उसके बाद कमबैक करते हुए अगला मैच जीत लिया। यह वर्ल्ड कप है और खिलाड़ियों को पता रहता है कि उन्हें फिटनेस रहना है। फिटनेस एक बहुत बड़ा मामला है। खिलाड़ी फिट रहने पर ही वे अधिक समय सरवाइव कर पाएंगे।
सौरव का आईपीएल न खेलना दुख की बात
श्री कांबली ने आईपीएल में पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का आईपीएल-4 में नहीं खेलने पर निराशा व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि फ्रेंचाइजी टीम द्वारा सीनियर खिलाड़ी सौरव गांगुली की बोली नहीं लगाना दुख की बात है। वे एक सफलतम कप्तान रहे हैं। उन्होंने आईसीसी द्वारा ईडन गार्डन को वर्ल्ड कप मैच से बाहर करने के बारे में कहा कि इसकी तैयारी पूर्व निर्धारित समय पर हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कोलकाता के क्रिकेटप्रेमियों को इससे जरूर दुख होगा। उन्होंने खिलाड़ियों की नाइट पार्टी के बारे में कहा कि आईपीएल में भले ही नाइट पार्टी व शो हो लेकिन यह वर्ल्ड कप है और खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर स्टारडम के प्रभाव से इनकार करते हुए कहा कि यह सिर्फ खिलाड़ियों पर निर्भर करता है। कांबली ने कहा कि इसका बेहतर उदाहरण सचिन तेंदुलकर जो इतना स्टारडम के बावजूद लगातार 20 साल से धैर्य के साथ खेल रहे हैं। चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा हो जाए, उसे खेल और क्रिकेट को कभी नहीं भूलना चाहिए।
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
मैच फिक्सिंग के बारे में श्री कांबली ने कहा कि इससे खेल जेंटलमैन क्रिकेट काफी बदनाम हुआ है और इसके दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी सटोरिए का उनसे संपर्क किए जाने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा दिल से क्रिकेट खेले और देश व देशवासियों के लिए खेले। शुरू से उनका एक सपना था कि वे टीम इंडिया के लिए खेले और वह पूरा हो गया। उन्होंने कई टीवी शो में काम किया, लेकिन क्रिकेट नहीं खेलने पर ही किया। अब उनकी इच्छा अंतरिक्ष में क्रिकेट खेलने की है।
उनके चयन में हुआ पक्षपात
श्री कांबली ने वर्ल्डकप टीम को संतुलित बताया, लेकिन उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि उनके चयन में जरूर पक्षपात हुआ। उन्होंने कहा कि लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद कई बार उनका टीम इंडिया में चयन नहीं हो सका और हर बार उन्होंने इसका विरोध करने बजाय हमेशा अपने प्रदर्शन से जवाब दिया। उन्होंने कभी भी चयनकर्ताओं से इसका कारण नहीं पूछा। चयनकर्ता उन्हें ड्राप करते गए और वे हमेशा प्रदर्शन के दम पर वापसी करते रहे। उन्होंने नौ बार कमबैक किया। इसका खुलासा उन्होंने हाल ही में अपनी बायोग्राफी में किया है।

Tuesday 25 January 2011

लक्ष्मण, सुशील समेत सात खिलाड़ियों को पद्मश्री

नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को घोषित पद्म पुरस्कारों में क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण के अलावा विश्व चैंपियन पहलवान सुशील कुमार, निशानेबाज गगन नारंग, भारोत्तोलक कुजांरानी देवी और राष्टÑमंडल खेलों की चैंपियन डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पुनिया को अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है।
देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान के लिए इस बार सात खिलाड़ियों को चुना गया है। पैराजम्पर शीतल महाजन और पवर्तारोही हरभजन सिंह भी पद्मश्री से सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल हैं। पूनिया राष्ट्रमंडल खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में सोने का तमगा जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थी जबकि कुंजारानी देवी पिछले लगभग दो दशक से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक बटोरने में सफल रही हैं। भारतीय क्रिकेट के चोटी के बल्लेबाजों में शुमार 36 वर्षीय लक्ष्मण ने अब तक 120 टेस्ट मैचों में 47.32 की औसत 7903 रन बनाए हैं जिसमें 16 शतक और 49 अर्धशतक शामिल हैं। इस हैदराबादी बल्लेबाज ने अपने लगभग 15 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान कई अवसरों पर संयम और जुझारूपन का जोरदार नमूना पेश करके टीम को संकट से उबारा। लक्ष्मण ने पद्मश्री से सम्मानित किए जाने को बड़ा सम्मान करार दिया।
लक्ष्मण पद्मश्री से सम्मानित होने वाले 11वें क्रिकेटर हैं। उनसे पहले सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, अनिल कुंबले, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और महेंद्र सिंह धौनी को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। तेंदुलकर को पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।  लक्ष्मण ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ 2001 में कोलकाता में 281 रन की बेजोड़ पारी खेली थी जिसकी मदद से भारत ने फालोआन के बावजूद जीत दर्ज की थी। उनकी इस पारी को विजडन ने 100 साल की सर्वश्रेष्ठ पारियों में छठे नंबर पर रखा था। पिछले एक साल में लक्ष्मण ने कई बेजोड़ पारियां खेली। श्रीलंका के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में उनकी नाबाद 103 रन की पारी की बदौलत भारत मैच जीतकर सीरीज बराबर कराने में सफल रहा था। उन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली में पीठ दर्द के बावजूद नाबाद 73 रन की मैच विजेता पारी खेली थी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन में दूसरे टेस्ट में उन्होंने फिर से संकट में 96 रन बनाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। अपने करियर में 86 वनडे मैच खेलने वाले लक्ष्मण को 2001 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
सुशील 2008 में बीजिंग ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतकर सुर्खियों में आए थे। वह केडी जाधव (1952) के बाद ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले पहले पहलवान हैं। इसके बाद उन्होंने 2010 में मास्को में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और फिर दिल्ली में एशियाई चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में सोने के तमगे हासिल किए। सुशील को इससे पहले अर्जुन पुरस्कार और 2009 में देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। निशानेबाज गगन नारंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक अपने नाम कर चुके हैं। वह दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के नायक थे जिसमें उन्होंने चार स्वर्ण पदक जीते थे। कृष्णा पूनिया इन्हीं खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में सोने का तमगा जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थी जबकि कुंजारानी देवी पिछले लगभग दो दशक से राष्टÑीय और अंतरराष्टÑीय स्तर पर पदक बटोरने में सफल रही हैं।

विश्व कप जीतने के लिए पूरा जोर लगाएगी टीम इंडिया : सचिन

मुंबई. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने देशवासियों से वादा किया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में 19 फरवरी से शुर हो रहे विश्वकप में खिताब जीतने के लिए टीम इंडिया अपनी तरफ से पूरा जोर लगाएगी।
 आगामी विश्व कप में भारत की संभावनाओं के बारे में सोनीपत के एक बच्चे के सवाल पर सचिन ने कहा कि हम अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगे. बाकी भगवान के हाथों में है। स्कूलों में सफाई, शौचालय आदि की बेहतर सुविधाओं पर केंद्रित (सपोर्ट माई स्कूल) अभियान के तहत के सचिन स्कूली बच्चों के सवालों के जवाब दे रहे थे। अपने करिअर में रिकार्डों का अंबार लगाने के बारे में पूछे जाने पर सचिन ने कहा कि मैं तो बस खेलने के लिए उतरता हूं। बाकी रिकार्ड खुद-ब-खुद बनते चले जाते हैं। सचिन ने छात्रों से अपील की कि वे अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाएं और देश का नाम ऊंचा करें। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात होती है कि आप जो भी करें, उसका पूरा आनंद लें। अपने काम को मजे में करें, फिर धीरे धीरे आप उसमें महारत हासिल कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अपना शत प्रतिशत समर्पण कर ही कोई शख्स सफलता पा सकता है।  उन्होंने कहा कि आप जो भी करें, चाहें वह खेल हो या अभ्यास या फिर कोई और काम आपका शत प्रतिशत ध्यान अपने काम पर होना चाहिए। आगामी विश्व कप 19 फरवरी से भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहा है और इसका फाइनल सचिन के गृहनगर मुंबई में खेला जाना है। इसलिए घरेलू माहौल होने के कारण टीम इंडिया और सचिन पर दबाव बढ़ गया है। सचिन भी कई बार कह चुके हैं कि वह कम से कम एक विश्व कप जीतना चाहते हैं।

