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"खेल सिर्फ चरित्र का निर्माण ही नहीं करते हैं, वे इसे प्रकट भी करते हैं." (“Sports do not build character. They reveal it.”) shankar.chandraker@gmail.com ................................................................................................................................................. Raipur(Chhattigarh) India

Sunday 27 February 2011

नेशनल गेम्स ने बदल दी तस्वीर

झारखंड की तरह छत्तीसगढ़ की भी 
बदल जाएगी तकदीर
- सभी फोटो दिनेश यदु
झारखंड से कमलेश गोगिया
रांची. कुछ  देर के लिए यदि 110 करोड़ रुपयों के घोटालों की जांच, व्यवस्था में कमी, अधूरे खेलगांव के साथ हड़बड़ी में कराए  गए झारखंड के 34वें राष्ट्रीय खेलों की गड़बड़ियों को भूल  जाएं तो जाहिर है कि खेलों ने इस राज्य की तकदीर ही बदल दी है। खेलों की जिन बुनियादी सुविधाओं का विकास झारखंड में हुआ है उससे आने वाले समय में इस राज्य को कई और भी राष्ट्रीय पदक मिलेंगे। सिर्फ दो नेशनल गेम्स का इंतजार है जब छत्तीसगढ़ में भी  इन  खेलों का आयोजन होगा और अपने राज्य की भी तस्वीर बदल जाएगी।
34वें राष्ट्रीय खेलों का जिस भव्यता  के साथ यहां समापन हुआ उसे देशभर की मीडिया ने कवर  किया और झारखंड राज्य का नाम लोकप्रिय हो गया। स्थानीय प्रिंट मीडिया ने समापन समारोह को पूरा एक पेज दे दिया। द टेलीग्राफ ने तो प्रथम पृष्ठ पर वेलडन झारखंड की हैडिंग के साथ इस राज्य में खेलों के विकास की सराहना की है और आने वाला भविष्य सुखद बताया है। झारखंड में भले ही छह बार 34वें राष्ट्रीय खेल स्थगित हुए लेकिन जब खेल शुरू  हुए तो वर्ल्ड कप की चमक भी फीकी पड़ गई। रोजाना हजारों की भीड़  ने लगातार 14 दिन तक बिरसा मुंडा स्टेडियम से लेकर मेगा स्पोर्ट्स काम्पलेक्स में अपनी दस्तक दी। खेल देखने के लिए लोग घंटों लंबी कतार लगाए खड़े रहते थे। यहां के  लोगों के लिए खेलों का यह महाउत्सव पहला अनुभव था और उन्हें हर खेल का रोमांच एक ही स्थान पर देखने मिल रहा था जो इसकी सफलता का सबसे बड़ा माध्यम बना। करीब 325 एकड़ में बनाए गए मेगा स्पोर्ट्स कामलेक्स में प्रशासनिक भवन से लेकर नेशनल गेम्स अयोजन समिति भवन, शूटिंग रेंज, वेलोड्रम, टेनिस, कबड्डी, हैंडबाल, बास्केटबाल, एक्वेस्टियन, तैराकी, टेबल  टेनिस जैसे इनडोर  खेल और एथलेटिक्स के आउटडोर खेलों की  एक ही जगह सुविधाओं ने इसे तमाम गड़बड़ियों के बाद भी सफल बना दिया। लेकिन हमें झारखंड में हुई गड़बड़ियों से सबक लेना जरूरी है जिससे 37वें राष्ट्रीय खेलो का सफल अयोजन किया जा सके। किसी भी नेशनल  गेम्स के लिए सबसे अहम है सुरक्षा व्यवस्था और झारखंड के लिए इसे अच्छी किस्मत  ही  मानें कि सुरक्षा की बिना किसी विशेष व्यवस्था के भी कोई दुर्घटना नहीं  हुई।
सबकुछ निपट गया भगवान भरोसे
 झारखंड के 34वें राष्ट्रीय खेल जैसे-तैसे निपट गए और सच्चाई यह है कि सबकुछ भगवान भरोसे निपट गया। इसे आम लोगों का सहयोग मानें या मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की बेहतर किस्मत। किसी भी नेशनल गेम्स के लिए सबसे अहम चीजें होती हैं खेलगांव, खेल की अधोसंरचना, भोजन व यातायात की बेहतर सुविधाएं। झारखंड में केवल खेल की अधोसंरचनाओं ने लोगों का दिल जीता। जबकि नेशनल  गेम्स के निपटते ही सारे अधिकारी गायब हो गए और देश के कई राज्यों के खिलाड़ी खेलगांव  से  वापस अपने-अपने  राज्य लौटने गाड़ियों के लिए भटकते रहे। छत्तीसगढ़ की हैंडबाल टीम को तो रांची से जमशेदपुर जाकर  ट्रेन पकड़ने के लिए अपनी बस करानी पड़ी। हैरानी की बात तो यह भी है कि झारखंड का कोई भी चीफ डी मिशन नहीं बनाया गया था। अयोजन समिति ने मनमाने किसी के भी  एक्रेडिएशन कार्ड बना दिए। मजेदार बात  तो यह  भी  है कि  झारखंड का कोई भी चीफ डी मिशन नहीं बनाया गया था।
ये हुआ बेहतर
0. ट्रांसपोटिंग  की बेहतर  सुविधाएं।
0. रोजाना खेलगांव  में सांस्कृतिक कार्यक्रम।
0. भोजन की बेहतर व्यवस्था (तीन डोम बनाए गए थे  जिसमें 10 हजार  खिलाड़ियों ने आराम से 14 दिनों तक भोजन किया)।
0. उद्घाटन व समापन समारोह का भव्य आयोजन।
0. आम जनता का भरपूर  सहयोग (नेशनल  गेम्स के इतिहास में पहली बार हजारों  की भीड़ रोजाना देखी गई)।
ये हुईं गड़बड़ियां जिनसे बचना है हमें
0. कमजोर  सुरक्षा व्यवस्था
0. राज्य ओलंपिक संघ व सरकार  में तालमेल का अभाव
0. खेलगांव में महिला-पुरुष खिलाड़ियों के लिए एक ही जगह आवास, भोजन की व्यवस्था
0. खेलगांव के अंदर पुलिस की लचर व्यवस्था
नेशनल गेम्स से मिली ये सुविधाएं
0. 325 एकड़ जमीन में मेगा स्पोर्ट्स काम्पलेक्स
0. शेख भिखारी प्रशासनिक भवन (एक लाख   स्क्वायर मीटर)
0. बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम (556000 स्कवायर मीटर में 35 हजार  दर्शकों के बैठने की व्यवस्था)
0. गणपत राय इनडोर स्टेडियम (5800 स्क्वायर मीटर में जूडो, जिम्नास्टिक, बाक्सिंग, फेंसिंग के इनडोर स्टेडियम में 2000 दशर््कों के बैठने की व्यवस्था)
0. हरिवंश ताना भगत इनडोर स्टेडियम (वालीबाल, बास्केटबाल कोर्ट, 4000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था)
0. वीर भानू भगत एक्वेटिक स्टेडियम (10 हजार स्क्वायर मीटर में निर्माण, 3194 दर्शकों की बैठक व्यवस्था)
0. ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव इनडोर स्टेडियम (6600 स्क्वायर मीटर में निर्माण, बैडमिंटन, टेनिस  कोर्ट, 2000 दर्शकों की बैठक व्यवस्था)
0. टेनिस  स्टेडियम (2 हजार  दर्शकों की बैठक व्यवस्था)
0. एस्ट्रो टर्फ हाकी स्टेडियम (5 हजार  दर्शकों की बैठक व्यवस्था)
0. बिरसा मुंडा फुटबाल स्टेडियम (40 हजार  दर्शकों की बैठक  व्यवस्था)
0. टिकैत उमरांव शूटिंग  रेंज (16 हजार स्क्वायर मीटर में निर्माण)
0. वेलोड्रम (10 हजार स्क्वायर मीटर में निर्माण, साइकिलंग)
0. अलबर्ट एक्का स्टेडियम (2450 स्क्वायर मीटर में निर्माण, 2000 दर्शकों की व्यवस्था, खो-खो, कबड्डी कोर्ट)
0. जेआरडी टाटा स्टेडियम जमशेदपुर (आरचरी, फुटबाल ट्रेक, 35 हजार दर्शकों की बैठक व्यवस्था)
0. मैथन डैम (रोविंग, क्याकिंग)
0. कीनोन स्टेडियम (19 हजार दर्शकों की बैठक व्यवस्था, बाक्सिंग )
 