विश्व कप जीतने का सचिन का सपना पूरा होगा : क्लूजनर

चेन्नई. दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज आलराउंडर लांस क्लूजनर ने भारत को 19 फरवरी से शुरू हो रहे विश्व कप में खिताब का प्रबल दावेदार बताते हुए आज कहा कि सचिन तेंदुलकर टीम इंडिया को इस मुकाम तक पहुंचा सकते हैं। क्लूजनर ने कहा कि भारत के खिताब जीतने का 60 प्रतिशत चांस है। शीर्षक्रम में भारत के पास दुनिया के छह बेहतरीन बल्लेबाज हैं। मुझे लगता है कि सचिन भारत के लिए खिताब जीत सकते हैं और इस तरह वह अपना सपना भी पूरा कर सकते हैं। कार निर्माता कपंनी (फोर्ड) के एक कार्यक्रम में भाग लेने आए क्लूजनर ने यूनी एजेंसी से कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की टीमों को पिच और परिस्थितियों का फायदा मिलेगा।
मुझे लगता है कि भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका सेमीफाइनल में पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के लिए यहां की परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं और इन टीमों के लिए सेमीफाइनल में पहुंचना आसान नहीं होगा। मैं कामना करता हूं कि भारत और दक्षिण अफ्रीका में खिताबी मुकाबला हो और जीत हमारी टीम को मिले।  क्लूजनर ने कहा कि विश्व कप में मध्य ओवरों में स्पिनरों से निपटना किसी भी टीम की सफलता के लिए काफी अहम होगा। उन्होंने कहा कि हर कोई पहले और आखिरी दस ओवरों के बारे में बात करता है लेकिन मध्य ओवरों में स्पिनरों को अच्छी तरह खेलना किसी भी टीम के लिए काफी अहम है। वर्ष 1999 के विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के विस्फोटक बल्लेबाज और अहम गेंदबाज रहे क्लूजनर ने कहा कि अगर किसी टीम को अच्छी शुरुआत मिलती है। मध्य ओवरों में भी उसकी लय बरकरार और अंत तक वह अच्छा संघर्ष करती है तो उस टीम के खिताब जीतने की ज्यादा संभावना है।
 भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हाल में संपन्न वनडे सीरीज के बारे में क्लूजनर ने स्वीकार किया कि दिग्गज आलराउंडर जैक्स कैलिस की अनुपस्थिति में मेजबान टीम को अपने कई स्टार खिलाडियों के बिना खेल रहे भारतीय टीम पर 3-2 से जीत दर्ज करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा।  उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों मेंं काफी अंतर है लेकिन भारत के खिलाफ मिली जीत विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के लिए टानिक का काम करेगी।

Sunday 23 January 2011

वनडे सीरीज पर दक्षिण अफ्रीका का कब्जा

काम न आई पठानी पारी
सेंचुरियन.  दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों के आगे सलामी बल्लेबाज यूसुफ पठान (105) का तूफानी शतक भी भारत को जीत दिलाने में नाकामयाब रहा। इस तरह दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 33 रन से हराकर पांच वनडे मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। मेजबान टीम की ओर से मोर्न मोर्कल ने चार विकेट ले अपनी टीम को विजयी बनाने में खास भूमिका अदा की। मोर्केल को शानदार गेंदबाजी के लिए मैन आफ द सीरीज का पुरस्कार दिया गया। वहीं मैच में नाबाद शतकीय पारी खेलने वाले दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज हाशिम अमला मैन आफ द मैच रहे।
इससे पहले हाशिम अमला (नाबाद 116) के शानदार तूफानी शतक के दम पर दक्षिण अफ्रीका ने भारत के खिलाफ सीरीज के पांचवें और निर्णायक मुकाबले में बारिश के चलते घटाए गए ओवरों में 46 ओवर में नौ विकेट खोकर 250 रन बनाए। हालांकि, टीम इंडिया को सीरीज जीतने के लिए डकवर्थ लुइस नियम से 46 ओवर में 268 रन बनाने का लक्ष्य मिला। बारिश के कारण 42वें ओवर में खेल रोक दिया गया था। तब तक हाशिम अमला की बदौलत मेजबान टीम ने तीन विकेट खोते हुए 226 रन बना लिए थे। इससे भारत के लिए सीरीज जीतने की राह काफी मुश्किल भरी हो गई थी। मगर बारिश के थमते ही भारतीय गेंदबाजों ने गजब का पलटवार करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 46 ओवर में नौ विकेट पर 250 रनों पर समेट दिया। टीम इंडिया की ओर से मुनाफ पटेल ने बेहतरीन गेंदबाजी की और तीन विकेट लेते हुए मेजबानों पर कहर बनकर टूट पड़े। वहीं, जहीर खान और युवराज सिंह ने भी दो-दो विकेट लेते हुए दक्षिण अफ्रीका को परेशानी में डाल दिया।
बारिश के कारण खेल रुकने तक 42 ओवर में तीन विकेट खोकर 226 रन बना लिए थे। अमला के साथ जेपी डुमनी क्रीज पर मौजूद थे। हालांकि, 43वें ओवर की शुरुआत होते ही डुमिनी मुनाफ की गेंद पर उन्हीं के हाथों में अपना कैच दे बैठे। वे अपने देश के स्कोर में 35 रनों का सहयोग कर सके। उनके बाद टीम को सहारा देने के लिए फैफ डु प्लेसिस (8) ने मैदान में कदम रखा। मगर वे भी ज्यादा देर तक नहीं टिक सके और मुनाफ की ही गेंद पर बोल्ड हो गए। फिर मुनाफ के दोहरे हमले से घायल मेजबान टीम को राहत देने के लिए जोहान बोथा (2) को क्रीज में भेजा गया। मगर जल्द ही वे भी पैवेलियन लौट गए। इसी क्रम में डेल स्टेन और मोर्न मोर्कल दोनों ही शून्य का व्यक्तिगत स्कोर लिए हुए रन आउट हो गए।
पांच वनडे मैचों की सीरीज में दोनों ही टीमें 2-2 से बराबरी पर हैं। इसलिए दोनों ही टीमों के लिए यह मुकाबला अहम है। इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और सलामी बल्लेबाज ग्रीम स्मिथ सात रन के निजी योग पर जहीर खान की गेंद पर यूसुफ पठान के हाथों लपके गए। स्मिथ का विकेट सिर्फ 16 रन पर गिरा। स्मिथ का साथ देने आए अमला ने जबर्दस्त खेल दिखाया और अपनी शतकीय पारी के दौरान नौ चौके जड़कर भारतीय गेंदबाजों को करारा जवाब दिया। मोर्ने वान विक ने अमला का बेहतरीन साथ दिया और 63 गेंदों पर आठ चौकों की मदद से 56 रन बनाए। विक को युवराज सिंह ने अपनी गेंद पर कैच आउट किया। विक ने दूसरे विकेट के लिए अमला के साथ मिलकर 97 रनों की साझेदारी की। इसके बाद एबी डीविलियर्स 12 गेंदों पर एक चौके की मदद से 11 रन बनाकर युवराज की गेंद पर धौनी के हाथों स्टंप आउट हो गए थे।

Tuesday 18 January 2011

टीम इंडिया की रोमांचक जीत

केपटाउन. केपटाउन में खेले जा रहे तीसरे वनडे में भारत ने रोमांचक मुकाबले में जहीर खान (23/3) की सधी हुई गेंदबाजी और यूसुफ पठान (59) की अर्धशतकीय पारी की बदौलत मेजबान दक्षिण अफ्रीका को दो विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। यूसुफ पठान मैन आफ द मैच रहे। 
दक्षिण अफ्रीका की टीम पहले खेलते हुए निर्धारित 49.2 ओवर में 220 रन पर सिमट गई। जवाब में टीम इंडिया ने 48.2 ओवर में आठ विकेट पर 223 रन बनाकर मैच जीत लिया। टीम की जीत में यूसुफ पठान ने महत्वपूर्ण 59 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली। इसके पूर्व ओपनर मुरली विजय (1) जल्दी ही पैवेलियन लौट गए। इसके बाद विराट कोहली 28 रन और रोहित शर्मा 23 रन बनाकर आउट हुए। दोनों का विकेट मोर्केल ने झटका।  टीम इण्डिया की शुरूआत काफी खराब रही। सलामी बल्लेबाज मुरली विजय सिर्फ एक रन के स्कोर पर चलते बने। स्टेन ने मुरली को अपना शिकार बनाया। मुरली के जाने के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भारत की पारी को संभाला। दोनों अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन मोर्कल ने दोनों की जोड़ी को तोड़ दिया।
इससे पूव पहली पारी में दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम 220 रन के स्कोर पर आउट हो गई। टीम इण्डिया की ओर से जहीर खान ने तीन, मुनाफ पटेल ने दो, हरभजन सिंह ने दो और युसूफ पठान ने एक एक विकेट झटका। अफ्रीका की ओर से जेपी डुमिनी और डु प्लेसिस ने शानदार बल्लेबाजी की। डुुमिनी ने 59 गेंद में दो चौकों की मदद से 52 रन बनाए। जहीर खान ने डुमिनी का विकेट झटका जबकि प्लेसिस 60 रन बनाकर आउट हुए। मुनाफ पटेल ने प्लेसिस को अपना शिकार बनाया। भारतीय गेंदबाजों की कसी हुई गेंदबाजी के सामने अफ्रीकी बल्लेबाजों ने धीमी शुरूआत की। सातवें ओवर में जहीर की इनस्विंग गेंद को अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज हाशिम अमला समझ नहीं पाए और क्लीन बोल्ड हो गए। इसके कुछ ही देर बाद हरभजन की फ्लिपर गेंद पर इनग्राम स्लिप में कैच दे बैठे। कोहली ने इनग्राम का शानदार कैच लपका।  अभी स्मिथ और डीविलियर्स ने मोर्चा संभाला ही था कि डीविलियर्स पठान को पुल करने के चक्कर में जहीर खान को कैच थमा बैठे। स्मिथ ने काफी देर भज्जी की फिरकी का सामना किया लेकिनएक नीची रहती गेंद पर धोखा खाकर पगबाधा हो गए। हरभजन सिंह के दोहरे वार से अफ्रीका का टॉप आॅर्डर लड़खड़ा गया। भज्जी ने स्मिथ को 43 के स्कोर पर पैवेलियन भेजकर दक्षिण अफ्रीका को बैकफुट पर ला दिया। इसके बाद डुमिनी और प्लेसिस ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को संकट से उबारा लेकिन दोनों के आउट होने के बाद अफ्रीका की बड़ा स्कोर खड़ा करने की उम्मीद धूमिल हो गई।

Monday 17 January 2011

विश्व कप के लिए टीम इंडिया घोषित

रोहित विश्वकप टीम से बाहर, तीन स्पिनरों को मिली जगह
नई दिल्ली. भारतीय उपमहाद्वीप में 19 फरवरी  से शुरू होने वाले विश्वकप के लिए आज घोषित 15 सदस्यीय भारतीय टीम में रोहित शर्मा अपनी जगह बनाने में नाकाम रहे जबकि टीम में तीन स्पिनरों को शामिल किया है।
 कृ ष्णामचारी श्रीकांत के नेतृत्व में पांच सदस्यीय चयनकताओं के पैनल ने विश्व कप के लिए अंतिम टीम की सूची में सभी बडे नामों को जगह दी है। इससे पहले विश्व कप के लिए 30 संभावित खिलाडियों की घोषणा की गई थी जिनमें से अंतिम टीम का चयन आज किया गया।  चयनकर्ताओं ने टीम ने सात बल्लेबाजों को जगह दी है। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, युवराज सिंह. विराट कोहली, सुरेश रैना और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बल्लेबाजी की कमान संभालेंगे जबकि यूसुप पठान आलराउंडर के रूप में टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।
जहीर खान विश्व कप में टीम की तेज गेंदबाजी का नेतृत्व करेंगे और आशीष कुमार,  मुनाफ पटेल और प्रवीण कुमार की तिकडी उनका साथ देगी जबकि शांतकुमारन श्रीसंत और इशांत शर्मा टीम में अपनी जगह बनाने में नाकामयाब रहे।  टीम में स्पिनरों के रूप में हरभजन सिंह. पीयूष कुमार और आर अश्विन को सौंपी गई है जबकि अमित मिश्रा और प्रज्ञान ओझा विश्व कप में नहीं खेल पाएंगे ले पाएंगे।
 दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मैच ेमें खेलते समय सचिन के हैमस्ट्रिंग में चोट आ गई थी जिसके कारण वह श्रृंखला के आगामी तीन मैचों में नहीं खेल पाएंगे। इस खबर के बाद शंकाएं उठने लगी थीं कि सचिन शायद विश्वकप में भी हिस्सा न ले पाएं। लेकिन अब ऐसे संकेत मिले हैं कि सचिन की चोट गंभीर नहीं है और वह अपने करियर के छठे विश्वकप में भी टीम का हिस्सा होंगे।

 विश्व कप टीम इस प्रकार है
 महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान, विकेटकीपर), वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर, विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना, हरभजन सिंह, जहीर खान, मुनाफ पटेल, प्रवीण कुमार, यूसुफ पठान, पीयूष चावला, आर अश्विन और आशीष नेहरा।

Saturday 15 January 2011

सचिन ने किया विश्व रिकार्ड की बराबरी, बनाया नया विश्व रिकार्ड

जोहानिसबर्ग. रिकार्डों के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने शनिवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे वनडे मैच के लिए मैदान पर उतरते ही श्रीलंका के आक्रामक सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या के सर्वाधिक वनडे मैच खेलने के रिकार्ड की बराबरी करने के अलावा वनडे में सबसे ज्यादा पारी खेलने का विश्व रिकार्ड बना ही लिया।
स्टार बल्लेबाज तेंदुलकर का यह 444वां मैच है जबकि जयसूर्या ने भी अपने करियर में इतने ही मैच खेले हैं। इन दोनों के अलावा आज तक कोई क्रिकेटर चार सौ मैचों के आंकड़े को भी नहीं छू पाया है। सर्वाधिक वनडे खेलने वालों की सूची में इन दोनों के बाद पाकिस्तान के इंजमाम उल-हक का नंबर आता है जिन्होंने अपने करियर में 378 वनडे खेले। सचिन ने अपनी इस पारी के साथ ही वनडे में सर्वाधिक पारियां खेलने का नया विश्व रिकार्ड भी बना लिया। सर्वाधिक 432 वनडे पारियां खेलने का विश्व रिकार्ड भी जयसूर्या के नाम था जिसे अब सचिन ने अपनी 433वीं पारी के साथ पीछे छोड़ दिया है।
तेंदुलकर ने आज से पहले अपने करियर के 443 वनडे मैचों में 45.02 की औसत से 17,605 रन बनाए हैं जिसमें 46 शतक शामिल हैं। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज के रनों और शतकों की संख्या भी वनडे में विश्व रिकार्ड है। दूसरी तरफ जयसूर्या ने अपने करियर में 444 मैचों में 32.43 की औसत से 13,428 रन बनाए हैं जिसमें 28 शतक शामिल हैं। तेंदुलकर ने अपने करियर में सर्वाधिक 78 मैच श्रीलंका के खिलाफ खेले हैं जबकि इसके बाद आस्ट्रेलिया (67) और पाक (67) का नंबर आता है। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने जिन टीमों के खिलाफ 30 से अधिक मैच खेले हैं उनमें दक्षिण अफ्रीका (56), न्यूजीलैंड (42), वेस्टइंडीज (38), इंग्लैंड (36) और जिंबाब्वे (34) शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह उनका 56वां मैच है।
दुनिया के इस सबसे सफल बल्लेबाज ने अपने करियर में सबसे अधिक रन तीन बार की गत विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया के खिलाफ जुटाए हैं। उन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ अब तक 46 से अधिक की औसत से नौ शतकों के साथ 3005 रन जोड़े हैं। वह श्रीलंका के खिलाफ तीन हजार रन पूर करने से भी 35 रन दूर हैं। उन्होंने इस टीम के खिलाफ 78 मैचों में 2965 रन बनाए हैं। तेंदुलकर ने इसके अलावा पाक (2389), दक्षिण अफ्रीका (1890), न्यूजीलैंड (1750), वेस्टइंडीज (1571), जिम्बाब्वे (1377) और इंग्लैंड (1335) के खिलाफ भी एक हजार से अधिक रन बनाए है। तेंदुलकर ने भारतीय सरजमीं पर 156 मैचों में 47.60 की औसत से 6522 रन बटोरे हैं जिसमें 18 शतक शामिल हैं। उन्होंने विरोधी टीम की धरती पर 142 मैचों में 11 शतक की मदद से 37.53 की औसत के साथ 4880 रन बनाए हैं। तटस्थ स्थान पर हालांकि तेंदुलकर के बल्ले ने खूब रंग जमाया है और उन्होंने ऐसे 146 मैचों में 17 शतक की मदद से 50 से अधिक की औसत के साथ 6203 रन बनाए हैं।