झारखंड को देश के पहले खेल
विश्वविद्यालय की सौगात

राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी ने एक तरफ जहां झारखंड के पदक विजेता खिलाड़ियों को मालामाल कर  दिया तो दूसरी तरफ देश के पहले  खेल विश्वविद्यालय की सौगात भि दे दी। 34वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए झारखंड सरकार ने शहर के बीच ही मेगा स्पोर्ट्स काम्पलेक्स  का निर्माण किया है जहां दर्जनभर से ज्यादा खेलों के अंतरराष्ट्रीय मापदंड के इनडोर व आउटडोर स्टेडियम बनाए गए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री  अर्जुन मुंडा ने कहा कि मेगा  स्पोर्ट्स काम्पलेक्स में देश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी खोली जाएगी। उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो के मुताबिक देश का पहला खेल विश्वविद्यालय रांची के मेगा स्पोर्ट्स काम्पलेक्स में बनाया जाएगा और राज्य में खेलों की जिन आधारभूत संरचनाओं का विकास हुआ है उससे झारखंड में सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी  कई स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया जा सकेगा। इसके अलावा यहां के खिलाड़ी विश्व खेल नक्शे में भी अपना नाम अंकित कर  सकेंगे। 
सात पदक से संतुष्ट नहीं हूं : बशीर
 छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान का कहना  है कि वे 34वें  राष्ट्रीय खेलों में मिले सात पदक से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि छत्तीगढ़ को दस से ज्यादा  पदक मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि हैंडबाल में हमें दो, बास्केटबाल में दो, बाक्सिंग में एक, वेटलिफ्टिंग में दो, तीरंदाजी में दो, क्याकिंग केनोइंग में एक व कुश्ती तीन तथा नेटबाल में तीन पदक मिलने की उम्मीद  थी। श्री खान ने  कहा कि हम इससे ज्यादा पदक की उम्मीद नहीं थी क्योंकि कई खेलों में राज्य के पास बेहतर सुविधाएं नहीं  हैं और हमें एक माह  पहले यह भी नहीं पता था कि कौन सी टीम नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने वाली है। श्री खान ने कहा कि हमारे पास प्रश्क्षिकों की कमी है, अंतरराष्ट्रीय  मापदंड के खेल उपकरण और खेलों की बुनियादी  सुविधाएं नहीं  हैं। हमारे  पास हाकी का न तो टर्फ है और न एथलेटिक्स का बेहतर ट्रेक। इसके बावजूद हमने सात पदक हासिल किए हैं। श्री खान ने कहा कि हमें केरल के 35वें राष्ट्रीय खेलों के लिए अभी से जुट जाना चाहिए।

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