जोहानिसबर्ग में गेंदबाजों ने दिलाई जीत

  जोहानिसबर्ग.  वांडरर्स स्टेडियम में गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के बूते भारत ने मेजबान दक्षिण अफ्रीका को बेहद रोमांचक मुकाबले में एक रन से हराकर पांच मैचों की सीरीज को 1-1 की बराबरी पर ला दिया है। भारत के 190 रन के जवाब में मेजबान टीम 189 रन पर आल आउट हो गई। भारत की ओर से गेंदबाजी में उम्दा प्रदर्शन करने वाले मुनाफ पटेल मैन आफ द मैच रहे। उन्होंने 8 ओवर में 29 रन देकर 4 विकेट झटके। इसके अलावा उन्होंने टीम के लिए विजयी गेंद भी फेंका और आखिरी ओवर में दो विकेट लेकर भारत को जीत दिला दी।
  दक्षिण अफ्रीका को पहला झटका मुनाफ पटेल ने दिया। उन्होंने शानदार फॉर्म में चल रहे हाशिम अमला को 4 रन के निजी स्कोर पर विकेट के पीछे कैच आउट कराया। दक्षिण अफ्रीका के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज लोनवाबो सोतसोबे ने एक बार फिर घातक गेंदबाजी करते हुए मात्र 22 रन पर चार विकेट लेकर भारत को 47.2 ओवर में 190 रन पर निपटा दिया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरे भारत की तरफ से युवराज सिंह (53) और कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी (38) को छोड़कर अन्य कोई बल्लेबाज टिककर नहीं खेल पाया। सोत्सोबे ने युवराज और धोनी सहित कुल चार विकेट झटके। पिछले मैच में चार विकेट लेकर मैन आॅफ द मैच रहे सोतसोबे ने ओपनर मुरली विजय (16) और सुरेश रैना (11) को अपना शिकार बनाया। डेल स्टेन ने 35 रन पर दो विकेट और मोर्न मोर्कल ने 32 रन पर दो विकेट लेकर भारत का 47.2 ओवर में पुलिंदा बांध दिया। जोहान बोथा ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर (24) का कीमती विकेट लिया। भारत ने अपने आखिरी सात विकेट सिर्फ 40 रन जोड़कर गंवा दिए। भारतीय बल्लेबाजी लगातार दूसरे मैच में फ्लॉप रही। युवराज ने 68 गेंदों में चार चौकों की मदद से 53 रन और धोनी ने 61 गेंदों में एक चौके की मदद से 38 रन बनाए। लेकिन कोई भी भारतीय बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों पर हावी होता नजर नहीं आया। युवराज और धोनी ने चौथे विकेट के लिए 83 रन जोड़े। कप्तान धोनी का यूसुफ पठान को बाहर रख विजय और रैना को उनकी खराब फॉर्म के बावजूद खेलाने का फैसला समझ से परे था। दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों की सटीक गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षकों के बेहतरीन प्रदर्शन ने भी भारतीय बल्लेबाजो को दबाव में रखा। डेविड मिलर ने सीधे थ्रो से विराट कोहली (22) को रन आउट किया। भारत एक समय तीन विकेट पर 150 रन बनाकर अच्छी स्थिति में था। लेकिन सोतसोबे ने जैसे ही युवराज का विकेट लिया भारतीय पारी का पतन होने में ज्यादा समय नहीं लगा।  भारत ने 42वें ओवर में बल्लेबाजी पावरप्ले लिया। उस समय भारत का स्कोर चार विकेट पर 169 रन था। लेकिन भारत ने पांच ओवर के पावरप्ले में मात्र 14 रन जोड़कर रैना (11), धोनी (38), हरभजन सिंह (3) और जहीर खान (शून्य) के विकेट गंवा दिए। सातवें नंबर पर उतरे रोहित शर्मा नौ रन बनाकर मौर्कल की गेंद पर पगबाधा हुए। स्टेन ने आशीष नेहरा (एक) को आउट कर भातरीय पारी को समेट दिया।

Sunday 9 January 2011

पेस-भूपति चेन्नई ओपन युगल चैंपियन

चेन्नई. लिएंडर पेस और महेश भूपति की विश्व प्रसिद्ध जोड़ी ने अपना पुराना जादू कोर्ट पर बिखेरते हुए आज रात अमेरिका के डेविड मार्टिन और हालैंड के रोबिन हास को तीन सेटों के संघर्ष में 6-2, 6-7, 10-7 से हराकर चेन्नई ओपन टेनिस टूर्नामेंट का युगल खिताब जीत लिया।
 पेस-भूपति ने इस शानदार जीत से दिखाया कि राजधानी एक्सप्रेस लम्बे अंतराल के बाद पटरी पर लौट चुकी है और दुनिया पर फिर से अपना दबदबा बनाने के लिए तैयार है। भारतीय जोड़ी ने यह मुकाबला एक घंटे 45 मिनट में जीता।  इससे पहले तीसरी वरीयता प्राप्त स्विटजरलैंड के स्टेनिस्लास सवावरिका ने बेल्जियम के जेवियर मालिसे को तीन सेटों के कड़े संघर्ष में 7-5, 4-6, 6-1 से हराकर एकल खिताब जीत लिया। वावरिका ने नुगमबक्कम स्टेडियम के सेंटर कोर्ट पर दो घंटे 14 मिनट तक चला यह मुकाबला जीतकर पहली बार चेन्नई ओपन खिताब अपने नाम कर लिया। वावरिका ने इस तरह नए साल की शुरुआत खिताबी जीत के साथ की। शीर्ष वरीयता प्राप्त पेस और भूपति ने चेन्नई ओपन में पांचवी बार खिताब जीता और देश के एकमात्र एटीपी टूर्नामेंट में तिरंगा बुलंद रखा।  लम्बे अंतराल के बाद फिर से जोडी बनाकर खेल रहे पेस भूपति ने दिखाया कि उनका पुराना जादू और तालमेल बरकरार है। भारतीय जोड़ी ने पहला सेट बातों-बातों में 6-2 से जीत लिया। लेकिन हास और मार्टिन ने दूसरा सेट टाई ब्रेक में 7-3 से जीतकर मैच में 1-1 की बराबरी कर ली।  सुपर टाई ब्रेक में भारतीय जोड़ी ने 10-7 से जीत हासिल कर खिताब अपने नाम कर लिया। भूपति ने जैसे ही विजयी अंक लिया, पेस कूदकर उनकी गोदी में चढ़ गए।  उस समय पूरा स्टेडियम अपने इन दो महान खिलाड़ियों की सफलता में खुशी से झूम रहा था।

वावरिंका को एकल खिताब
इससे पूर्व एकल फाइनल में भी जोरदार मुकाबला हुआ। वावरिंका गत वर्ष मारिन सिलिच से हारकर उपविजेता रहे थे। लेकिन इस बार उन्होंने खिताबी मंजिल पूरी कर ली। विश्व के 21वें नम्बर के खिलाड़ी वावरिंका और 60वें नम्बर के खिलाडी मालिसे के बीच पहले दो सेट में कड़ा संघर्ष हुआ।  वावरिंका ने पहला सेट 7-5 से जीतने के बाद दूसरा सेट 4-6 से गंवा दिया। लेकिन टेनिस दिग्गज रोजर फेडरर के पूर्व युगल जोड़ीदार वावरिंका ने निर्णायक सेट में अपने खेल का स्तर ऊंचा उठाते हुए इस सेट को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।  मालिसे ने मैच में हालांकि अच्छी शुरुआत की और पहले ही गेम में वावरिंका की सर्विस तोड़ दी, लेकिन वावरिंका ने आठवें और 12वें गेम में सर्विस ब्रेक हासिल करते हुए पहला सेट एक घंटे तीन मिनट में निपटा दिया।
वर्ष 2007 में यहां चैम्पियन रहे मालिसे ने पहला सेट हारने के बाद दूसरे सेट में अपना खेल सुधारा और तीसरे गेम में वावरिंका की सर्विस तोड दी। वावरिंका ने स्कोर 4-5 किया लेकिन मालिसे ने दसवें गेम में शून्य पर अपनी सर्विस बरकरार रखते हुए मैच में 1-1 की बराबरी कर ली।  निर्णायक सेट में मालिसे आश्चर्यजनक रुप से वावरिंका के सामने समर्पण कर बैठे। वावरिंका ने दूसरे गेम में प्रतिद्वंद्वी की सर्विस तोड़ी और जल्द ही 4-1 की बढ़त बना ली। मालिसे ने पांचवें गेम में भी अपनी सर्विस गंवाई।  वावरिंका ने जल्द ही 6-1 से यह सेट जीतकर मैच समाप्त कर दिया और खिताब अपने नाम कर लिया1 वावरिंका को इस जीत से 68850 डालर की पुरस्कार राशि मिली जबकि मालिसे को 36250 डालर से संतोष करना पड़ा।

Saturday 8 January 2011

गंभीर सबसे महंगे खिलाड़ी

gautam gambhir
बेंगलुरु. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए क्रिकेटरों की मंडी सजी हुई थी। बढ़-चढ़कर बोलियां लग रही थीं। पूरी दुनिया की निगाहें इस नीलामी पर टिकी हुई थीं। बालीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने भारतीय ओपनर गौतम गंभीर पर 11 करोड़ चार लाख का भाव लगाकर उन्हें आईपीएल का सबसे महंगा क्रिकेटर बना दिया।
 कोलकाता नाइटराइडर्स के मालिक शाहरख ने आज शुरू हुई खिलाड़ियों की दो दिवसीय नीलामी में सबसे ज्यादा 11 करोड चार लाख रुपए लगाकर गंभीर को खरीद लिया। शाहरख ने इसके साथ ही बेरहम बल्लेबाज और टी-20 में सबसे तेज शतक बनाने वाले आलराउंडर यूसुफ पठान को नौ करोड़ 66 लाख रुपए में खरीदा। यानि आईपीएल चार में दो सबसे महंगे क्रिकेटर शाहरख की टीम में चले गए।
 शाहरुख ने गंभीर और यूसुफ को तो खरीदा लेकिन उन्होंने अपने पूर्व कप्तान और बंगाल टाइगर सौरभ गांगुली तथा टीम में रहे वेस्टइंडीज के विस्फोटक ओपनर क्रिस गेल को कोई तवज्जो नहीं दी। गांगुली और गेल को शाहरुख ने ही क्या बाकी टीमों ने भी कोई महत्व नहीं दिया और पहले चरण में उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला। गंभीर का आधार मूल्य 92 लाख रुपए और पठान का एक करोड़ 38 लाख रुपए था लेकिन नीलामी में सबसे पहले बिके गंभीर को उनके आधार मूल्य से दस गुना से ज्यादा कीमत मिली और पठान भी इतनी ही कीमत के आसपास रहे।  आईपीएल-थ्री में सबसे महंगे रहे इंग्लैंड के केविन पीटरसन भी इस बार टीमों को खासा नहीं लुभा पाए और उन्हें डेक्कन चार्जर्स हैदराबाद ने दो करोड 99 लाख रुपए में खरीदा जबकि पिछले आईपीएल में उनके लिए साढ़े छह करोड़ रुपए की बोली लगी थी। हरफनमौला रोहित शर्मा को मुंबई इंडियंस ने नौ करोड़ दो लाख रुपए की बोली लगाकर खरीदा जबकि युवराज सिंह को नयी टीम पुणे वारियर्स ने आठ करोड़ 22 लाख रुपए में खरीदा। श्रीलंका के माहेला जयवर्द्धने को छह करोड 90 लाख रुपए में कोच्चि फ्रेंचाइजी ने खरीदा जबकि ताजा रैंकिंग में सचिन के साथ संयुक्त रूप से नंबर वन बल्लेबाज बने दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस के साथ उनके हमवतन एबी डीविलियर्स और आस्ट्रेलिया के कैमरून व्हाइट के लिए पांच करोड़ छह लाख रपए की बोली लगी। कैलिस को केकेआर, डीविलियर्स को रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु, आरसीबी और कैमरून को डेक्कन चार्जर्स ने खरीदा, कीवी खिलाड़ी रोस टेलर के लिए राजस्थान रायल्स ने चार करोड साठ लाख रुपए की बोली लगाई जबकि तेज गेंदबाज जहीर खान को आरसीबी ने चार करोड़ 14 लाख रुपए में खरीदा। जहीर का आधार मूल्य एक करोड़ 38 लाख रुपए था। आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट भी चार करोड़ 14 लाख रुपए में बिके। उन्हें किंग्स इलेवन पंजाब ने खरीदा। इंग्लैंड के एंड्रयू साइमंडस तीन करोड़ 91 लाख रुपए में मुंबई इंडियंस टीम में गए जबकि श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा को तीन करोड 22 लाख रुपए में डेक्कन चार्जर्स ने खरीदा। उनके हमवतन तिलकरत्ने दिलशान के लिए आरसीबी ने दो करोड़ 99 लाख रुपए की बोली लगाई। पहले आईपीएल विजेता राजस्थान रायल्स ने टीम इंडिया के मिस्टर भरोसेमंद राहुल द्रविड़ और कोच्चि टीम ने दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट कप्तान ग्रीम स्मिथ पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक समान दो करोड़ तीस लाख रुपए में खरीदा। नीलामी में मुंबई इंडियंस की ओर से नीता अंबानी, आरसीबी से सिद्धार्थ और विजय माल्या, किंग्स इलेवन पंजाब से प्रीति जिंटा तथा टीम के नवनियुक्त कोच माइकल बेवन और राजस्थान रायल्स की ओर से शिल्पा शेट्टी मौजूद थीं जबकि कोच्चि फ्रेंचाइजी के कई सदस्य टीम जर्सी में वहां उपस्थित थे।नीलामी के शुरुआत में सबसे बड़ा फेरबदल जहां केकेआर में दिख रहा है वहीं राजस्थान रायल्स को यूसुफ का साथ छूटने का मलाल होगा।  हालांकि शिल्पा शेट्टी का कहना है कि रास टेलर यूसुफ की कमी पूरी करेंगे।
 गौरतलब है कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में घिरने के बाद बाम्बे उच्च न्यायालय ने रायल्स को बैंक गारंटी और अन्य निधि जमा करने के आदेश दिए थे जिसके बाद टीम ने खिलाड़ियों के वेतन में कटौती की घोषणा की है और इस सत्र में नीलामी के लिए उसके पास 17 करोड़ 94 लाख रुपए ही शेष हैं।

लारा, गांगुली और गेल को नहीं मिला कोई भाव

बेंगलुरु. क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा. उनके हमवतन विस्फोटक ओपनर क्रिस गेल और पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली को आईपीएल-चार की नीलामी के पहले दिन आज कोई भाव नहीं मिला।  लारा, गेल और गांगुली को पहले दौर की नीलामी में कोई भाव नहीं मिला। लेकिन दो भारतीय सीनियर खिलाड़ी राहुल द्रविड और वीवी एस लक्ष्मण पहले दौर की नीलामी में बिककर अपनी प्रतिष्ठा बचा गए। लक्ष्मण पिछले तीन संस्करणों में डेक्कन चार्जर्स हैदराबाद के आइकन खिलाड़ी थे जबकि द्रविड़ रायल चैलेंजर्स बेंगलूर की तरफ से खेले थे। लक्ष्मण को नई टीम कोच्चि फ्रेंचाइजी में एक करोड़ 84 लाख रपए की कीमत पर खरीदा। उनका आधार मूल्य तीन लाख डालर था। द्रविड़ को राजस्थान रायल्स ने 2.3 करोड़ रुपए की कीमत पर खरीदा जबकि उनका आधार मूल्य चार लाख डालर था।  लारा, गांगुली और गेल तीनों ही चार लाख डालर के आधार मूल्य के साथ टाप ब्रैकेट में थे। लारा पहली बार आईपीएल की नीलामी में उतरे जबकि गांगुली और गेल पिछले तीन सत्रों में   कोलकाता नाइटराइडर्स का हिस्सा थे।  गांगुली ने अपना आधार मूल्य दो लाख डालर से बढ़ाकर चार लाख डालर किया था। नाइटराइडर्स के पूर्व कप्तान गांगुली को उम्मीद थी कि दूसरी टीमें उन्हें खरीदने में दिलचस्पी दिखाएंगी लेकिन किसी भी टीम ने पूर्व भारतीय कप्तान को कोई भाव नहीं दिया। विस्फोटक ओपनर गेल का पहले दौर में नहीं खरीदा जाना सबसे आश्चर्यजनक परिणाम कहा जा सकता है। चार लाख डालर के आधार मूल्य पर जब गेल पर भाव लगना शुरू हुआ तो किसी भी टीम ने उनके नाम पर शुरुआत तक नहीं की।  गेल को नहीं खरीदे जाने पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की त्वरित प्रतिक्रिया थी। मेरे लिए यह चौकाने वाली बात है कि इतने तूफानी बल्लेबाज को किसी भी टीम ने खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। यह वाकई निराशाजनक है। बागी इंडियन क्रिकेट लीग  (आईसीएल) में खेल चुके 41 वर्षीय लारा इस बार आईपीएल में राजस्थान रायल्स के शेन वार्न की तरह कप्तान एवं कोच जैसी भूमिका निभाना चाहते थे लेकिन किसी भी टीम ने इस बेहतरीन बल्लेबाज को भी कोई भाव नहीं दिया।

किसका कितना मोल

खिलाड़ी                    कीमत (टीम)
गौतम गंभीर :     11.04 करोड़ रुपए (कोलकाता नाइटराइडर:
राबिन उथप्पा :     9.7 करोड़ (पुणे)
यूसुफ पठान :     9.66 करोड़ (केकेआर)
रोहित शर्मा :     9.2 करोड़ (मुंबई इंडियंस)
इरफान पठान :     8.7 करोड़ (दिल्ली डेयरडेविल्स)
युवराज सिंह :     8.28 करोड़ ( पुणे)
सौरभ तिवारी :     7.4 करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
महेला जयवर्धने :     6.9 करोड़ (कोच्चि)
डेविड हसी :     6.4 करोड़ (पंजाब)
डेल स्टेन :      5.5 करोड़ (डेक्कन चाजर्स)
एबी डीविलियर्स :     5.1 करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
कैमरून व्हाइट :     5.1 करोड़ (डेक्कन चाजर्स)
मुरलीधरन :     5.1 करोड़ (कोच्चि)
जैक्स कैलिस :     5.1 करोड़ (केकेआर)
रोस टेलर :     4.66 करोड़ (राजस्थान रॉयल्स)
जोहान बोथा :     4.4 करोड़ (राजस्थान रॉयल्स)
रवींद्र जडेजा :     4.4 करोड़ (कोच्चि)
एंजेलो मैथ्यूज :     4.4 करोड़ (पुणे)
जहीर खान :     4.14 करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
एस श्रीसंथ  :     4.1 करोड़ (कोच्चि)
एडम गिलक्रिस्ट :     4.1 करोड़ (पंजाब)
दिनेश कार्तिक :     4.1 करोड़ (पंजाब)
पीयूष चावला :     4.1 करोड़- पंजाब
एंड्रयू सायमंड्स :     3.9 करोड़ (मुंबई इंडियंस)
आशीष नेहरा :    3.9करोड़ (पुणे)
आर अश्विन :     3.9 करोड़ (चेन्नई)
अभिषेक नायर :     3.7 करोड़ (पंजाब)
प्रवीण कुमार :     3.7 करोड़ (पंजाब)
एस बद्रीनाथ :     3.7 करोड़ (चेन्नई)
डेविड वार्नर :     3.5 करोड़ (दिल्ली डेयरडेविल्स)
कुमार संगकारा :     3.2 करोड़ (डेक्कन चाजर्स)
डग बोलिंजर :     3.2 करोड़ (चेन्नई)
चेतेश्वर पुजारा  :     3.2करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
डर्क नैनस :     3 करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
केविन पीटरसन :     2.99 करोड़ (डेक्कन चाजर्स)
दिलशान :    2.9 करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
डेनियल विटोरी :     2.5 करोड़ (आरसी बेंगलुरु)
प्रज्ञान ओझा :     2.3 करोड़ (डेक्कन चाजर्स)
राहुल द्रविड़ :     2.3 करोड़ (राजस्थान रॉयल्स)
ग्रीम स्मिथ :     2.3 करोड़ (पुणे)
आरपी सिंह :     2.3 करोड़ (कोच्चि)
ब्रैंडन मैकुलम :     2.2 करोड़ (कोच्चि)
मनोज तिवारी  :     2.2 करोड़ (केकेआर)
मोर्न मार्केल :     2.2 करोड़ (दिल्ली डेयरडेविल्स)
ईशांत शर्मा :     2.1 करोड़ (डेक्कन चाजर्स)
माइक हसी :     2.0 करोड़ (चेन्नई सुपरकिंग्स)
ब्रैड हाज :     2.0 करोड़ (कोच्चि)
शकीब उल हसन :     2 करोड़ (केकेआर)
वीवीएस लक्ष्मण :     1.84 करोड़ (कोच्चि)
शान मार्श :     1.8 करोड़ (पंजाब)
स्टुअर्ट ब्राड :     1.8 करोड़ (पंजाब)
ब्रेट ली :     1.8 करोड़ (केकेआर)
जेम्स होप्स :     1.6 करोड़ (दिल्ली डेयरडेविल्स)
इयान मोर्गन :     1.6 करोड़ (केकेआर)
रेयान हैरिस :     1.5 करोड़ (पंजाब)
ब्रैड हैडिन :     1.5 करोड़ (केकेआर)
पाल कोलिंगवुड :     1.5 करोड़ (राजस्थान रॉयल्स)
एरोन फिंच :     1.4 करोड़ (दिल्ली डेयरडेविल्स)
जेपी डुमिनी :    1.4 करोड़ (डेक्कन चार्जर्स)
अमित मिश्रा  :     1.4 करोड़ (डेक्कन चार्जर्स)
कालम फर्ग्यूसन  :     1.4 करोड़ (पुणे)
शिखर धवन :     1.4 करोड़ (डेक्कन चार्जर्स)
पार्थिव पटेल :     1.3 करोड़ (कोच्चि)
टिम पेन :     1.2 करोड़  (पुणे)
नमन ओझा  :     1.2 करोड़ (दिल्ली)
ड्वेन ब्राओ :     92 लाख (चेन्नई)
स्टीव स्मिथ :     92 लाख (कोच्चि)
डेविड जैकब्स :     87.4 लाख (मुंबई इंडियंस)
रोमेश पवार :      82.8 लाख (कोच्चि)
रिद्धिमान साहा :     46 लाख (चेन्नई)
जेम्स फ्रेंकलिन :     46 लाख (मुंबई इंडियंस)
नाथन मैकुलम :     46 लाख (पुणे)

नहीं मिले इनको खरीददार

सौरव गांगुली, ब्रायन लारा, क्रिस गेल, मार्क बाउचर, जेसी राइडर, हर्शेल गिब्स, मैट प्रायर, ल्युक राइट, दिलहारा फर्नांडो, जेम्स एंडरसन, ग्रीम स्वान, अजंथा मेंडिस, मुरली कार्तिक, तमीम इकबाल, ग्राहम मनऊ, चमारा केपुगेदेरा।

Friday 7 January 2011

भारत की बादशाहत कायम 1.75 लाख डालर मिलना तय

दुबई. भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ तीन टेस्टों की श्रृंखला 1-1 से ड्रा खेलकर आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में अपनी बादशाहत बरकरार रखी और इसके साथ ही उसे टेस्ट रैंकिंग में नंबर वन पर बने रहने के लिए आगामी एक अप्रैल को पौने दो लाख डालर मिलना तय है। आईसीसी रैंकिंग में जो टीम एक अप्रैल को नंबर एक पोजीशन पर रहती है उसे अंतरराष्टÑीय क्रिकेट परिषद की तरफ से पौने दो लाख डालर की राशि दी जाती है। भारत को पिछले वर्ष भी यह राशि मिली थी और आगामी एक अप्रैल को भी उसे यह राशि मिलेगी।  भारत दिसंबर 2009 में श्रीलंका को हराकर टेस्ट रैंकिंग में पहली बार नंबर वन पोजीशन पर पहुंचा था और तबसे उसने अपनी यह स्थिति लगातार बरकरार रखी है। दक्षिण अफ्रीका से सीरीज ड्रा खेलने से भारत को सिर्फ एक रेटिंग अंक का नुकसान हुआ और वह 128 अंकों पर आ गया। लेकिन वह दक्षिण अफ्रीका से 11 अंकों से आगे है। दक्षिण अफ्रीका ने सीरीज में 116 अंकों से शुरआत की थी और उसे एक अंक का फायदा हुआ जिससे वह 117 अंकों पर पहुंच गया। तीसरे स्थान पर इंग्लैंड है जिसने एशेज की शुरुआत 112 रेटिंग अंकों के साथ की थी।
और वह आस्ट्रेलिया को 3-1 से हराकर 115 रेटिंग अंकों पर पहुंच गया है।  आस्ट्रेलिया घरेलू जमीन पर 24 वर्षों में पहली बार एशेज श्रृंखला गंवाकर पांचवें स्थान पर खिसक गया। आस्ट्रेलिया को तीन रेटिंग अंकों का नुकसान हुआ और वह श्रीलंका (109) के बाद 107 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर पहुंच गया।  पाकिस्तान (88) छठे,  वेस्टइंडीज (85) सातवें,  न्यूजीलैंड (80) आठवें और बांग्लादेश (सात) नौवें स्थान पर है। पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच दो टेस्टों की सीरीज शुक्रवार से हेमिल्टन में शुरू हुई है जिसमें दोनों टीमों के पास अपनी स्थिति सुधारने का मौका रहेगा।

नए साल में सचिन बने टेस्ट में नंबर वन

नई दिल्ली. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में तीसरे और आखिरी टेस्ट में अपना 51वां शतक बनाने की बदौलत आईसीसी की आज जारी ताजा टेस्ट रैंकिंग में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज बन गए हैं।
 सचिन और केपटाउन टेस्ट की दोनों पारियों में शतक बनाने वाले दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस टेस्ट रैंकिंग में श्रीलंका के कुमार संगकारा को अपदस्थ कर संयुक्त रूप से नंबर एक स्थान पर पहुंच गए1 सचिन और कैलिस दोनों के एक बराबर 883 अंक हैं। संगकारा 882 अंकों के साथ अब तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं।  सचिन सेंचुरियन में पहले टेस्ट में अपना 50वां शतक बनाने के बाद चोटी पर चल रहे श्रीलंका के कुमार संगकारा के बिल्कुल नजदीक पहुंच गए थे लेकिन डरबन में दूसरे टेस्ट में निराशाजनक प्रदर्शन के कारण नंबर वन बनने का मौका चूक गए थे।  उस समय उनके और संगकारा के बीच मात्र दो अंकों का फासला था। लेकिन सचिन डरबन टेस्ट में दोनों पारियों में कुछ खास न कर पाने के कारण 32 अंक गिरकर 848 अंकों पर पहुंच गए थे1 मगर केपटाउन में 146 रन की पारी ने सचिन को 35 अंक दे दिए और वह नए साल में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज बन गए।
 मास्टर ब्लास्टर ने इस तरह नए साल का आगाज शतक बनाने और टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक बनने की उपलब्धि के साथ किया। गत वर्ष भी वह लंबे समय के बाद टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पोजीशन पर पहुंचे थे लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में सामान्य प्रदर्शन करने के कारण अपनी बादशाहत गंवा बैठे थे। सचिन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में दो शतकों और 81.50 के औसत के साथ भारत की तरफ से सर्वाधिक 326 रन बनाए जो सीरीज में कैलिस (498) के बाद दूसरे सर्वाधिक रन थे।  इस श्रृंखला में बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर मैन आफ द सीरीज बने कैलिस ने इस सीरीज में न केवल अपने करियर का पहला दोहरा शतक बनाया बल्कि केपटाउन में आखिरी टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों में 161 और नाबाद 109 रन बनाए।  कैलिस इस मैच से पहले 820 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर थे लेकिन उन्होंने 63 अंक की लंबी छलांग लगाते हुए सचिन के साथ चोटी का स्थान हासिल कर लिया।  इंग्लैंड के जोनाथन ट्राट एक स्थान गिरकर तीसरे से चौथे स्थान पर पहुंच गए जबकि उनके हमवतन एलेस्टेयर कुक आस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज में अपने जबर्दस्त प्रदर्शन की बदौलत टाप टेन बल्लेबाजों में शुमार हो गए। कुक अब पांचवें स्थान पर पहुंच गए हैं। भारतीय ओपनर वीरेन्द्र सहवाग को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पूरी सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन का खामियाजा उठाना पड़ा और वह चौथे से छठे स्थान पर पहुंच गए जबकि वी वी एस लक्ष्मण अपने नौवें स्थान पर बरकरार हैं। ओपनर गौतम गंभीर दक्षिण अफ्रीका के कप्तान ग्रीम स्मिथ के साथ संयुक्त 15वें स्थान पर हैं लेकिन इस सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन करने वाले राहुल द्रविड 28वें स्थान पर हैं। भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी 26वें स्थान पर हैं। गेंदबाजी में दक्षिण अफ्रीका के तूफानी गेंदबाज डेल स्टेन सीरीज में जबर्दस्त प्रदर्शन की बदौलत चोटी पर बने हुए हैं और 900 रेटिंग अंक का जादुई आंकड़ा छूने से सिर्फ एक अंक दूर रह गए हैं। इंग्लैंड के आफ स्पिनर ग्रीम स्वान 793 अंकों के साथ दूसरे और उनके हमवतन तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन 776 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। दक्षिण अफ्रीका के मोर्न मोर्कल एक स्थान उठकर 751 अंकों के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं जबकि भारत के जहीर खान एक स्थान गिरकर पांचवें स्थान पर आ गए हैं। आफ स्पिनर हरभजन सिंह आठवें स्थान के साथ टाप टेन गेंदबाजों में दूसरे भारतीय हैं।

इंग्लैंड का एशेज सीरीज पर कब्जा

सिडनी. इंग्लैंड ने पांचवें और आखिरी एशेज टेस्ट के अंतिम दिन  यहां आस्ट्रेलिया को पारी और 83 रन से रौंदते हुए कंगारूओं की जमीन पर 24 वर्ष में पहली बार प्रतिष्ठित एशेज सीरीज 3-1 से अपने नाम कर ली।
एशेज कलश पर पहले ही कब्जा सुनिश्चित कर चुकी इंग्लिश टीम को एशेज सीरीज जीतने के लिए अंतिम दिन सिर्फ तीन विकेट की दरकार थी। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने 17 ओवर में ही आस्ट्रेलिया के बाकी तीन विकेट निकालकर जीत की औपचारिकता पूरी कर दी1 इस जीत के साथ ही इंग्लैंड में भी जश्न का दौर शुरू हो गया। इंग्लैंड की इस ऐतिहासिक जीत को देखने के लिए मैच के पांचवें और अंतिम दिन दर्शकों को निशुल्क प्रवेश दिया गया था। स्टेडियम में मौजूद 19000 दर्शकों में अधिकांश इंग्लैंड की टीम के समर्थक यानि ‘बार्मी आर्मी’ के सदस्य थे।
 क्रिस ट्रेमलेट ने जैसे ही माइकल बीयर को आउट किया, लाल और सफेद पोशाकें पहने ‘बार्मी आर्मी’ के शोर से आसमान गुंजायमान हो गया। इंग्लैंड के खिलाड़ी एशेज कलश को अपने हाथों में थामे खुशी से फूले नहीं समा रहे थे।  इंग्लैंड का चार वर्ष पहले आस्ट्रेलियाई जमीन पर एशेज सीरीज में 0-5 से सूपड़ा साफ हो गया था। लेकिन एंड्रयू स्ट्रास की अगुवाई में टीम ने चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए 24 वर्ष में पहली बार कंगारुओं को उनकी ही मांद में बुरी तरह धोकर रख दिया। इससे पहले वर्ष 1986-87 में माइक गैटिंग की कप्तानी में आस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज पर कब्जा किया था।
 वहीं दूसरी ओर पिछले 130 वर्षों के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब आस्ट्रेलिया को एक श्रृंखला में तीन बार पारी की शर्मनाक हार झेलनी पड़ी है।  इंग्लैंड की ओर से 189 रन की शानदार पारी खेलने वाले ओपनर एलेस्टेयर कुक को ‘मैन आफ द मैच’ और ‘मैन आफ द सीरीज’ भी चुना गया. कुक ने पूरी सीरीज में भी 127.66 के शानदार औसत के साथ 766 रन बनाए।
 सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में चार दिनों तक पूरी तरह अपना दबदबा स्थापित करने के बाद इंग्लैंड को एशेज सीरीज में जीत दर्ज करने के लिए अंतिम दिन सिर्फ तीन विकेट की दरकार थी। आस्ट्रेलिया को पहली पारी में 208 रन पर लुढ़काने के बाद इंग्लैंड ने पहली पारी में 644 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। आस्ट्रेलिया को पारी की हार टालने के लिए 151 रनों की जरूरत थी जबकि उसके तीन विकेट शेष थे। आस्ट्रेलिया ने सात विकेट पर 213 रन से आगे खेलना शुरू किया। स्टीवन स्मिथ 24 और पीटर सिडल 17 रन पर नाबाद थे।

Tuesday 4 January 2011

सचिन का नए साल में शतक से आगाज

केपटाउन. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (146) के ताबड़तोड़ साल के पहले व 51वें टेस्ट शतक और हरभजन सिंह (40) की शानदार पारी की बदौलत भारत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के तीसरे मुकाबले के तीसरे दिन सभी विकेट खोकर 364 रन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत ली।
सचिन ने अपना 51वां शतक शानदार छक्का लगाकर बनाया। उन्होंने अपनी शतकीय पारी में 13 चौके और एक छक्का जमाया। तेंदुलकर का हरभजन बखूबी साथ निभा रहे हैं। फिलहाल दोनों ही खिलाड़ी भारत की मुश्किलों को कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के 362 रन के जवाब में भारत ने सुबह के सत्र में गौतम गंभीर और वीवीएस लक्ष्मण (15) के विकेट गंवाए। तेंदुलकर 94 रन और चेतेश्वर पुजारा दो रन बनाकर खेल रहे हैं। भारत अब भी दक्षिण अफ्रीका से 125 रन पीछे है। भारत ने सुबह के 32 ओवर में 95 रन जोड़े। गंभीर और तेंदुलकर ने तीसरे विकेट के लिए 176 रन की साझेदारी की। बाएं हाथ के स्पिनर पाल हैरिस ने गंभीर को विकेटकीपर मार्क बाउचर के हाथों कैच आउट कराकर यह साझेदारी तोड़ी।
लक्ष्मण आते ही पूरी लय में दिख रहे थे और उन्होंने तीन शानदार चौके ही जमाए लेकिन उन्हें जल्द ही बेहद दुखी मन से पवेलियन लौटना पड़ा। विडंबना देखिए कि तब हैरिस ने तेंदुलकर का कैच छोड़ दिया था लेकिन इस पर लक्ष्मण रन आउट हो गए। तेंदुलकर ने आगे बढ़कर शाट जमाया लेकिन गेंदबाज हैरिस उस पर केवल हाथ ही स्पर्श कर पाए। लक्ष्मण तब क्रीज से बाहर थे और गेंद नानस्ट्राइकर छोर पर विकेट पर लग गई। इसके बाद चेतेश्वर पुजारा (2) भी जल्द ही चलते बने। पुजारा को डेल स्टेन ने एलबीडब्ल्यू किया। पुजारा के बाद तेंदुलकर का साथ देने आए कप्तान महेंद्र सिंह धौनी भी बिना खाता खोले ही चलते बने। धोनी स्टेन की गेंद पर एश्वेल प्रिंस के हाथों लपके गए। भारत ने सुबह दो विकेट पर 142 रन से आगे खेलना शुरू किया। गंभीर और तेंदुलकर को कुछ विषम पलों से गुजरना पड़ा। डेल स्टेन का तेंदुलकर के लिए पहला ओवर बेहद खतरनाक था जिसमें गेंद स्विंग कर रही थी।

Sunday 2 January 2011

टेस्ट क्रिकेट के विशिष्ट क्लब में द्रविड़

पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ 2 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन के न्यूलैंड मैदान पर उतरते ही 150 टेस्ट मैच खेलने वाले दुनिया के पांचवें क्रिकेटर बनने के साथ ही विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए हैं। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच न्यूलैंड्स में चल रहा तीसरा और अंतिम टेस्ट मैच द्रविड़ का 150वां टेस्ट है। इस तरह से वह सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे ऐसे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने 150 या इससे अधिक टेस्ट मैच खेले हैं।
तेंदुलकर अपना 177वां टेस्ट मैच खेल रहे हैं, जो विश्व रिकार्ड है। उनके बाद आस्ट्रेलिया के स्टीव वा (168), एलन बार्डर (156), रिकी पोंटिंग (152) और द्रविड़ का नंबर आता है। द्रविड़ ने अब तक 52.75 की औसत से 12,027 रन बनाए हैं। द्रविड़ ने सर्वाधिक 29 टेस्ट मैच आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह उनका 21वां टेस्ट मैच है। इसके अलावा उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 20, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ 17-17, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ 15-15, जिंबाब्वे के खिलाफ नौ और बांग्लादेश के खिलाफ सात टेस्ट मैच खेले हैं।